Explainer: सबरीमाला केस में 'ओपन कोर्ट हियरिंग' के लिए क्यों तैयार हुआ सुप्रीम कोर्ट, जानें वजह

Explainer: सबरीमाला केस में 'ओपन कोर्ट हियरिंग' के लिए क्यों तैयार हुआ सुप्रीम कोर्ट, जानें वजह
प्रतीकात्मक तस्वीर

सबरीमाला मंदिर मामले में कुल 49 याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें से हर याचिका में ओपन कोर्ट हियरिंग के लिए निवेदन किया गया था.

  • News18.com
  • Last Updated: November 14, 2018, 10:41 AM IST
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(उत्कर्ष आनंद)
ऐसा कहा जाता है कि न्याय सिर्फ होना ही नहीं, चाहिए बल्कि न्याय होता दिखना भी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने शायद इसीलिए सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश की इजाजत से जुड़े अपने आदेश को लेकर दायर की गईं पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई के लिए 'ओपन कोर्ट हियरिंग' की इजाज़त दी है.

सुप्रीम कोर्ट के नियम के अनुसार, पुनर्विचार याचिका पर फैसला जज लंच टाइम में 1 से 2 बजे के बीच अपने चैंबर में बैठकर करते हैं. याचिकाओं पर विचार के लिए आम तौर पर उन्हीं जजों के पास भेजा जाता है, जिन्होंने मुख्य केस में फैसला सुनाया है. हालांकि अगर उनमें शामिल कोई जज रिटायर हो गया है तो उसकी जगह नए जज को नियुक्त किया जाता है.

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हालांकि अगर कोर्ट को लगता है कि किसी मामले में न्याय, कानून या संविधान से जुड़ा ऐसा तथ्य है, जिसकी सार्वजनिक रूप से सुनवाई की जानी चाहिए तो वह ओपन हियरिंग की बात को स्वीकार कर सकता है. पुनर्विचार याचिका तब दायर की जाती है जब ये लगता है कि फैसला सुनाने में कानूनी रूप से कोई गलती या तथ्यों को समझने में भूल हुई है.



सुप्रीम कोर्ट ने ओपन कोर्ट हियरिंग क्यों किया स्वीकार?
ओपन कोर्ट हियरिंग की याचिका स्वीकार करने की वजह से केस से जुड़े वकीलों को अपनी बात रखने का मौका ज़्यादा अच्छे तरीके से मिलेगा. अगर कोर्ट को लगता है कि ओपन कोर्ट हियरिंग से तथ्यों को समझने में मदद मिलेगी तो कोर्ट इसे स्वीकार कर सकता है. हालांकि यह पूरी तरह से जजों के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है.

सबरीमाला मंदिर मामले में कुल 49 याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें से हर याचिका में ओपन कोर्ट हियरिंग के लिए निवेदन किया गया था. ओपन कोर्ट हियरिंग का निवेदन स्वीकार किए जाने की वजह से कोर्ट उन वकीलों को भी अपनी बात रखने की इजाज़त दे सकती है, जो इस केस में पार्टी नहीं हैं.

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सबरीमाला पर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक स्वीकार नहीं किया है. इसका अर्थ है कि संवैधानिक पीठ ने अभी तक ये फैसला नहीं किया है कि केस पर बहस होनी चाहिए या नहीं. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मंगलवार को ओपन कोर्ट हियरिंग की बात तो स्वीकार कर ली थी, लेकिन कोई नोटिस नहीं जारी किया गया था और केस को हियरिंग के लिए स्वीकार नहीं किया गया था.

अधिकतर पुनर्विचार याचिकाओं में मांग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के आदेश पर रोक लगा दी जाए, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल इससे मना कर दिया है.

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