लाइव टीवी

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया का क्या हुआ? RTI का PMO ने नहीं दिया जवाब

Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: February 9, 2020, 1:43 PM IST
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया का क्या हुआ? RTI का PMO ने नहीं दिया जवाब
जज जस्टिस एसएन शुक्ला की फाइल फोटो

आरटीआई आवेदन में पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री या पीएमओ ने राज्यसभा के सचिवालय से जस्टिस शुक्ला के खिलाफ महाभियोग शुरू करने संबंधी प्रक्रिया के लिए क्या कोई संवाद किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 9, 2020, 1:43 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. एमबीबीएस में दाखिले के जुड़े मामले में एक निजी मेडिकल कॉलेज के पक्ष में फैसला देने को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप से घिरे इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के जज जस्टिस एसएन शुक्ला (Justice SN Shukla) के खिलाफ क्या महाभियोग चलाया जाएगा? इस मामले में दायर आरटीआई (RTI) के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने किसी तरह जानकारी देने से इनकार कर दिया है.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के दो पूर्व प्रधान न्यायधीशों ने जस्टिस एसएन शुक्ला (Justice SN Shukla) के खिलाफ महाभियोग चलाए जाने की अनुशंसा की थी. मेडिकल कॉलेज से जुड़े इस मामले में सीबीआई भी उनके खिलाफ जांच कर रही है. हालांकि जस्टिस शुक्ला अब भी अपने पद पर बने हुए हैं.

News18 ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत एक आवेदन में पीएमओ से यह जानना चाहा कि पूर्व के दो प्रधान न्यायाधीशों, जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस रंजन गोगोई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शुक्ला के खिलाफ महाभियोग चलाए जाने के संकेत दिए हैं. इस मामले में क्या हुआ?

आरटीआई आवेदन में आगे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री या पीएमओ ने राज्यसभा सचिवालय से जस्टिस शुक्ला के खिलाफ महाभियोग शुरू करने संबंधी प्रक्रिया को लेकर कोई संवाद किया है. इसमें यह भी पूछा गया कि क्या जज के हाईकोर्ट को हटाए जाने को लेकर पीएमओ से कोई पत्राचार हुआ है? हालांकि जवाब में पीएमओ ने उपरोक्त में से किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया. पीएमओ ने RTI के जवाब में लिखा कि 'आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी जांच की प्रक्रिया को बाधित कर सकती है और इसलिए आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (एच) के तहत इसका जवाब नहीं दिया जा सकता है.'

कथित तौर पर लंबी छुट्टी पर हैं जस्टिस शुक्ला
इस बीच जस्टिस शुक्ला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में बिना किसी न्यायिक कार्य के तैनात हैं.  तत्कालीन सीजेआई जस्टिस मिश्रा ने चीफ जस्टिस ऑफ हाईकोर्ट से अनुशंसा की थी कि शुक्ला को बिना किसी न्यायिक कार्य के तैनात किया जाए. तब से वह कथित रूप से लंबी छुट्टी पर हैं.

जनवरी 2018 में तीन सदस्यीय जज इन-हाउस कमेटी ने पाया था कि जस्टिस शुक्ला के खिलाफ लगे आरोपों पर ठोस सबूत थे और ये उनके खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने के लिए पर्याप्त हैं. समिति की रिपोर्ट के बाद CJI ने प्रासंगिक-हाउस प्रक्रिया के अनुसार जस्टिस शुक्ला को इस्तीफा देने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने की सलाह दी, हालांकि उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया. फिर तत्कालीन CJI ने उनके पास मौजूद न्यायिक कार्यों को तत्काल वापस लेने की सिफारिश की. जस्टिस मिश्रा ने भी पीएम को उनके निष्कासन की सिफारिश करते हुए पत्र लिखा.मार्च 2019 में जस्टिस शुक्ला ने तत्कालीन सीजेआई जस्टिस गोगोई को पत्र लिखकर दोबारा न्यायिक कार्य देने की मांग की, लेकिन उनके अनुरोध को ठुकरा दिया गया. बाद में जस्टिस गोगोई ने महाभियोग की कार्रवाई शुरू करने के लिए पीएम से अनुरोध किया. जस्टिस गोगोई ने पीएम को लिखा, 'जस्टिस शुक्ला के खिलाफ आरोपों को गंभीर माना गया है और समिति ने उन्हें हटाने की कार्यवाही शुरू करने के लिए कहा है. उन्हें किसी भी हाईकोर्ट में न्यायिक कार्य फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. इन परिस्थितियों में आपसे अनुरोध है कि आगे की कार्रवाई पर विचार करें.'

मामला दर्ज करने की अनुमति दी
जुलाई 2019 में जस्टिस गोगोई ने सीबीआई को जस्टिस शुक्ला के खिलाफ मामला दर्ज करने की अनुमति दी. तत्कालीन CJI द्वारा की गई सिफारिश में कहा गया था: 'मैंने उपरोक्त विषय पर आपके पत्र पर विचार किया है. मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में मुझे जांच के लिए एक नियमित मामला शुरू करने की अनुमति देता हूं.'

यह पहला मामला था जब सीजेआई द्वारा CBI को एक हाईकोर्ट के जज के खिलाफ जांच करने की अनुमति दी गई थी. हालांकि जस्टिस शुक्ला आधिकारिक तौर पर एक न्यायाधीश के रूप में जुलाई 2020 में रिटायर हो सकते हैं.

यह भी पढ़ें: मुकदमे से पहले अनिवार्य मध्यस्थता वाले कानून के लिए यह सबसे सही समय: CJI बोबडे

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 9, 2020, 12:29 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर