राज्यसभा में बोले आजाद- सांसदों का निलंबन वापस होने तक सत्र का बहिष्कार करेगा विपक्ष

गुलाम नबी आजाद की फाइल फोटो
गुलाम नबी आजाद की फाइल फोटो

Monsoon Session 2020: कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि 'इस सदन में हुई घटनाओं से कोई भी खुश नहीं है. जनता चाहती है कि उनके नेताओं को सुना जाए. कोई भी अपने विचारों को सिर्फ 2-3 मिनट में नहीं बता सकता है.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 11:15 AM IST
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नई दिल्ली. कृषि बिल (Farmer Bill) पर राज्यसभा (Rajya Sabha) में रविवार को मचे घमासान के बाद निलंबित किए गए सांसदों का निलंबन रद्द किए जाने की मांग तेज हो गई है. कांग्रेस सांसद और लीडर ऑफ अपोजिशन गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने कहा मंगलवार को यह मांग की. इसके साथ ही समाजवादी पार्टी से सांसद रामगोपाल यादव, पूर्वी पीएम एचडी देवेगौड़ा ने भी सांसदों का निलंबन वापस लेने की मागं की.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने मंगलवार को कहा कि जब तक उच्च सदन के आठ सदस्यों का, मानसून सत्र की शेष अवधि से निलंबन वापस नहीं लिया जाता तब तक विपक्ष कार्यवाही का बहिष्कार करेगा. शून्यकाल के बाद आजाद ने उच्च सदन में यह भी मांग की कि सरकार को ऐसा विधेयक लाना चाहिए जो यह सुनिश्चित करे कि निजी कंपनियां सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम दाम में किसानों का अनाज न खरीदें. उन्होंने सरकार से कहा कि सरकार को स्वामीनाथन फार्मूले के अनुसार, समय समय पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करते रहना चाहिए.

आजाद ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार के अंतर तालमेल का अभाव है. एक दिन पहले ही कृषि विधेयकों पर पूरी चर्चा एमएसपी पर केंद्रित रही और उसके एक दिन बाद सरकार ने कई फसलों के लिए एमएसपी की घोषणा कर दी. रविवार को सदन में अमर्यादित आचरण करने को लेकर तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और आप के संजय सिंह सहित विपक्ष के आठ सदस्यों को सोमवार को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया.



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पूर्व पीएम और सपा सांसद ने किया अनुरोध
इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने कहा कि सदन में जो हुआ उससे वह 'दुखी' हैं. आठ सांसदों की ओर से माफी मांगते हुए उन्होंने कहा, "जब गुस्सा ज्यादा होता है तो लोग नियंत्रण खो देते हैं. मैं चेयर से सांसदों के निलंबन को रद्द करने का अनुरोध करता हूं.'

पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा ने सभापति से कहा, 'सरकार और विपक्ष को आपस में बैठकर सदन चलाने में मदद करनी चाहिए. हम तमाशे के लिए यहां नहीं आए हैं. सरकार को समझ में आना चाहिए कि विपक्ष और सरकार दोनों को एक साथ बैठकर सदन चलाने में मदद करनी होगी. लोकतंत्र में सहयोग से काम करना चाहिए.'

इस घटनाक्रम पर राज्यसभा में संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि उच्च सदन में जो हुआ क्या वह दुखद नहीं है? इस तरह से व्यवहार किया जाता है? अगर वह अपने किए पर खेद जताना चाहते हैं तो सरकार बिना उनके सदन चलाने की इच्छुक हीं है. हम एक चर्चा के लिए तैयार हैं.' (भाषा इनपुट के साथ)
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