क्यों नहीं होगा करुणानिधि का दाह संस्कार, मरीना बीच पर दफनाने की क्या है वजह?

क्यों नहीं होगा करुणानिधि का दाह संस्कार, मरीना बीच पर दफनाने की क्या है वजह?
डीएमके प्रमुख करुणानिधि हमेशा हिंदी विरोध लहर पर सवार रहे

मरीना बीच पर एमजीआर, सीएन अन्नादुरई, जयललिता समेत तमिलनाडु के पूर्व मुख्‍यमंत्रियों सी राजगोपालचारी और के कामराज की समाधि है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 8, 2018, 12:10 PM IST
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तमिलनाडु के पूर्व मुख्‍यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि को चेन्नई के मरीना बीच में दफनाया जाएगा.  करुणानिधि के निधन के बाद विपक्षी डीएमके ने मांग की थी कि उन्हें दफनाने के लिए मरीना बीच पर जगह दी जाए. डीएमके के कार्यकारी अध्‍यक्ष एमके स्‍टालिन ने राज्‍य के मुख्‍यमंत्री के पलानीस्‍वामी को इस बारे में एक चिट्ठी भी लिखी थी. स्टालिन ने करुणानिधि को मरीना बीच पर बने उनके मेंटर (संरक्षक) सीएन अन्‍नादुरई के स्‍मारक के बगल में दफनाने के लिए जगह देने की मांग की थी.

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हालांकि, तमिलनाडु सरकार ने पहले एक बयान जारी कर कहा था कि वह मद्रास हाईकोर्ट में लंबित कई मामलों और कानूनी जटिलताओं को देखते हुए मरीना बीच पर जगह नहीं दी जा सकती. सरकार सरदार पटेल रोड पर राजाजी और कामराज के स्‍मारक के पास दो एकड़ जगह देने के लिए तैयार है. कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि चूंकि करुणानिधि वर्तमान में सीएम नहीं थे, इसलिए सरकार उन्‍हें मरीना बीच पर जगह देने से बच रही है. लेकिन, बुधवार को मद्रास हाईकोर्ट ने करुणानिधि का अंतिम संस्कार मरीना बीच पर ही करने की इजाजत दे दी.



इन सबके बीच बड़ा सवाल ये है कि आखिर तमिलनाडु राजनीति के दिग्गजों को मरीना बीच पर ही क्यों दफनाया जाता है? क्या करुणानिधि को भी मरीना बीच पर जगह मिलेगी?
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मरीना बीच चेन्नई महानगर का एक मशहूर बीच है. ये बीच विश्व के सबसे लंबे तट (बीच) में से एक है. द्रविड़ की राजनीति में मरीना बीच महज़ एक बीच नहीं है, ये एक इतिहास है. एक अतीत है, जिसे भविष्य के लिए संजो कर रखा जाता है. तमिलनाडु में ज्यादातर राजनीतिक हस्तियों और दिग्गजों को निधन के बाद मरीना बीच पर ही दफनाया गया है. उनकी समाधि पर एक स्मारक बना दिया गया, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने दिग्गज नेताओं को याद कर सके. मरीना बीच पर एमजीआर, सीएन अन्नादुरई, जयललिता समेत तमिलनाडु के पूर्व मुख्‍यमंत्रियों सी राजगोपालचारी और के कामराज की समाधि है.

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दरअसल, द्रविड़ हिंदू धर्म के किसी ब्राह्मणवादी परंपरा और रस्म में यकीन नहीं रखते हैं. इसलिए यहां के हस्तियों और राजनेताओं के निधन के बाद उनका दाह संस्कार नहीं किया जाता, बल्कि उन्हें दफनाया जाता है.



जयललिता भी एक द्रविड़ पार्टी की प्रमुख थीं, जिसकी नींव ब्राह्मणवाद के विरोध के लिए पड़ी थी. करुणानिधि भी इस आंदोलन से जुड़े रहे हैं. इसलिए उन्हें भी दफनाया जाएगा. सामान्य हिंदू परंपरा के खिलाफ द्रविड़ मूवमेंट से जुड़े नेता अपने नाम के साथ जातिसूचक उपनाम (title) का भी इस्तेमाल नहीं करते हैं.

मरीना बीच पर द्रविड़ आंदोलन के बड़े नेता और डीएमके संस्थापक सीएन अन्नादुरई की कब्र है. इसके दाएं तरफ एमजीआर की कब्र है. एमजीआर के बगल में ही उनकी राजनीतिक वारिस जे. जयललिता की समाधि है. मरीना बीच पर जयललिता से पहले एमजी रामचंद्रन को भी दफनाया गया था. डीएमके करुणानिधि को अन्नादुरई के बगल में दफनाना चाहती है.
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