ओम बिरला को स्पीकर चुनकर पीएम मोदी ने फिर दिया सरप्राइज

जब लोकसभा स्पीकर के नाम पर कयास लगाए जा रहे थे और सस्पेंस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था तब राजस्थान से सिर्फ दूसरी बार लोकसभा में चुनकर आए ओम बिरला को इस महत्वपूर्ण पद के लिए चुन लिया गया.

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: June 18, 2019, 6:39 PM IST
ओम बिरला को स्पीकर चुनकर पीएम मोदी ने फिर दिया सरप्राइज
ओम बिरला को लोकसभा स्पीकर बना पीएम मोदी ने फिर दिया सरप्राइज
अमिताभ सिन्हा
अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: June 18, 2019, 6:39 PM IST
एलिमेंट ऑफ सरप्राइज- पंक्तियां तो अंग्रेजी की हैं लेकिन ये प्रधानमंत्री की कार्यशैली का अहम हिस्सा हैं. कड़े फैसले लेने हों या फिर महत्वपूर्ण नियुक्तियां पीएम मोदी चौकाने में पीछे नहीं रहते. अंत तक सबको इंतजार रहता है कि जिम्मेदारी किसे मिले, लेकिन कानों-कान खबर तक नहीं मिलती. अगर मिली तो समझो पत्ता कटा. आखिर खट्टर जब हरियाणा के मुख्यमंत्री चुने गए थे तो हर किसी ने सवाल उठाए थे और अब वहीं राज्य बीजेपी का गढ बनता जा रहा है. हर राज्य में प्रयोग और बदलाव किए गए और पार्टी बढ़ती गई.

मोदी 2.0 में भी चौकाने वाले फैसले लेने से पीएम मोदी कहां पीछे रहने वाले थे. अमित शाह उनके मंत्रीमंडल में शामिल होंगे, इस बात को लेकर आखिरी दिन तक कोई अटकलें लगाने तक को तैयार नहीं था. विदेश मंत्री जयशंकर बनेंगे, जब तक पीएम मोदी ने उन्हें चाय पर नहीं बुलाया कोई अंदाजा तक नहीं लगा पाया था.

चौकाने वाले ऐसे फैसले जारी रहे. अरुण जेटली की जगह थावर चंद गहलोत को राज्यसभा में सदन का नेता बनाया गया. उनकी वरिष्ठता, अनुभव और पार्टी के प्रति उनकी कटिबद्धता ने एक बड़ा रोल निभाया. जब लोकसभा स्पीकर के नाम पर कयास लगाए जा रहे थे और सस्पेंस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था तब राजस्थान से सिर्फ दूसरी बार लोकसभा में चुनकर आए ओम बिरला को इस महत्वपूर्ण पद के लिए चुन लिया गया. ओम बिरला तीन बार विधायक रहे और कोटा सीट से 2014 और फिर 2019 में जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं.

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दरअसल पीएम मोदी ने 2019 के नतीजों के बाद पहली बार सेंट्रल हॉल में सांसदों को संबोधित किया तो एक बड़ा संदेश दिया था. संदेश ये कि जो पार्टी के लिए काम करते रहे हैं और उनकी प्रतिबद्धता संशय से परे है उन्हें रोल जरुर मिलेगा. शासन में अनुभव हो ना हो, लेकिन पार्टी के लिए काम करने का लंबा अनुभव अगर उनके बायोडाटा में है तो उन्हें फायदा जरुर मिलेगा. इसलिए पीएम मोदी के ऐसे फैसले सिर्फ चौकाने के लिए नहीं होते बल्कि संदेश देने के लिए भी होते हैं.

मोदी हो या अमित शाह- ये जोडी 24 घंटे काम करती है और हर वक्त यही रणनीति बनाती रहती है कि संगठन से लेकर सरकार और मजबूत कैसे करें. इसलिए ऐसी नियुक्तियों में संसदीय या फिर शासन के अनुभव हों ना हों तीन बातों का खास ध्यान रखा जाता है. ये हैं चुने गए व्यक्ति की योग्यता और जो काम दिया जाए उसमें उसकी निपुणता और सबसे आखिर में काम करने की उसकी तत्परता. यानि पद की लालसा के बिना काम करने के आगे आने वालों को फल जरूर मिलता है. इसलिए कई बार की सांसद मेनका गांधी से लेकर तमाम लोगों के नाम चलते रहे लेकिन लॉटरी लगी तो ओम बिरला की.

यानी बीजेपी अब बदल चुकी है. कर्म किए जा फल की इच्छा मत कर ऐ इंसान वाली थ्योरी पर चल रही बीजेपी में संदेश और संकेत साफ हैं कि छपास और दिखास से बचते हुए जो जिम्मेदारी मिले उसे जोर-शोर से निभाएं और हर व्यक्ति की गतिविधि आलाकमान की रडार पर जरुर है.
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First published: June 18, 2019, 6:39 PM IST
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