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जंगल छोड़ बार-बार शहर की ओर क्यों आ रहे तेंदुए?

जंगल छोड़ बार-बार शहर की ओर क्यों आ रहे तेंदुए?

Demo Pic : (PTI)

Demo Pic : (PTI)

गुड़गांव में हर साल तीन-चार बार तेंदुआ दिखते हैं, कई बार उनकी जान चली जाती है.

    देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति के मानेसर प्‍लांट में बृहस्‍पतिवार को घुसा तेंदुआ अभी तक निकला नहीं है. प्‍लांट बंद है. गुड़गांव में हर साल तीन-चार बार तेंदुआ दिखते हैं, इनमें से कुछ की जान भी चली जाती है.

    इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है आखिर गुड़गांव में तेंदुआ बार-बार क्‍यों दिखते हैं? जवाब में पर्यावरणविद कहते हैं कि हमने उनके आशियाने पर कब्‍जा कर लिया है तो आखिर वे कहां जाएंगे?

    एक गांव से शुरू होकर वर्ल्‍ड क्‍लास कंक्रीट का जंगल बनने का गुड़गांव से बेहतर शायद ही कोई घटनाक्रम हो. पूरा शहर जंगल में घुसा चला जा रहा है. रही-सही कसर सत्‍ताधारी नेता, नौकरशाह और धर्म का धंधा चलाने वाले पूरी कर देते हैं.

    फॉरेस्‍ट एरिया में अंधाधुंध निर्माण जारी है, फार्महाउस बनते जा रहे हैं. मठ बनते जा रहे हैं. यहां जंगल बचाने की लड़ाई लड़ने वाले कई बार नेताओं और बिल्‍डरों की लालच और पहुंच के आगे हारते नजर आते हैं.

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    इस लालच में हमने जंगलों पर कब्‍जा किया है. न सिर्फ वन्‍य जीवों के कवच अरावली को खोखला किया बल्‍कि साइबर सिटी गुड़गांव ने अपनी विकास यात्रा में साहिबी नामक नदी को निगल जाने का भी रिकॉर्ड बनाया. जिस नदी में सन् 1977 में बाढ़ आई थी, उसका गुड़गांव में अब अस्‍तित्‍व ही नहीं रहा.

    पर्यावरणविद् एन. शिवकुमार कहते हैं कि जहां भी हमने वन्‍य जीवों का आशियाना छीना है वहां वे हमारे बीच दिख रहे हैं. उनका कहना है कि अरावली दिल्‍ली-एनसीआर के लिए फेफड़े का काम करती है. इसे खत्‍म किया जाएगा तो खामियाजा हम भुगतेंगे. सांस लेने की साफ हवा नहीं मिलेगी. यहां जंगल में एक से बढ़कर एक आलीशान बिल्‍डिंगें बनती जा रही हैं तो तेंदुए कहां जाएंगे.

    अरावली सेव करने का अभियान चलाने वाले जितेंद्र भड़ाना कहते हैं कि भोजन से अधिक प्यास बुझाने के लिए तेंदुए या अन्य वन्य जीव रिहायशी इलाकों में आ रहे हैं. अरावली में खनन के लिए हो रहे विस्‍फोट से भी उनका चैन छिन गया है और वे शहर की तरफ भाग रहे हैं. अरावली के अंदर बने फार्महाउस मालिक भी नहीं चाहते कि यहां पर जंगली जीव रहें. इसलिए हर साल एक-दो तेंदुओं की मौत की खबर आती है.

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    अरावली में तेंदुओं पर संकट

    -12 जनवरी 2011 को फरीदाबाद के खेड़ी गुजरान में भीड़ ने एक तेंदुए को पीट-पीटकर मार डाला था, प्रशासन के लोग देखते रहे थे.

    -अप्रैल 2014: चार तेंदुओं की मौत मानेसर गोल्फ कोर्स परिसर के आसपास संदिग्ध अवस्था में हुई थी

    -नवंबर 2014: मानेसर के सहरावन गांव के पास सड़क दुर्घटना में 12 वर्षीय तेंदुए की मौत हो गई थी

    -मई 2015: गुडग़ांव-फरीदाबाद पर एक तेंदुए की मौत सड़क दुर्घटना में हो गई थी।

    -मई 2016: सोहना क्षेत्र के गैरतपुर बांस के जंगलों में मृत मिला तेंदुआ

    -नवंबर 2016: गुरुग्राम के सोहना कस्‍बे से सटे गांव मण्डावर में ग्रामीणों ने तेंदुए को पीट-पीटकर मार डाला, पुलिस और वन विभाग की टीम देखती रह गई.

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    कब-कब दिखाई दिए तेंदुए

    -अप्रैल 2017: सोहना में तेंदुआ घुसा, तीन को घायल किया, पकड़ा गया.

    -मार्च 2017: गांव हरचंदपुर में शावकों के साथ तेंदुआ दिखा

    -दिसंबर 2016: सोहना के मंडावर गांव में तेंदुआ आया, ग्रामीणों के शोर मचाने पर भागा

    -दिसंबर 2016: गांव हरचंदपुर में तेंदुए के साथ दो शावक दिखे

    -जनवरी 2016: गैरतपुर बास से सटे जंगलों में पेड़ से बंधा मिला था शावक

    -13 जनवरी, 2015: सोहना के दमदमा इलाके में दिखा था तेंदुआ और शावक

    -08 मई 2015: मांगर के पास सड़क पर तेंदुआ दिखा

    -06 अगस्त, 2015: मानेसर के पास अरावली में तेंदुआ दिखा

    Tags: गुड़गांव

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