आखिर क्यों देश के पहले लोकपाल नहीं बनाए जा सकते हैं जस्टिस दीपक मिश्रा

दीपक मिश्रा (फाइल फोटो)
दीपक मिश्रा (फाइल फोटो)

लोकपाल के चयन से संबंधित एक कमिटी की तीन बैठकों में जस्टिस मिश्रा खुद मौजूद रह चुके हैं, ऐसे में लोकपाल के पद के लिए उनको उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना बेहद कम है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2018, 10:31 AM IST
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भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की सेवानिवृत्ति का दिन करीब आते-आते अटकलें शुरू हो गई थीं कि उन्हें भारत का पहला लोकपाल बनाया जााएगा. हालांकि हकीकत इससे कोसों दूर है. लोकपाल के चयन से संबंधित एक कमिटी की तीन बैठकों में जस्टिस मिश्रा खुद मौजूद रह चुके हैं, ऐसे में लोकपाल के पद के लिए उनको उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना बेहद कम है.

लोकपाल एक्ट के 4 (1) के तहत सिलेक्शन कमिटी की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं. इसमें अन्य सदस्यों के अलावा भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) या फिर उनकी तरफ से नामित सुप्रीम कोर्ट के एक जज शामिल होते हैं.

सितंबर, 2017 में भारत के प्रधान न्यायाधीश का पद ग्रहण करने वाले जस्टिस मिश्रा ने लोकपाल के चयन से संबंधित कमिटी की बैठक में शामिल होने के लिए किसी अन्य जज को नामित नहीं किया. वह खुद इन बैठकों में शामिल हुए.




जब वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी को इस साल मई में चयन कमिटी में बतौर 'प्रतिष्ठित न्यायवादी' चुना गया तो जस्टिस मिश्रा कमिटी में सहभागी के तौर पर बैठक में शामिल थे. इसी तरह इसी जुलाई में जस्टिस मिश्रा एक अन्य बैठक में भी शामिल हुए.

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19 जुलाई को जस्टिस मिश्रा उस बैठक में भी शामिल हुए जिसमें नामों पर जल्द से जल्द निर्णय लेने के लिए समयसीमा तय की गई थी. जस्टिस मिश्रा उस बैठक में भी शामिल रहे जिसमें सिलेक्शन कमिटी को अंतिम रूप दिया गया. इस संबंध में 27 सितंबर को अधिसूचना जारी की गई थी.



इन सभी बैठकों में शामिल होने और सिलेक्शन कमिटी के महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल होने के चलते लोकपाल के रूप में जस्टिस मिश्रा की उम्मीदवारी की संभावना बेहद कम है.

कमिटी उस व्यक्ति के नाम की सिफारिश नहीं कर सकती है जो कमिटी के सदस्यों में से एक रहा हो. इसी तरह, चयन समिति के पास एक सदस्य (रोहतगी) भी हैं, जिन्हें जस्टिस मिश्रा का अनुमोदन है.

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इस पद के लिए जस्टिस मिश्रा के नाम पर विचार किये जाने से कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट सामने आ जाएगा. कोई ऐसी नियुक्ति के खिलाफ पीआईएल की बाढ़ आ जाएगी. ऐसा लगता है कि जस्टिस मिश्रा ने भारत का पहला लोकपाल बनने की दौड़ से खुद को बाहर कर लिया है.

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