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क्या है अमेरिका में हुए एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की ट्रायल का नतीजा, जानें इसका मतलब

एस्ट्राजेनेका ने अपने बयान में कहा कि उसका टीका कोविड-19 को रोकने में 79 प्रतिशत तक प्रभावी है. फाइल फोटो

एस्ट्राजेनेका ने अपने बयान में कहा कि उसका टीका कोविड-19 को रोकने में 79 प्रतिशत तक प्रभावी है. फाइल फोटो

AstraZeneca: ताजा आंकड़े का मतलब ये है कि जिन लोगों ने एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लगवाई है, उनके संक्रमित होने की आशंका 79 प्रतिशत कम है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 5:42 AM IST
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नई दिल्ली. ब्रिटिश-स्वीडिश औषधि निर्माता कंपनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) ने सोमवार को कहा कि उसकी बनाई वैक्सीन बिना लक्षणों वाले कोरोना वायरस संक्रमितों (Coronavirus) की संख्या कम करने और अस्पताल में भर्ती होने के मामलों को रोकने में प्रभावी सिद्ध हुई है. आइए देखते हैं कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को लेकर हुए शोध के ताजा आंकड़े क्या कहते हैं. उससे पहले आपको बता दें कि एस्ट्राजेनेका ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर AZD1222 वैक्सीन का निर्माण किया था. भारत और अन्य कम आय वाले देशों के लिए कोविशील्ड (Covishield) नाम से इस वैक्सीन को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया विकसित कर रही है. सीरम ने इसके लिए एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से लाइसेंस प्राप्त किया है.

एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन सामान्य जुकाम वाले चिम्पैजी एडेनोवायरस के एक कमजोर संस्करण का इस्तेमाल करते हुए बनाई गई है, इस केस में एडेनोवायरस एक कोड को ढोता है और ये कोड प्रोटीन का निर्माण करता है, जोकि कोरोना वायरस के तल पर स्पाइक का निर्माण करती है. वैक्सीन को एक बार मानव शरीर में लगाए जाने के बाद एडेनोवायरस से संक्रमित व्यक्ति की कोशिकाएं स्पाइक प्रोटीन का निर्माण करने लगती है, जो शरीर में प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून रेस्पांस) को पैदा करती हैं.

79 प्रतिशत प्रभावी, नए आंकड़ों से क्या समझें?
अमेरिका और दो दक्षिण अमेरिकी देशों में ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका टीके पर हुए एक बड़े परीक्षण में सामने आया है कि यह टीका कोविड-19 को होने से रोकने में 79 प्रतिशत और रोग को गंभीर होने से रोकने में सौ प्रतिशत तक प्रभावी है. एस्ट्राजेनेका ने अपने बयान में कहा कि उसका टीका कोविड-19 को रोकने में 79 प्रतिशत तक प्रभावी है और इस रोग को गंभीर होने से रोकने में सौ प्रतिशत तक असरदार है. तीसरे चरण के इस ट्रायल में 32 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था, ये अध्ययन अमेरिका, चिली और पेरू में किया गया, जिससे टीके के “सुरक्षित और प्रभावी” होने की पुष्टि दोबारा हुई. इससे पहले ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में टीके का परीक्षण किया गया था.
इस आंकड़े का मतलब ये है कि जिन लोगों ने एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लगवाई है, उनके संक्रमित होने की आशंका 79 प्रतिशत कम हो गई है, मुकाबले उनके जिन्होंने इस वैक्सीन का टीका नहीं लगवाया है. इसका एक और मतलब है कि वैक्सीन लगवाने के बाद कोरोना वायरस संक्रमण के गंभीर होने की आशंका भी बेहद कम है, जिसमें अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता पड़े.



क्यों महत्वपूर्ण हैं ये आंकड़े
दरअसल अमेरिका सहित तीन देशों में तीसरे चरण के ट्रायल के इन नतीजों में वैक्सीन का प्रभाव ब्रिटेन और ब्राजील जैसे देशों में किए गए वैक्सीन के ट्रायल में सामने आए प्रभाव के आंकड़ों से कहीं ज्यादा हैं. अमेरिका, पेरू और चिली में वैक्सीन का प्रभाव लक्षण वाले संक्रमण के मामलों में 79 फीसद रहा है, अगर वैक्सीन की दूसरी खुराक चार हफ्ते बाद दी जाए. ब्रिटेन और ब्राजील में वैक्सीन के ट्रायल नतीजों पर एस्ट्राजेनेका ने नवंबर 2020 में कहा था कि चार हफ्ते के अंतराल दी गई वैक्सीन की दो खुराक का प्रभाव 62 प्रतिशत रहा है. ये आंकड़ा ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में किए गए अन्य ट्रायल के तीसरे चरण में 17,777 उम्मीदवारों पर किए गए परीक्षण के नतीजों से भी कम था. फरवरी में मेडिकल मैगजीन लांसेट को दिए गए ट्रायल के नतीजों में कहा गया था कि वैक्सीन का प्रभाव 54.9 फीसद रहा है, अगर वैक्सीन की दो खुराक 6 हफ्ते से कम समयांतराल पर दी जाए.

50 से अधिक देशों की मान्यता
विश्व भर में एस्ट्राजेनेका टीके के प्रयोग को 50 से अधिक देशों ने मान्यता दी है, लेकिन अमेरिका में अभी इसके उपयोग की अनुमति नहीं दी गई है. अमेरिका में हुए अध्ययन में 30 हजार लोगों को शामिल किया गया, जिनमें से 20 हजार को टीका लगाया गया, जबकि बाकी को टीके की ‘डमी’ खुराक दी गई. जांचकर्ताओं ने कहा कि टीका सभी उम्र के लोगों पर असरदार है, जोकि इससे पहले अन्य देशों में हुए अध्ययन में साबित नहीं हो पाया था. इस अध्ययन के प्रारंभिक नतीजे उन आंकड़ों में से एक हैं, जिन्हें एस्ट्राजेनेका द्वारा खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को सौंपना है. इसके बाद, एफडीए की सलाहकार समिति, टीके के आपातकालीन उपयोग की अनुमति देने से पहले सार्वजनिक तौर पर साक्ष्यों पर चर्चा करेगी.

हालांकि वैज्ञानिक, अमेरिका में हुए अध्ययन के पूरे नतीजे आने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि यह पता चल सके कि यह टीका कितना प्रभावी है. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और टीके के प्रमुख जांचकर्ता एंड्र्यू पोलार्ड ने कहा, “यह नतीजे मिलना अच्छी खबर है, क्योंकि इससे टीके के प्रभाव का पता चलता है. यह ऑक्सफोर्ड के ट्रायल के नतीजे में भी समान रूप से प्रभावी दिखता है.”

उन्होंने कहा, “सभी उम्र और पृष्ठभूमि के लोगों को टीका दिए जाने पर कोविड-19 से डटकर मुकाबला किया जा सकता है.”
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