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इसलिए पुलिस तुरंत दर्ज नहीं करती है रेप की एफआईआर

इसलिए पुलिस तुरंत दर्ज नहीं करती है रेप की एफआईआर

प्रतीकात्मक फोटो.

प्रतीकात्मक फोटो.

अलवर रेप पीड़िता पूरे 10 दिन तक पुलिस थाने से लेकर अधिकारियों के चक्कर काटती रही लेकिन उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई. जब मामले ने तूल पकड़ा तो उसकी शिकायत दर्ज हुई और आरोपी की गिरफ्तारी हुई.

    अलवर रेप पीड़िता पूरे 10 दिन तक पुलिस थाने से लेकर अधिकारियों के चक्कर काटती रही लेकिन उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई. जब मामले ने तूल पकड़ा तो उसकी शिकायत दर्ज हुई और आरोपी की गिरफ्तारी हुई. लेकिन ये कोई पहला मौका नहीं है जब रेप पीड़िता की एफआईआर दर्ज कराने के लिए इतना बवाल हुआ हो. इस बारे में यूपी पुलिस में एसपी रहे रिटायर्ड ओपी तिवारी ने खुलासा करते हुए बताईं ये वजह.

    ओपी तिवारी का कहना है, “सबसे पहली बात तो ये कि अगर रेप पीड़िता और आरोपी अलग-अलग धर्म के हैं तो ऐसे मामलों में साम्प्रदायिक तनाव फैलता है. लड़ाई की आशंका रहती है. इसलिए ऐसे बवाल को रोकने के लिए कुछ दिन तक एफआईआर दर्ज करने से बचा जाता है.

    क्योंकि अगर एक बार एफआईआर दर्ज हो गई तो लोगों के बीच इस बात पर मुहर लग जाती है कि रेप तो हुआ है इसीलिए एफआईआर हुई है. ऐसे मामलों में देरी करने का फायदा ये होता है कि इस बीच जांच करने का पूरा वक्त मिल जाता है और जो भी सच्चाई होती है वो सामने आ जाती है.

    दूसरा कारण है जब मामला दो जातियों के बीच का होता है तो उसमे ये देखना होता है कि मामला कहीं आपसी रंजिश का तो नहीं है. कोई किसी को मोहरा तो नहीं बना रहा है. इसी तरह से जब मामले धर्म और जाति से अलग वाले होते हैं तो उसमे भी थोड़ी देरी करते हुए आपसी रंजिश और दूसरी वजहों का पता लगाया जाता है.

    और रेप ही नहीं डकैती और मर्डर जैसे मामलों में भी देरी की जो सबसे बड़ी वजह है वो है राजनीति. बड़े मामलों में कम मुकदमे दर्ज करने का पुलिस के ऊपर इतना दबाव होता है कि पुलिस चाहकर भी कुछ नहीं कर पाती है. राजनीतिज्ञों को ये डर होता है कि मामला दर्ज होते ही विपक्ष इसे मुद्दा बना लेगा या आने वाली सरकार इन आंकड़ों को इश्यू बनाकर उन्हें बदनाम करेगी.”

    दर्ज न हो तो ऐसे लिखवाएं एफआईआर

    एसपी रिटायर्ड ओपी तिवारी का कहना है, “आपके साथ कोई घटना हुई है और थाना आपकी एफआईआर नहीं लिख रहा है. ज़िले के अधिकारी भी आपकी नहीं सुन रहे हैं तो ऐसे हालात में आप ज़ीरो एफआईआर दर्ज करा सकते हैं. ज़ीरो एफआईआर का मतलब ये है कि उदाहरण के तौर पर आपके साथ घटना किसी दूसरे ज़िले और राज्य में हुई है लेकिन उसकी रिपोर्ट आप दिल्ली में भी दर्ज करा सकती हैं. खास बात ये है कि ज़ीरों एफआईआर आप किसी भी मामले में दर्ज करा सकते हैं. फिर वो चाहें मामलूी सी चोरी का हो या फिर कोई छोटी सी दिखने वाली लूट का. अगर ऐसा भी न हो तो फिर आप 156 (3) का सहारा लेकर आप कोर्ट के जरिए भी एफआईआर दर्ज करा सकते हैं.”

    योगिता बोलीं गुडवर्क के लिए रेप छिपाती है पुलिस

    दास चैरिटेबल फाउंडेशन के तहत रेप पीड़ितों के लिए पिर कार्यक्रम चलाने वालीं योगिता भायना इस बारे में बताती हैं, "थाने का और थानेदार का रिकार्ड खराब न हो इसलिए भी पुलिस रेप के मामलों को दर्ज करने से बचती है. दूसरा ये कि थाने में आज भी पुरुषवादी मानसिकता के तहत काम होता है. रेप पीड़िता को ही पहनावे और आने-जाने के वक्त को देखते हुए दोषी ठहराया जाता है. तीसरा मैंने ये भी महसूस किया है कि पुलिस के पास आज भी संसाधनों की कमी है. रेप या दूसरे मामलों की एफआईआर दर्ज होने पर थानेदार से सवाल-जवाब करने के बजाए उसे शाबाशी मिलनी चाहिए कि वो पूरी ईमानदारी से काम कर रहा है."

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    Tags: Dalit, Muslim, Police, Politics, Rape

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