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ANALYSIS: BJP के लिए क्यों जरूरी है पश्चिम बंगाल?

पीएम मोदी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल में रैली की थी.

पीएम मोदी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल में रैली की थी.

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी को मिली करारी हार के बाद से ही राजनीतिक विश्लेषक अनुमान लगा रहे हैं कि इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी अपना 2014 वाला जादू बरकरार नहीं रख सकेगी.

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    फाजिल खान

    बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता पिछले दो महीनों में पश्चिम बंगाल में कई रैलियां कर चुके हैं. पार्टी ने राज्य में रथयात्रा निकालने और राज्य में विवादित सिटिजनशिप बिल को लागू करने की पूरी कोशिश की, हालांकि इसमें वह अभी तक सफल नहीं हो पाई है. पीएम मोदी ने शनिवार को राज्य में दो बैक टू बैक रैलियां भी की थीं.

    अब सवाल यह है कि बंगाल में बीजेपी इतनी कोशिशें क्यों कर रही है?

    मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी को मिली करारी हार के बाद से ही राजनीतिक विश्लेषक अनुमान लगा रहे हैं कि इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी अपना 2014 वाला जादू बरकरार नहीं रख सकेगी और उतनी बड़ी जीत हासिल नहीं कर सकेगी.

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    साल 2014 में पार्टी ने हिंदी बेल्ट में बड़ी जीत हासिल की थी. यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और दिल्ली की कुल 226 में से 192 सीटों पर पार्टी ने जीत दर्ज की थी. हिंदीभाषी क्षेत्रों से मिले समर्थन की वजह से ही बीजेपी केंद्र में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने में सफल हुई थी.

    पिछली बार बीजेपी ने यूपी की 80 में से 71 सीटों पर जीत हासिल की थी. लेकिन इस बार सपा और बसपा ने गठबंधन कर लिया है जिससे यूपी की जंग बीजेपी के लिए मुश्किल नजर आ रही है.

    इसी तरह बीजेपी ने 2014 में एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीत दर्ज की थी. लेकिन हाल ही में निपटे विधानसभा चुनावों में बीजेपी को तीनों ही राज्यों में हार का सामना करना पड़ा है. ऐसे में पिछली बार के नतीजों के दोहराए जाने की संभावना कम नजर आ रही है.

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    पूर्व पर नजर

    2014 के बाद से बीजेपी ने नॉर्थ ईस्ट के सात में से छह राज्यों में या तो अपनी सरकार बनाई है या फिर गठबंधन की सरकार बनाई है. आगामी चुनाव के लिए बीजेपी की नजर 24 सीटों वाले इस क्षेत्र पर है ताकि दूसरे इलाकों में होने वाली संभावित हार की भरपाई यहां से हो सके.

    हालांकि, माना जा रहा है कि शायद यह भी काफी न हो. ऐसे में पश्चिम बंगाल पार्टी के लिए बेहद जरूरी हो जाता है. राज्य में लोकसभा की 42 सीटें हैं. यूपी (80) और महाराष्ट्र (48) के बाद यहां सबसे अधिक सीटें हैं. पिछले चुनाव में मोदी लहर के बावजूद बीजेपी ने राज्य में दो सीटों पर जीत दर्ज की थी. पार्टी का वोट शेयर 17 प्रतिशत रहा था. यहां हार के बावजूद करीब 9 सीटों पर बीजेपी का वोट शेयर 20 प्रतिशत से अधिक था. इनमें से तीन सीटों पर बीजेपी दूसरे स्थान पर रही थी.

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    क्या होगा फायदा

    आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य में तृणमूल कांग्रेस अभी भी सबसे मजबूत पार्टी है. हालांकि, बीजेपी ने धीरे-धीरे कांग्रेस और सीपीएम के वोटबैंक में सेंध लगाई है. उदाहरण के लिए, 2014 में बीजेपी का वोट शेयर 17 प्रतिशत था जोकि 2009 की तुलना में लगभग तीन गुना था. उसी दौरान सीपीएम का वोट शेयर 10 प्रतिशत तक घट गया. वहीं कांग्रेस 2009 के 13.5 प्रतिशत की तुलना में 2014 में 9.7 प्रतिशत पर सिमट गई.

    बंगाल में बीजेपी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की मुख्य विरोधी के रूप में उभरी है. 2015 में राज्य में हुए उपचुनावों में वोट शेयर के लिहाज से बीजेपी राज्य में दूसरी बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी.

    पिछले साल हुए पंचायत चुनाव में टीएमसी ने बड़ी जीत हासिल की थी. बीजेपी ने राज्य में सीपीएम और कांग्रेस की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया था. ऐसे में जब 2013 में जिला परिषद की 213 सीटें जीतने वाली वाली सीपीएम एक सीट पर सिमट कर रह गई तब 2013 में कोई सीट नहीं जीतने वाली बीजेपी ने 2018 में 23 सीटों पर जीत दर्ज की.

    इसी तरह 2013 में ग्राम पंचायत की 810 सीटें जीतने वाली सीपीएम 2018 में 24 सीटों पर सिमटकर रह गई जबकि बीजेपी 202 सीटें हासिल कीं. पार्टी ने 2013 में सिर्फ 32 सीटें जीती थीं.

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    क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

    सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज के डायरेक्टर संजय कुमार ने कहा कि बीजेपी पश्चिम बंगाल पर निशाना साध रही है क्योंकि हिंदी बेल्ट से मिली हार की भरपाई दक्षिण भारतीय राज्यों से कर पाना मुश्किल है.

    कुमार ने कहा, 'संभावना है कि 2014 की तुलना में हिंदी बेल्ट में बीजेपी को कई सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है. तो ऐसे में वे यदि इन पांच-छह राज्यों में सीटें हार रहे हैं तो उसकी क्षतिपूर्ति उन्हें कहीं और से करनी होगी. बीजेपी इस नुकसान की भरपाई की उम्मीद तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना या केरल से नहीं कर सकती है क्योंकि इन राज्यों में पार्टी का असर काफी कम है. ऐसे में उन्हें दूसरे राज्यों में अपनी संभावना तलाशनी होगी. इसलिए पश्चिम बंगाल पर बीजेपी की नजर है.'

    कुमार के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी और बीजेपी के बीच ही मुख्य मुकाबला देखने को मिलेगा.

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    पिछले कुछ सालों में पश्चिम बंगाल में बीजेपी के प्रदर्शन में सुधार हुआ है. यदि इस चुनाव में बीजेपी अच्छा प्रदर्शन कर लेती है तो संभव है कि हिंदी हार्टलैंड में होने वाले संभावित नुकसान की कुछ भरपाई पश्चिम बंगाल से कर ले.

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