आखिर क्यों शिवसेना ने उपसभापति पद के लिए एनडीए उम्मीदवार को दिया समर्थन?

वोटिंग से ठीक एक दिन पहले ही शिवसेना के युवा नेता और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे नेताओं से मिलने और लोकसभा देखने दिल्ली आए थे.

संदीप सोनवलकर | News18Hindi
Updated: August 10, 2018, 2:45 PM IST
आखिर क्यों शिवसेना ने उपसभापति पद के लिए एनडीए उम्मीदवार को दिया समर्थन?
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश (फाइल फोटो)
संदीप सोनवलकर
संदीप सोनवलकर | News18Hindi
Updated: August 10, 2018, 2:45 PM IST
कहा जाता है कि जो काम सुई कर सकती है वो तलवार से नही होता. लगातार सरकार के खिलाफ बोल रही शिवसेना के साथ संबंधों को जोड़ने के लिए भी बीजेपी ने यही किया तो काम बन गया. राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव में शिवसेना के तीनों सांसदों के वोट की बीजेपी को बहुत ज़रुरत थी और शिवसेना मान भी गयी. लेकिन आखिर शिवसेना इस बात क लिए मान कैसे गई? दरअसल राज्यसभा में जिस दिन वोटिंग होनी थी उसके ठीक एक दिन पहले ही शिवसेना के युवा नेता और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे नेताओं से मिलने और लोकसभा देखने दिल्ली आए थे.

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जब वो दिल्ली आ रहे थे तो उनके पास दो काम थे एक मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मिलकर मुंबई विश्वविद्यालय के बारे में बात करना और दूसरा सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर कोंकण के दो और सड़क प्रोजेक्ट की मुश्किलों पर बात करना. बीजेपी को सही मौका मिला. इसलिए आदित्य ठाकरे के दिल्ली आते ही पहले संसद में जावड़ेकर से और फिर वहीं पर नितिन गडकरी से मुलाकात करा दी गयी.

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दोनों ही मुलाकातों में आदित्य ठाकरे का जमकर स्वागत किया गया और जो आदित्य ठाकरे ने कहा वो कर दिया. जब लगा कि युवराज खुश हो गए तो तुरंत वहीं पर पीएम से भी मुलाकात का समय तय कर दिया गया.आदित्य ठाकरे को इसकी उम्मीद तक नही थी. पीएम से मिले तो पीएम ने उनको समझाया कि भले ही लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर शिवसेना ने वाकआउट कर दिया लेकिन अब राज्यसभा में ऐसा न करे. वैसे भी उपसभापति के उम्मीदवार हरिवंश बीजेपी से नहीं जेडीयू से हैं.

पहले से ही गदगद आदित्य ठाकरे को बात समझ में आ गयी,उन्होंने तुरंत ही पिता उद्धव ठाकरे से बात की और फिर इस बार पार्टी के संगठन महामंत्री अनिल देसाई से कहलवा दिया गया कि वो एनडीए के सहयोगी का साथ देंगे.

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इतना ही नही संजय राउत से उपसभापति हरिवंश के पक्ष में कसीदे भी पढ़ा दिए गए यानि बीजेपी ने हरि के भरोसे ये लड़ाई जीत ली. शिवसेना का भी मान रह गया कि वो बीजेपी के साथ नहीं गए और बीजेपी का काम बन गया कि एनडीए का उम्मीदवार उपसभापति चुन लिया गया. शिवसेना के नेता ये भी मान रहे हैं कि ये एक बड़ा बदलाव है जो शिवसेना की वजह से हुआ है कि अब बीजेपी अपनी बात पर ही नहीं अड़ी है बल्कि वो एनडीए के दूसरे दलों के उम्मीदवारों पर भी विचार कर रही है. शिवसेना को इसमें एक बड़ी उम्मीद चुनाव के बाद भी दिखती है. साफ है कि बीजेपी ने भी वक्त की नज़ाकत भांप कर रुख बदल लिया.
First published: August 10, 2018, 2:43 PM IST
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