नदी के रास्ते बांग्लादेश भेजने के लिए नशे के सामान पर इसलिए बांधा जाता है मोबाइल फोन

नदी के रास्ते बांग्लादेश भेजने के लिए नशे के सामान पर इसलिए बांधा जाता है मोबाइल फोन
बॉर्डर पर मुस्तैद बीएसएफ के जवान (File Photo)

तस्कर (Smuggling) कोई न कोई नया तरीका निकालते हैं. लेकिन पहले से अलर्ट बॉडर्र सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के जवान उनके मंसूबों को फेल कर देते हैं. ऐसे ही एक तरीके का खुलासा हाल ही में बीएसएफ ने किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 4, 2020, 6:34 PM IST
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नई दिल्ली. तस्करी (Smuggling) के जरिए नशे का सामान भारत (India) से बांग्लाादेश (Bangladesh) भेजने के लिए हर रोज नए तरीके अपना रहे हैं. यह तस्करी मालदा बॉर्डर के रास्ते होती है. फिर भी वहां पहले से अलर्ट बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के जवान उनके मंसूबों को फेल कर देते हैं. ऐसे ही एक तरीके का खुलासा हाल ही में बीएसएफ ने किया है. जिसमें नशे के सामान पर मोबाइल फोन (Mobile Phone) बांधा गया था. फिर उस सामान को नदी में छोड़ दिया गया. यह तीसरा मौका था जब बीएसएफ ने इस तरीके से होने वाली तस्करी के सामान को जब्त किया है.

सोवापुर टेंट पोस्ट पर ऐसे पकड़ा नदी में तैरता सामान

बारिश के चलते गंगा नदी का बहाव तेज हो गया है. इसी का फायदा आजकल तस्कर उठा रहे हैं. बीएसएफ की 78 बटालियन के मुताबिक 2 सितम्बर की देर शाम सोवापुर टेंट पोस्ट के पास जवानों को नदी में जाती हुई कोई चीज दिखाई दी. फौरन ही इसकी खबर नदी में गश्त कर रहे दूसरे जवानों को दी गई. गश्त कर रहे जवान स्पीड बोट से मौके पर पहुंच गए.



उन्होंने नदी में तैरते उस सामान को कब्जे में ले लिया. सामान को खोलकर देखा तो उसके अंदर से फेंसेडिल कफ सीरप की शीशियां निकलीं. दो बैग में एक हजार से ज्यादा शीशियां भरी हुईं थीं. इनकी कीमत करीब पौने दो लाख रुपये बताई जा रही है.
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सामान पर इसलिए मोबाइल बांधते हैं तस्कर

बीएसएफ अधिकारियों की मानें तो तस्करों का एक ग्रुप भारत में बैठा होता है तो दूसरा बांग्लाबदेश में. भारत में बैठा ग्रुप थर्माकोल या फिर बांस की मदद से शीशियों से भरे बैग को नदी में बहता है. किसी को दिखाई न दे, इसलिए यह काम सूरज छिपने के बाद होता है. दोनों ग्रुप अपनी टाइमिंग सेट करने के बाद नदी किनारे आ जाते हैं. भारत में बैठा ग्रुप सामान के ऊपर सस्ता वाला एक मोबाइल बांध देते हैं. इस मोबाइल का काम यह होता है कि जैसे ही सामान भारतीय इलाके से बांग्लादेश में एंट्री करता है तो भारत में बैठा ग्रुप सामान पर बंधे मोबाइल पर घंटी देना शुरु कर देता है.

इससे होता यह है कि मोबाइल की लाइट जलने लगती है और आवाज भी होने लगती है. लाइट जलने से अंधेरे में भी बांग्लाादेश वाले ग्रुप को नदी में सामान दिखाई दे जाता है. वो फौरन नदी में नाव डालकर सामान तक पहुंच जाते हैं.

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हाल ही में पकड़ा था फेंसेडिल सीरप से भरा ट्रक 

कुछ दिन पहले ही यूपी की स्पेशल टॉस्क फोर्स ने आजमगढ़ के पास फेंसेडिल सीरप से भरा एक ट्रक पकड़ा था. यह ट्रक आगरा से चला था और इसे कोलकाता पहुंचना था. लेकिन इसे पहले ही पकड़ लिया गया. ट्रक में लाखों रुपये का सीरप भरा हुआ था.
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