वेलेंटाइन डे और प्यार के खिलाफ क्यों हैं भगवाधारी, इस्लामिक कट्टरपंथी और नारीवादी?

हर वेलेंटाइन डे पर प्रेम का विरोध क्या सिर्फ फैशन है या फिर प्रेम के विरुद्ध एक मानसिक संकीर्णता. आखिर क्यों, भगवाधारी, इस्लामिक कट्टरपंथी और नारीवादियों से इतनी नफरत है?

News18.com
Updated: February 14, 2019, 3:40 PM IST
वेलेंटाइन डे और प्यार के खिलाफ क्यों हैं भगवाधारी, इस्लामिक कट्टरपंथी और नारीवादी?
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Updated: February 14, 2019, 3:40 PM IST
रवि शंकर कपूर

कहते हैं, ये दुनिया प्यार के इर्द-गिर्द घूमती है लेकिन नैतिकता के हिमायती इसे बंदिशों में बांधने की कोशिश में रहते हैं. हमारे देश के 'संस्कारी' और दकियानूसी कट्टरपंथियों को प्यार से जुड़ी कई सारी चीजों का फोबिया है. इसी वजह से वो सब वेलेंटाइन डे के मुखर विरोधी हैं. हर वेलेंटाइन डे पर इसकी खिलाफत होती है और कई बार तो लोग हिंसा पर भी उतर आते हैं. ये फोबिया एक ऐसी अड़चन की तरह है, जो साल में एक बार तो आती ही है. इस साल बजरंग दल ने देहरादून में सार्वजनिक जगहों पर बैठे कुछ जोड़ों के अभद्र तरीके से वीडियो बनाए, वहीं इससे जुड़ी एक और संस्था हास्यमेव जयते ने सूरत में हजारों बच्चों से शपथ दिलवाई कि वे सिर्फ अपने मां-बाप की रजामंदी से ही शादी करेंगे.

हालांकि, ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं है जहां इस तरह का जिहाद प्रेम में विघ्न डालता है. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में फैसलाबाद के कृषि विश्वविद्यालय (UAF) में, अधिकारियों ने वेलेंटाइन डे को सिस्टर्स डे के रूप में मनाने और वहां की छात्राओं को हेडस्कार्फ और शॉल भेंट करने का फैसला किया. इसका मकसद है, युवाओं में पूर्वी संस्कृति और इस्लामी परंपराओं को बढ़ावा देना. UAF के कुलपति जफ़र इकबाल के हवाले से कहा गया कि हमारी संस्कृति में महिलाएं ज्यादा सशक्त हैं और बहन, माता, बेटी और पत्नी के रूप में उचित सम्मान अर्जित करती हैं.



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हालांकि, हमारे 'संस्कारी' लोग महिला को सिर्फ, 'बहन, माता, बेटी और पत्नी' के रूप में ही देखते हैं. उनकी डिक्शनरी में लड़की और महिला के रूप में कोई न्यूट्रल शब्द नहीं है. न ही उनके लिए कोई महिला, डॉक्टर, इंजीनियर, बैंकर, बिजनेस वुमेन, पायलट और न ही कोई उद्यमी है.

वेलेंटाइन डे का विरोध केवल हिंदू समूह और मुस्लिम कट्टरपंथी ही नहीं करते, बल्कि वामपंथी नारीवादी भी 'प्रेम के इस त्योहार' के विरोधी हैं. उनकी नजरों में वेलेंटाइन डे वो सब कुछ है, जिससे वो दिल से नफरत करते हैं. मसलन, पूंजीवाद, परंपरा और प्रेम.

कट्टर राष्ट्रवादी, इस्लामिक विचारधारा, समाजवादी या फिर नारीवादी इस तरह की विचारधारा का हर व्यक्ति प्रेम को संदेह की नजरों से देखता है.
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'संस्कारी', इस्लामवादी, वामपंथी और नारीवादियों की नजर में यह एक बेहद खतरनाक स्थिति है, कि किसी भी जोड़े को एक होने की अनुमति कैसे दी जा सकती है? इन लोगों की नजर में उसकी कीमत सिर्फ इसलिए है कि वह समाज का हिस्सा है और उसे उसी के लिए जीना और उसी के लिए मरना है. व्यक्ति और उनकी पसंद से कोई फर्क नहीं पड़ता. विवेक और पवित्रता के आधार पर छिड़ा यह युद्ध अक्सर बड़े अनुपात में पहुंच जाता है. उदाहरण के लिए 2012 में, छत्तीसगढ़ में रमन सिंह सरकार ने आधिकारिक तौर पर वेलेंटाइन-डे को मातृ-पितृ दिवस (माता-पिता दिवस) के रूप में घोषित किया.

दूसरे शब्दों में, जब धर्मनिष्ठ ठग वेलेंटाइन डे मनाने वाले युवाओं को धमका नहीं रहे हैं, तब बहुत से राजनेता और एक्टिविस्ट प्रेमियों को एक दूसरे के पास आने से रोक रहे हैं. हालांकि, पुराने हिंदी गीत अक्सर जमाने को प्यार के खिलाफ होने की बात करते हैं, जहां प्यार करने वालों को समाज का सामना करना ही पड़ता है, और उनकी सच्चाई और प्रासंगिकता हर वेलेंटाइन डे पर स्पष्ट हो जाती है.

लेखक, पावर कॉरिडोर के एडिटर हैं. (यह लेखक के निजी विचार हैं.)

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