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Analysis: आखिर अब क्यों प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश के बाहर भी चुनाव प्रचार कर रही हैं?

प्रियंका गांधी (फ़ाइल फोटो)

प्रियंका गांधी (फ़ाइल फोटो)

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) इन दिनों अपने असम दौरे को अंतिम रूप दे रही हैं. अमूमन ऐसा बहुत कम होता है जब प्रियंका यूपी छोड़कर देश के किसी अन्य राज्य में पार्टी के पक्ष में प्रचार (Election Campaign) करें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 28, 2021, 1:27 PM IST
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नई दिल्ली.  ऐसे समय में जब G23 ग्रुप के नेता जम्मू से कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ जमकर हुंकार भर रहे थे, दिल्ली में प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) अपने असम दौरे को अंतिम रूप दे रही थीं. अमूमन ऐसा बहुत कम होता है जब प्रियंका यूपी छोड़कर देश के किसी अन्य राज्य में पार्टी के पक्ष में प्रचार (Election Campaign) करें. कभी कभार की बात अलग है लेकिन प्रियंका ने अपने आप को पहले तो अमेठी और रायबरेली तक सीमित रखा था और बाकायदा राजनोति में आने और महासचिव बनने के बाद यूपी तक. महासचिव बनाने के साथ ही प्रियंका को यूपी का प्रभारी बनाया गया था.

लेकिन क्या वजह है की प्रियंका गांधी अब यूपी से बाहर जाने को तैयार हुई हैं? देश के तमाम राज्यों से उनके प्रचार में आने का अनुरोध पहले भी आता था और आज भी आता है लेकिन लगभग 99 फीसदी अनुरोध को वो ठुकरा दिया करती थीं. वजह थी कि पार्टी में सत्ता के दो ध्रुव न बनें. प्रियंका गांधी का ये स्पष्ट मत है कि पार्टी के नेता राहुल गांधी ही हैं. वे किसी तुलना में नहीं फंसना चाहती थी कि राहुल बेहतर या प्रियंका. इसीलिए प्रियंका ने न सिर्फ राजनीति में आने में देर की बल्कि खुद को यूपी तक सीमित रखा. गांधी परिवार में इस बात पर एक मत है कि राहुल गांधी ही पार्टी में परिवार का प्रतिनिधित्व करेंगे, प्रियंका सहयोगी की भूमिका में रहेंगी. कांग्रेस के जानकार कहते हैं कि इस तरह के सारे फैसले सोनिया गांधी अपने दोनों संतानों को साथ बैठाकर लेती हैं जिसमें किसी तीसरे की भूमिका नहीं होती. इस मामले में भी यही तय हुआ है कि राहुल गांधी चेहरा होंगे और प्रियंका उनकी सहयोगी. प्रियंका गांधी उसी लाइन पर चल रही थीं जो परिवार में तय हुआ था.

G23 ग्रुप के नेताओं को जवाब!
अब जबकि G23 ग्रुप के नेताओं ने खुलेआम पार्टी नेतृत्व और गांधी परिवार पर उंगली उठानी शुरू कर दी है राहुल और प्रियंका दोनों ये महसूस करते हैं कि पार्टी पर मजबूत पकड़ बनाना जरूरी हो गया है. राहुल गांधी काफी अर्से से ये काम कर रहे हैं और अपने करीबी लोगों को प्रमुख पदों पर नियुक्त करवा रहे हैं.
ये है रणनीति


प्रियंका के मैदान में आ जाने से राहुल गांधी को बल मिलेगा और दोनों मिलकर भविष्य के किसी भी चुनौती या बिखराव का सामना कर सकें इसलिए पार्टी की पूरी कमान अपने पास रखने की रणनीति बनाई गई है. मतलब अब राहुल फ्रंट से लीड करेंगे लेकिन प्रियंका भी यूपी से इतर पार्टी को मजबूत करने में उनकी मदद करेंगी.

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क्या होगी सोनिया गांधी की भूमिका?
सोनिया गांधी अब लगभग सलाहकार की भूमिका में हैं और कमान राहुल गांधी के हाथ में है, प्रियंका उनका संबल बनी रहेंगी. यानी अब प्रियंका अपनी खुद की बनाई हद से बाहर निकलकर राहुल गांधी के हाथ मजबूत करने को तैयार हैं. आने वाले वक्त में यूपी में चुनाव है तो वे वहां ज्यादा व्यस्त रहेंगी लेकिन इन पांच राज्यों के चुनाव में सीमित ही सही लेकिन प्रचार में भूमिका निभाएंगी.

विरोधियो को जवाब देने की तैयारी
वैसे तो प्रियंका गांधी पार्टी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में हमेशा ही शमिल रहती थी लेकिन अब गांधी परिवार ने उनको सूची से बाहर निकलकर ज़मीन पर उतारने का फैसला कर लिया है.पार्टी नेतृत्व को बखूबी पता है कि G23 के नेता आने वाले दिनों में लगातार चुनौती देते रहेंगे जिसका सामना अब राहुल- प्रियंका की जोड़ी मिलकर पूरी ताकत से करेगी.
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