अजीत डोभाल पर इतना भरोसा क्यों करते हैं प्रधानमंत्री मोदी?

भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर में एक के बाद एक आंतकियों का जिस तरह सफाया किया है, वो भी डोभाल की कार्यशैली का सबसे बड़ा उदाहरण है.

Anil Rai | News18Hindi
Updated: June 3, 2019, 4:22 PM IST
अजीत डोभाल पर इतना भरोसा क्यों करते हैं प्रधानमंत्री मोदी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करते अजीत डोभाल
Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: June 3, 2019, 4:22 PM IST
अजीत डोभाल एक बार फिर देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किए गए हैं. 74 साल के अजीत डोभाल का कद इस बार पिछली बार से ज्याद बड़ा होता दिख रहा है. डोभाल को नियुक्ति करने के साथ-साथ सरकार ने उन्हें कैबिनेट का दर्जा भी दिया है. ऐसे में ये सवाल उठना लाजमी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अजीत डोभाल पर इतना भरोसा क्यों करते हैं ? इस सवाल का जवाब अजीत डोभाल के 5 साल के कार्यकाल में मिल जाएगा. जिस तरह लगातार जम्मू-कश्मीर में सेना ने एक के बाद एक आंतकियों का सफाया किया वो डोभाल की कार्यशैली का सबसे बड़ा उदाहरण है.

देश के इतिहास में पहली बार नक्सलवाद को खत्म करने के लिए देश की सीमा के बाहर जाकर सफल सर्जिकल स्ट्राइक की गई. भारत ने अजीत डोभाल के नेतृत्व में हर उस हमले का जवाब दिया जो देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा पर किए गए. वरिष्ठ पत्रकार अंबिका नंद सहाय मानते हैं कि आम चुनावों में बीजेपी को मिली 303 सीटों में अजीत डोभाल का भी बड़ा योगदान हैं.



सहाय का कहना है कि जिस समय पुलवामा हमले के बाद डोभाल के नेतृत्व में भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर आतंकी कैंपों को निशाना बनाया, उससे देश की जनता में ये साफ संदेश गया कि ये सरकार पाकिस्तान के किसी भी हमले का जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है. इसके पहले भी उरी हमले का जवाब भारत ने सर्जिक स्ट्राइल से दिया था. देश में इस बार का चुनाव देश की सुरक्षा और स्वाभिमान के मुद्दे पर लड़ा गया. ऐसे में अजीत डोभाल के नेतृत्व में हुए इस सफल ऑपरेशन का फायदा सरकार को मिला.

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कौन है अजीत डोभाल
केरल कैडर के 1968 बैच के रिडायर्ड आईपीएस अफसर अजीत डोभाल इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व निदेशक रहे हैं. 1988 में अजीत डोभाल को कीर्ति चक्र दिया गया. डोभाल कीर्ति चक्र पाने वाले पहले आईपीएस अफसर हैं. कीर्ति चक्र की ये कहानी मई 1988 की है, जब ऑपरेशन ब्लैक थंडर की योजना बनी. कहते हैं कार्रवाई से कुछ दिन पहले से ही अमृतसर में एक नया रिक्शा वाला दिखने लगा था. खालिस्तानी आतंकियों को उस पर शक हुआ. 10 दिन तक उसकी निगरानी के बाद एक दिन आतंकियों ने उसे रोका, तो रिक्शावाला उन्हें भरोसा दिलाने में कामयाब हो गया कि वो आईएसआई का एजेंट है और उनकी मदद करने आया है. वो रिक्शा वाला कौन था, ये पहेली है. लेकिन खालिस्तानियों आतंकियों से मिलने के बाद अजीत कुमार डोभाल जो सटीक जानकारी जुटा लाए, उसकी बदौलत ब्लैक कैट्स कमांडोज ने 41 आतंकी मार गिराए, 200 आतंकियों ने सरेंडर किया.
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दाऊद इब्राहिम तक पहुंचने से बना चुके हैं योजना
अमेरिका के खुफिया केबल्स के आधार पर विकीलीक्स ये खुलासा भी कर चुकी है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो ने 2005 में छोटा राजन के शूटर विक्की मल्होत्रा के जरिए दाऊद इब्राहिम को मारने की योजना बनाई थी, जिसका जिम्मा करीब 5 महीने पहले रिटायर हुए अजीत डोभाल के हाथों में था. खबरों के मुताबिक योजना के बारे में बात करने के लिए एक दिन जब डोभाल और विक्की मल्होत्रा दिल्ली में साथ थे. तभी मुंबई क्राइम ब्रांच की एक टीम ने हत्या के आरोप में मल्होत्रा को गिरफ्तार कर लिया और दाऊद को मारने की योजना खटाई में पड़ गई.

साल 2014 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया
अजीत डोभाल के ऐसे कारनामों की वजह से ही 30 मई 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भारत का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया और तब से ही दाऊद समेत भारत के तमाम दुश्मनों की नींद उड़ी हुई है.

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First published: June 3, 2019, 3:26 PM IST
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