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कोरोना संक्रमण में अव्‍वल लेकिन कोविड वैक्‍सीनेशन में हरियाणा और एमपी से भी क्‍यों पिछड़ गई दिल्‍ली

कोरोना संक्रमण में अव्‍वल लेकिन कोविड वैक्‍सीनेशन में हरियाणा और एमपी से भी क्‍यों पिछड़ गई दिल्‍ली

सऊदी अरब द्वारा लगाए प्रतिबंधों से सबसे ज्यादा नुकसान भारतीय वर्कर्स को हुआ है. (सांकेतिक फोटो: AP)

सऊदी अरब द्वारा लगाए प्रतिबंधों से सबसे ज्यादा नुकसान भारतीय वर्कर्स को हुआ है. (सांकेतिक फोटो: AP)

कोरोना संक्रमण में सबसे अव्‍वल रह चुकी देश की राजधानी दिल्‍ली कोविड वैक्‍सीनेशन मामले में फिसड्डी साबित हो रही है. यहां हरियाणा, ओडिशा, महाराष्‍ट्र और मध्‍य प्रदेश से भी कम कोविड वैक्‍सीनेशन हुआ है.

नई दिल्‍ली. केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं. कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्‍या में एक समय टॉप पर रही दिल्‍ली कोविड वैक्‍सीनेशन (Delhi Covid Vaccination) में फिसड्डी साबित हो रही है. कोरोना के खिलाफ देश में 16 जनवरी से कोविड वैक्‍सीनेशन अभियान चल रहा है. जिसमें देशभर के स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों (Health Workers) और फ्रंटलाइन वर्कर्स को कोरोना की देश में बनी वैक्सीन कोवैक्‍सीन (Covaxin) और कोविशील्‍ड (Covishield) लगाई जा रही हैं लेकिन दिल्‍ली का हाल टीकाकरण के नाम पर बेहाल है.

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय (Health Ministry) के आंकड़ों पर गौर करें तो देशभर में लगभग 30 लाख लोगों को कोविड वैक्‍सीन (Covid Vaccine) दी जा चुकी है. कोविड वैक्‍सीनेशन के मामले में लक्षदीप सबसे टॉप पर है जबकि वहां कोरोना संक्रमण की दर न के बराबर रही है. कोविड वैक्‍सीनेशन के पहले फेज में यहां 83.4% सबसे ज्यादा हेल्थकेयर वर्कर का वैक्सीनशन हुआ है. वहीं दूसरे नंबर पर ओडिशा (Odisa) है. यहां 50.7% लोगों को वैक्‍सीन लग चुकी है. बात करें हरियाणा (Haryana) की तो यहां भी वैक्‍सीन लेने वालों की संख्‍या 50% है. वहीं कर्नाटक (Karnataka) में 35.6% और मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) में 35.5% और कोरोना से सबसे ज्‍यादा हलकान रहे महाराष्ट्र में वैक्‍सीनेशन (Vaccination in Maharashtra) का आंकड़ा 20.7%  है.

देश की राजधानी में कोविड वैक्‍सीनेशन में कमी चिंता की बात है.

देश की राजधानी में कोविड वैक्‍सीनेशन में कमी चिंता की बात है.

अगर देश की राजधानी दिल्‍ली का हाल देखें तो यहां सिर्फ 15.7 फीसदी लोगों ने ही वैक्‍सीन ली है. दिल्‍ली से थोड़ा कम सिर्फ झारखंड (Jharkhand) है जहां 14.7 फीसदी लोगों ने वैक्‍सीनेशन कराया है. केंद्रीय मंत्रालय की ओर से सभी राज्‍यों को सुधार करने के लिए भी कहा गया है लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर दिल्‍ली में यह प्रतिशत कम क्‍यों है. दिल्‍ली को लेकर कई चीजें सामने आ रही हैं.

कोवैक्‍सीन बनी वजह!

ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्र कहते हैं कि दिल्‍ली में वैक्‍सीन कम लगवाने की एक वजह केंद्र सरकार के अस्‍पतालों में कोवैक्‍सीन (Covaxin) भेजना भी हो सकती है. भारत बायोटेक की कोवैक्‍सीन के अभी सभी ट्रायल पूरे नहीं हुए हैं. जबकि दिल्‍ली के 81 में से प्रमुख और बड़े छह केंद्र सरकार के अस्‍पतालों में कोवैक्‍सीन ही भेजी गई थी. इनमें एम्‍स (AIIMS), सफदरजंग अस्‍पताल (Safdarjung Hospital), आरएमएल (RML), कलावती सरन चिल्‍ड्रन अस्‍प्‍ताल और दो ईएसआई अस्‍पताल शामिल हैं. इस दौरान आरएमएल के जूनियर रेजिडेंट डॉक्‍टरों ने कोवैक्‍सीन न लगवाने को लेकर पत्र भी लिखा था. जिस पर काफी बवाल हुआ. यही हाल कई अन्‍य अस्‍पतालों में भी हुआ हालांकि विरोध के सुर बाहर नहीं आए. जबकि प्राइवेट अस्‍पतालों में कोविशील्‍ड लगाई गई थी वहां काफी ठीक रहा.

covaxin भारत बायोटेक की कोवैक्‍सीन को सभी ट्रायल पूरे करने से पहले मंजूरी दे दी गई है.(Photo- news19 creative)

भारत बायोटेक की कोवैक्‍सीन को सभी ट्रायल पूरे करने से पहले मंजूरी दे दी गई है.(Photo- news19 creative)

रजिस्‍ट्रेशन और मंजूरी मिलने में देरी

डॉ. मिश्रा कहते हैं कि वैक्‍सीन लगवाने से पहले हेल्‍थकेयर वर्कर का रजिस्‍ट्रेशन होता है. दिल्‍ली में इसके लिए एसडीएम ऑफिस में दस्‍तावेज लेकर डाटा बनाने की पूरी प्रक्रिया की जाती है. जिसमें पूरे 24 घंटे का भी समय लग सकता है. मेरे साथ खुद ऐसा हुआ कि इन औपचारिकताओं में एक दिन लग गया. रजिस्‍ट्रेशन और वैक्‍सीन लगवाने की मंजूरी में भी देर लग रही है. ऐसे में दिल्‍ली में शुरुआत में आई यह परेशानी भी कम वैक्‍सीनेशन की वजह हो सकती है.

इम्‍यूनिटी भी हो सकती है कारण

वे कहते हैं कि दिल्‍ली में कई सीरो सर्वे हुए जिनमें काफी ज्‍यादा संख्‍या में लोगों के कोरोना से संक्रमित होने और ठीक होने के प्रमाण मिले. देखा गया कि लोगों में एंटीबॉडीज बन चुकी थीं. इसकी वजह उनकी मजबूत इम्‍यूनिटी (Strong Immunity) रही. ऐसे में ये भी हो सकता है कि जो लोग कोरोना (Corona) से पीड़‍ित रहे हों और उनमें एंटीबॉडीज बन चुकी हैं लिहाजा उन्‍होंने अब वैक्‍सीन न ली हो क्‍योंकि प्राकृतिक रूप से उनके पास कोरोना से लड़ने और प्रभाव में न आने की क्षमता है.

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भारत और दिल्‍ली में अब घट रहे हैं कोरोना के नए केस. (Pic- AP)

दिल्‍ली में कम होते कोरोना केस

दिल्‍ली में लगातार कम होता कोरोना का ग्राफ सुखद है लेकिन इसके चक्‍कर में लोग इसे हल्‍के में ले रहे हैं. जो नहीं लेना चाहिए. यहां लापरवाह होना खतरे को और ज्‍यादा बढ़ा सकता है. ऐसे में दिल्‍ली में घटते केसों को देखते हुए लोग कोरोना की वैक्‍सीन के प्रति उदासीन हैं यह भी एक वजह हो सकती है. हालांकि दिल्‍ली में कोविड वैक्‍सीनेशन प्रतिशत हाई होना चाहिए था जो औरों को भी प्रेरित करता.

Tags: Corona Cases in Delhi, Corona vaccination, Covid Vaccination, Delhi corona cases, Health Department

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