NRC पर बोले हिमंता बिस्वा सरमा, 'मित्र' बांग्लादेश से अपने लोगों को वापस लेने के लिए चर्चा करेंगे

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Updated: September 1, 2019, 6:11 AM IST
NRC पर बोले हिमंता बिस्वा सरमा, 'मित्र' बांग्लादेश से अपने लोगों को वापस लेने के लिए चर्चा करेंगे
हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि बांग्लादेश से अपने लोगों को वापस लेने की चर्चा की जाएगी. (फाइल फोटो)

हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा कि बांग्लादेश (Bangladesh) की सरकार भारत की मित्र है और वे हमारे साथ सहयोग कर रहे हैं. जब भी हम अवैध प्रवास के मामले पेश करते हैं तो वे अपने लोगों को वापस ले जाते हैं.

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राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Citizenship Register) की फाइनल लिस्ट जारी होने के कुछ घंटों बाद News18 को दिए एक खास इंटरव्यू में असम के वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma)  ने कहा कि अपडेट प्रक्रिया एक व्यर्थ कवायद नहीं थी. 19 लाख से अधिक आवेदक अपडेटेड एनआरसी (NRC) से बाहर हुए हैं.

उन्होंने कहा, "हमारे लिए यह मिलाजुला अनुभव रहा है. 1971 के बाद शरणार्थी के रूप में आए लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ेगा. हमारी सहानुभूति उनके साथ है, लेकिन ऐसे भी कई लोग हैं जिन्होंने एनआरसी प्रक्रिया में हेर-फेर किया है और हम इस पर ध्यान देंगे."

नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) के संयोजक सरमा ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) बांग्लादेश (Bangladesh) की सीमा से लगे जिलों में एनआरसी की सूची में शामिल 20 प्रतिशत और पूरे असम (Assam) में 10 प्रतिशत लोगों के नामों के पुन: सत्यापन की इजाजत दे. उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी की सत्यापन टीम पर अपना भरोसा दोहराया है. केंद्र और राज्य सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कुछ लोगों के पुन: सत्यापन की जरूरत है."



नकली दस्तावेजों पर गिरफ्तारी पर सरमा ने कहा, "NRC समन्वयक ने नकली दस्तावेजों का सामना करने के लिए लेगेसी डेटा प्रक्रिया (Legacy Data Process) का पालन किया है. हमने नकली दस्तावेजों के लिए कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी प्रक्रिया को फिर से जांचने की जरूरत है."

अवैध प्रवासी ममता के वोट बैंक
सरमा से जब पिछले सालों में हुए जनसांख्यिकी में बदलाव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "इसमें कोई मिथक नहीं है. अगर आप धार्मिक जनगणना के आंकड़ों को देखेंगे तो पाएंगे कि एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है. हम कुछ अवैध प्रवासियों का पता लगाने में कामयाब हुए हैं और इस तलाश को और परिष्कृत बनाने की कोशिश कर रहे हैं. यह प्रक्रिया तब तक चलेगी जब तक असम के प्रत्येक स्वदेशी को अपना स्थान नहीं मिल जाता. हमनें 14-15 लाख प्रवासियों का पता लगाया है. यह साबित हो गया है. हमें इससे मतलब नहीं कि ममता बनर्जी क्या कहती हैं. अवैध प्रवासी उनके वोट बैंक हैं."
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बता दें कि एनआरसी की फाइनल लिस्ट आने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने एक ट्वीट किया और कहा कि इसने उन लोगों को बेनकाब कर दिया है, जिन्होंने राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि मेरा दिल उन सभी लोगों के साथ विशेषकर बांग्लाभाषियों के साथ है जो इससे पीड़ित हैं."



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मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा
मानवाधिकारों के हनन पर वरिष्ठ बीजपी नेता ने आश्वासन दिया कि ऐसा कुछ नहीं होगा और किसी को हिरासत में नहीं लिया जा रहा है. उन्होंने कहा, "हमारे पास कई सारे लोगों का आधार डेटा है. किसी के भी मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा. हम बांग्लादेश से संपर्क करेंगे और उन्हें अपने लोगों को वापस ले जाने के लिए कहेंगे, लेकिन उस दौरान उन्हें वोट देने और कुछ दूसरी सुविधाएं नहीं दी जाएगी."

बांग्लादेश से करेंगे बात
हिमंता बिस्वा सरमा ने आगे कहा कि बांग्लादेश की सरकार भारत की मित्र है और वे हमारे साथ सहयोग कर रहे हैं. जब भी हम अवैध प्रवास के मामले पेश करते हैं तो वे अपने लोगों को वापस ले जाते हैं. हालांकि इनकी संख्या अधिक नहीं रही है, लेकिन अब हमारे पास उनकी पहचान करने के लिए एक प्रक्रिया होगी.

लोगों को मिलेगी कानूनी मदद
बीजेपी नेता ने आगे कहा कि किसी का नाम एनआरसी लिस्ट में नहीं है तो इसका मतलब ये नहीं है कि उन्हें विदेशी कहा जाएगा और बांग्लादेश भेज दिया जाएगा. एक कानूनी प्रक्रिया है जो उनकी मदद करेगी, लेकिन तब तक उन्हें देश की राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

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First published: September 1, 2019, 6:05 AM IST
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