कोविडः एक कंपनी के बूते का नहीं है पूरी दुनिया को वैक्सीन देना, जानिए क्यों?

एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन का उत्पादन भारत के सीरम इंस्टिट्यूट में हो रहा है. फाइल फोटो

कोरोना वायरस (Coronavirus) के खात्मे के लिए वैश्विक स्तर पर बहुत सारी वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) विकसित की जा रही हैं, लेकिन असल चुनौती पूरी दुनिया को वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है.

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    नई दिल्ली. कोविड की मारी दुनिया को वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) का इंतजार है. ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका (Oxford-AstraZeneca), मॉडर्ना इंक (Moderna Inc) और फाइजर (Pfizer) ने ऐलान कर दिया है कि उनकी वैक्सीन कोविड के खिलाफ कारगर है. बावजूद इसके कि ऑक्सफोर्ड और एस्ट्रोजेनेका की वैक्सीन के ट्रायल का डाटा बहुत प्रभावी नहीं है.

    हालांकि आने वाले दिनों में अलग-अलग देशों में नियामक संस्थाएं किसी भी वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे सकती हैं. लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती उत्पादन की है. पूरी दुनिया को वैक्सीन उपलब्ध कराने की.

    एस्ट्राजेनेका के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर पॉस्कल सोरिओत की माने तो किसी भी कंपनी के पास अकेले दम पर दुनिया को वैक्सीन उपलब्ध कराने की क्षमता नहीं है. इसलिए कोरोना वायरस के खात्मे के लिए एक से ज्यादा वैक्सीन की जरूरत है और ऐसे में कोई कंपीटिशन नहीं हैं.

    फाइजर और मॉडर्ना को शुरुआत में उत्पादन की चुनौतियों का सामना करने में फायदा मिल सकता है, क्योंकि दोनों कंपनियों की RNA तकनीक से उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है. अमेरिकी कंपनी फाइजर ने बायोएनटेक के साथ मिलकर इस साल के अंत तक 5 करोड़ टीके बनाने का टारगेट रखा है. मॉडर्ना का दावा है कि अमेरिका के लिए जनवरी तक वे 2 करोड़ टीके का उत्पादन करेंगे.



    ऑक्सफोर्ड वैक्सीन पर काम कर रहीं प्रोफेसर सारा गिल्बर्ट कहती हैं कि एक कंपनी, एक उत्पादनकर्ता के वश की बात नहीं है कि वो पूरी दुनिया को अकेले सप्लाई कर पाए. हमें सामुदायिक रूप से टीकाकरण के बारे में सोचना होगा. साथ ही संक्रमण को फैलने से रोकना भी होगा ताकि हम वायरस संक्रमण पर बढ़त बना सकें.

    एस्ट्राजेनेका अपने तय शेड्यूल के हिसाब से वैक्सीन उत्पादन में पीछे चल रही है. कंपनी साल के अंत तक 4 लाख टीके के उत्पादन की उम्मीद कर रही है, जबकि पहले सितंबर तक 3 करोड़ टीके उत्पादन करने का लक्ष्य था.

    कंपनी का कहना है कि 2020 के अंत तक ब्रिटेन के लिए उसके पास 2 करोड़ टीके होंगे. लेकिन, इन टीकों को छोटी-छोटी कांच की शीशियों में भी भरना होगा. कंपनी के ग्लोबल हेड ऑपरेशंस पैम चेंग ने कहा कि 2021 के पहली तिमाही तक वैश्विक स्तर पर कंपनी के पास 30 करोड़ टीके उपलब्ध होंगे.

    हालांकि एस्ट्राजेनेका को थोड़ा फायदा मिल सकता है, अगर नियामक संस्था की ओर से उसे टीके की मात्रा कम करने की अनुमति मिल जाती है. सोमवार को प्रकाशित कंपनी की वैक्सीन की ट्रायल रिपोर्ट में कहा गया था कि ऑक्सफोर्ड वैक्सीन का आधा टीका ज्यादा प्रभावी है, बजाय दो टीका के.

    ब्रिटिश सरकार समर्थित वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग एंड इनोवेशन सेंटर (VMIC) के सीईओ मैथ्यू डुकर्स ने कहा कि ये चीजें कभी भी आसान नहीं होती है.

    एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के उत्पादन के लिए कई महीने से तैयारी चल रही है. एस्ट्राजेनेका ने आम तौर पर होने वाले सर्दी-जुकाम के वायरस का प्रयोग करके स्पाइक प्रोटीन वाले कोरोना वायरस के खिलाफ इम्यून सिस्टम पैदा करने में कामयाब पाई है.

    बीबीसी रेडियो के साथ बातचीत में ब्रिटेन के स्वास्थ्य सचिव मैट हैनकॉक (Matt Hancock) ने कहा कि टीकाकरण (Vaccination) की रफ्तार इस बात पर निर्भर करती है कि उत्पादन की रफ्तार कितनी है. ब्रिटेन के बाहर उत्पादन की तैयारी जोरों पर हैं और कुछ देश तेजी से स्टॉक बना सकते हैं.

    पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन बनाने वाली कंपनी है. सीरम इंस्टीट्यूट दिसंबर तक 10 करोड़ टीके बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है.

    सीरम के चीफ अदार पूनावाला (Adar Poonawalla) ने कहा कि शुरुआती टीके भारत को दिए जाएंगे. 4 करोड़ टीके पहले ही तैयार कर लिए गए हैं और अगले साल कंपनी भारत और कोवॉक्स इनिशिएटिव के बीच सप्लाई को बांटकर उत्पादन करेगी. ताकि गरीब देशों को भी वैक्सीन की सप्लाई की जा सके.

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