पत्नी का चूड़ी-सिंदूर पहनने से इनकार करने का सीधा मतलब उसे शादी मंजूर नहीं: गुवाहाटी HC

पत्नी का चूड़ी-सिंदूर पहनने से इनकार करने का सीधा मतलब उसे शादी मंजूर नहीं: गुवाहाटी HC
हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की स्थिति में पति को पत्नी के साथ शादीशुदा जिंदगी बिताने के मजबूर करना उत्पीड़न के तहत आएगा. (प्रतीकात्मक)

गुवाहाटी हाईकोर्ट (Gauhati high court) की बेंच ने कहा कि हिंदू विवाह (Hindu Marriage) की प्रथा के तहत, जब एक महिला हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करती है; फिर उसके बाद 'शाखा और सिंदूर' पहनने से इनकार करती है, तो इससे यह पता चलता है कि वह अविवाहित है या फिर उसने अपनी शादी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.

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गुवाहाटी. गुवाहाटी हाईकोर्ट (Gauhati high court) ने एक शख्स की तलाक याचिका पर फैमिली कोर्ट के फैसले को पलटते हुए हैरान करने वाला फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई महिला हिंदू रीति-रिवाज से शादी करने के बाद सिंदूर और शाखा (चूड़ियां) पहनने से इनकार करती है, तो इसका सीधा मतलब ये माना जाएगा कि उसे ये शादी अस्वीकार है. हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की स्थिति में पति को पत्नी के साथ शादीशुदा जिंदगी बिताने के मजबूर करना उत्पीड़न के तहत आएगा. इससे पहले फैमिली कोर्ट ने शख्स की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पत्नी ने पति के खिलाफ कोई क्रूरता नहीं की.

लाइव लॉ वेबसाइट के मुताबिक, गुवाहाटी हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस अजय लांबा (Chief Justice Ajai Lamba) और जस्टिस सुमित्रा साइकिया (Justice Soumitra Saikia) की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की. बेंच ने कहा कि हिंदू विवाह की प्रथा के तहत, जब एक महिला हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करती है; फिर उसके बाद 'शाखा और सिंदूर' पहनने से इनकार करती है, तो इससे यह पता चलता है कि वह अविवाहित है या फिर उसने अपनी शादी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.

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बेंच ने कहा, 'प्रतिवादी का इस तरह का स्पष्ट रुख उसके स्पष्ट इरादे की ओर इशारा करता है कि वह अपीलार्थी के साथ अपने वैवाहिक जीवन को जारी रखने के लिए तैयार नहीं है. ऐसी परिस्थितियों में अपीलकर्ता पति का प्रतिवादी पत्नी के साथ वैवाहिक जीवन में बने रहना, प्रतिवादी पत्नी द्वारा अपीलकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों का उत्पीड़न माना जाएगा.'




ये है पूरा मामला?
दरअसल, याचिकाकर्ता पति ने फैमिली कोर्ट में बताया था कि उसकी शादी फरवरी 2012 में हुई. शादी के एक महीने तक जॉइंट फैमिली में रहने के बाद महिला ने पति के साथ अलग रहने की मांग उठाई. इसे लेकर दोनों बीच झगड़े होने लगे. पत्नी ने बच्चे न होने को लेकर भी पति को दोषी ठहराया.

साल 2013 में वो ससुराल छोड़कर चली गई. फिर पति, ससुराल वालों के खिलाफ धारा 498 ए के तहत क्रूरता का मामला दर्ज करवाया. हालांकि, इस मामले में पति और रिश्तेदारों को बरी कर दिया गया.

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पति ने पत्नी की क्रूरता को जरिया बनाते हुए तलाक के लिए याचिका दाखिल कर दी. वहीं, पत्नी ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया. फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका को खारिज कर दिया मगर हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया.
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