OPINION: ट्रंप के कश्मीर पर बोले ‘झूठ’ को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को क्यों नहीं देना चाहिए सदन में बयान

भारत ने शांति से अपनी बात रख दी है. ऐसे में प्रधानमंत्री को इसे आगे बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है. ऐसा करके मोदी खुद को ट्रंप के स्तर पर ले जाएंगे.

Zakka Jacob | News18Hindi
Updated: July 25, 2019, 2:19 PM IST
OPINION: ट्रंप के कश्मीर पर बोले ‘झूठ’ को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को क्यों नहीं देना चाहिए सदन में बयान
भारत ने शांति से अपनी बात रख दी है. ऐसे में प्रधानमंत्री को इसे आगे बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है. ऐसा करके मोदी खुद को ट्रंप के स्तर पर ले जाएंगे.
Zakka Jacob
Zakka Jacob | News18Hindi
Updated: July 25, 2019, 2:19 PM IST
पिछले तीन दिन से विपक्षी दल एक मांग को लेकर संसद की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं. उनकी मांग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीर के मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अपमानजनक बयान पर सफाई दें. ट्रंप ने कहा था कि उनसे कश्मीर पर मध्यस्थता करने की गुजारिश की गई थी.

यह महज एक झूठ नहीं है. बल्कि ऐसा झूठ है, जिसे जल्दी से जल्दी दफन कर दिए जाने की जरूरत है. आखिरकार, अगर ये सच होता, तो 40 साल से भारत की कश्मीर नीति को खत्म करने वाला होता. पीएम मोदी तो बहुत दूर की बात हैं, किसी भी प्रधानमंत्री के लिए ऐसा करना संभव नहीं. ट्रंप के बयान के एक घंटे बाद ही विदेश मंत्रालय की तरफ से बयान जारी किया गया. इसमें ट्रंप को झूठा कहे बिना सारी बातें साफ कर दी गईं. इसके बाद, अगले दिन संसद के दोनों सदनों में विदेश मंत्री की तरफ से ट्रंप के बयान का खंडन आया. मामला यहीं पर खत्म हो जाना चाहिए था.

अब समझना चाहिए कि जिस बात पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की तरफ से बयान आ गया. जिस पर विदेश मंत्री ने बात रख दी, उस प्रधानमंत्री के बयान की मांग करने के पीछे क्या जोखिम हैं. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि ट्रंप ने विदेश मंत्री या विदेश सचिव का नाम नहीं लिया है, बल्कि प्रधानमंत्री का नाम लिया है. इसलिए मोदी की जिम्मेदारी है कि वह इस पर सफाई दें. मोटे तौर पर देखें, तो मांग में कोई समस्या नहीं दिखती. लेकिन कुछ वजह हैं, जिससे प्रधानमंत्री को विपक्ष के जाल में नहीं फंसना चाहिए.

जब प्रधानमंत्री संसद में बोलते हैं, तो उस जगह की अपनी पवित्रता तो है ही. उसके साथ, उनकी बातों को पूरी दुनिया में डिप्लोमैटिक नजरिए से अहमियत दी जाती है. सदन में आकर भारतीय प्रधानमंत्री का अमेरिकी प्रधानमंत्री को झूठा कहना बहुत खराब दिखेगा, भले ही मोदी इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल न करें, फिर भी. भारत के लिहाज से इस तरह के बयान के नतीजे ऐसे होंगे, जिसे काबू कर पाना आसान नहीं होगा.


ट्रंप अहंकारी हैं. उनका ईगो शायद अमेरिकी उप महाद्वीप से भी बड़ा है. अगर वह छोटे देश के प्रधानमंत्री से यह सुनते हैं कि वह झूठे हैं, तो इससे ट्रंप के ईगो पर बहुत असर पड़ेगा. भले ही वह देश अमेरिका का अहम पार्टनर हो. यह बात उन्हें भड़काएगी. वो तमाम मुद्दों पर भारत के रास्ते में आते नजर आएंगे. खासतौर पर व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है. भारत अपनी बात विदेश मंत्री और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के माध्यम से रख चुका है. यहां तक कि स्टेट डिपार्टमेंट और व्हाइट हाउस ने भी ट्रंप के इस बयान से दूरी बना ली है. शायद उन्हें समझ आ गया है कि ट्रंप का बयान ऐसे मामले में भारत को उकसाने वाला है, जो उसके लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा रहा है.

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (फाइल फोटो)


यह साफ है कि कश्मीर के मामले पर बात नहीं हुई थी. ओसाका में हुई मीटिंग में क्या हुआ था, यह भारत साफ कर चुका है. अमेरिकी की तरफ से जारी इवांका ट्रंप के वीडियो से भी साफ होता है कि कश्मीर का मामला नहीं उठा था. दोनों नेताओं के साथ डिनर के वक्त बातचीत के दौरान इंटरप्रेटर थे. उन्होंने बातचीत के दौरान नोट्स लिए थे. इसमें भी कश्मीर का कोई जिक्र नहीं है. ये सारी बातें सार्वजनिक हैं.
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भारत ने शांति से अपनी बात रख दी है. ऐसे में प्रधानमंत्री को इसे आगे बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है. ऐसा करके मोदी खुद को ट्रंप के स्तर पर ले जाएंगे. विपक्षी पार्टियां भी कम से कम ऐसा तो नहीं ही चाहेंगी. सवाल यही है कि ट्रंप ने आखिर ऐसा क्यों कहा? वह क्या चाहते हैं? इनके जवाब भारतीय डिप्लोमैटेस को ढूंढने चाहिए. शांति से और पर्दे के पीछे रहकर. सार्वजनिक तौर पर भारतीय प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति को लताड़े, इससे भारतीय राजनयिकों का काम मुश्किल ही होता. और एक बार प्रधानमंत्री ने वो कह दिया, जो वो कहना चाहते हैं, तो आप समझ सकते हैं कि बीजेपी के कार्यकर्ताओं को यूएस एंबैसी के सामने आकर प्रदर्शन करने में कितना वक्त लगेगा! पिछली बार इस तरह की घटना 2013 के आसपास देव्यानी खोब्रागाडे के मामले में हुई थी. उस नुकसान की भरपाई करने में भारत-अमेरिका संबंधों को कई साल लगे. हमें वापस उसी दिशा में नहीं जाना चाहिए.

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First published: July 25, 2019, 2:07 PM IST
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