क्या बीएसपी-कांग्रेस में होगा गठबंधन?

कांग्रेस के सितारे गर्दिश में हैं इसलिए वह तो चाहेगी कि किसी तरह एंटी मोदी ध्रुवीकरण बनाया जाए. दलित वोटों की वजह से बसपा को गुमान रहता है लेकिन उसे भी अपनी पॉलिटिक्स को ठीक करना होगा क्योंकि अब पहले जैसे हालात नहीं हैं. नए दलित क्षत्रप उभर रहे हैं.

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: February 15, 2018, 3:10 PM IST
क्या बीएसपी-कांग्रेस में होगा गठबंधन?
बीएसपी गठबंधन के बिल्कुल खिलाफ नहीं है. लेकिन ऐसा तभी होगा जब सम्मानजनक सीटें मिलेंगीं
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: February 15, 2018, 3:10 PM IST
केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी 2019 के लोक सभा चुनावों की तैयारी में जुट गई है. लेकिन विपक्षी एकता का अब तक कुछ पता नहीं है. सभी पार्टियों की नजर बसपा की सियासी रणनीति पर है. विपक्ष को दलित वोटों की दरकार है इसलिए बसपा उससे अपनी शर्तों पर ही समझौता करना चाहती है.

बसपा ने कर्नाटक में एचडी देवगौड़ा की पार्टी जनता दल (सेक्युलर) से गठबंधन कर करके बता दिया है कि गठबंधन के लिए ज्यादा चिंता कांग्रेस को करनी है. बसपा राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन करना चाहती है. जबकि कांग्रेस जिन राज्यों में मजबूत है वहां उसे शेयर नहीं देना चाहती और यूपी जैसे राज्य जहां पर वह कमजोर है वहां उसका साथ चाहती है. इसलिए गठबंधन का मामला खटाई में पड़ा हुआ है.

वरिष्ठ बसपा नेता ठाकुर उम्मेद सिंह ने hindi.news18.com से कहा "हम चाहते हैं कि कोई भी गठबंधन 2019 ही नहीं 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव को भी देखते हुए हो. ऐसा न हो कि 2019 में मतलब निकलने के बाद कांग्रेस साथ छोड़ दे. बसपा को गठबंधन से ज्यादा लाभ 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों में हो सकता है. इसलिए पार्टी आगे तक की शर्तों पर गठबंधन चाहती है."

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सिंह ने कहा "गठबंधन में दिक्कत हमारी तरफ से नहीं है. हम तो तैयार हैं, लेकिन उसका आधार तय होना चाहिए. गुजरात और हिमाचल चुनाव में गठबंधन को लेकर कांग्रेस से बात हुई थी. पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश मिश्र की 10 जनपथ पर राहुल गांधी, सोनिया गांधी से मुलाकात हुई थी, लेकिन कांग्रेस ने इन दोनों राज्यों में हमें सीटें नहीं दीं. क्योंकि कांग्रेस को भ्रम था कि वह गुजरात चुनाव जीत जाएगी. उसका बसपा से गठबंधन होता तो वहां बीजेपी की सरकार नहीं बनती. कांग्रेस को यह सच्चाई समझनी चाहिए. गठबंधन न होने से नुकसान कांग्रेस को हुआ है."

बताया गया है कि बसपा गुजरात में कांग्रेस से 25 और हिमाचल में कांग्रेस की हारी 10 सीटें मांगी थीं. लेकिन कांग्रेस ने मना कर दिया. मायावती ने नवंबर 2017 में कहा था "बीजेपी व अन्य सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता में आने से रोकने के लिए बीएसपी गठबंधन के बिलकुल खिलाफ नहीं है. लेकिन पार्टी गठबंधन तभी करेगी जब बंटवारे में सम्मानजनक सीटें मिलेंगीं."


हालांकि, कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी कहती हैं कि "बीजेपी विरोधी दलों से पार्टी की बातचीत चल रही है. हम चाहते हैं कि मजबूत गठबंधन बने जिससे बीजेपी को हराया जा सके. इस बारे में किसी से हमारी बातचीत बंद नहीं है." सियासी जानकारों का कहना है कि दलित वोट हर राज्य में हैं. इसलिए अगर मुस्लिम-दलित गठजोड़ बनता है तो ही विपक्ष बीजेपी को चुनौती दे पाएगा.

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सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोसायटी एंड पॉलिटिक्स के निदेशक प्रोफेसर एके वर्मा कहते हैं "कांग्रेस के सितारे गर्दिश में हैं इसलिए वह तो चाहेगी कि किसी तरह एंटी मोदी ध्रुवीकरण बनाया जाए. दलित वोटों की वजह से बसपा को गुमान रहता है लेकिन उसे भी अपनी पॉलिटिक्स को ठीक करना होगा क्योंकि अब पहले जैसे हालात नहीं हैं. नए दलित क्षत्रप उभर रहे हैं. दलित वोटरों के लिए भी विकल्प तैयार हो रहे हैं. इसलिए दोनों अपने हितों के लिए गठबंधन कर लें तो कोई बड़ी बात नहीं."

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