OPINION: क्या BJP को लेकर DMK की नापसंदगी 2019 के गठबंधन में बनेगी रोड़ा?

OPINION: क्या BJP को लेकर DMK की नापसंदगी 2019 के गठबंधन में बनेगी रोड़ा?
करुणानिधि के बेटे स्टालिन और कनिमोझी को सांत्वना देते पीएम मोदी

डीएमके इस बात से नाराज हो गया कि एआईएडीएमके को केंद्र सरकार मदद कर रही है. लिहाज़ा स्टालिन ने खुलेआम घोषणा कर दी कि वो बीजेपी के साथ कभी हाथ नहीं मिलाएंगे

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 9, 2018, 12:57 PM IST
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(शेखर अय्यर)

बुधवार को तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके के प्रमुख एम करुणानिधि के निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए चेन्नई पहुंचे थे. पीएम मोदी के वहां पहुंचने से अटकलों का बाज़ार गर्म हो गया है. सवाल उठने लगे हैं कि क्या लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी का DMK से गठबंधन होगा? लेकिन ऐसे ही दृश्य दिसंबर 2016 में AIADMK की चीफ जयललिता की मौत के बाद भी देखने को मिले थे. जयललिता को भी श्रद्धांजलि देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चेन्नई गए थे.

प्रधानमंत्री मोदी न सिर्फ चेन्नई पहुंचे थे बल्कि वो जयललिता की विवादास्पद सहयोगी शशिकला को सांत्वना देते हुए भी दिखे थे. ये एक अलग कहानी है कि सुप्रीम कोर्ट ने शशिकला को आय से अधिक संपत्ति मामले में उनकी सजा को बरकरार रखा. उस वक्त AIADMK के दो धड़ों ने केंद्र से शरण मांगी थी. बाद में वो तमिलनाडु में सरकार बचाने के लिए एक फॉर्मूला ले कर आए थे. इसके तहत ई पलानिस्वामी को मुख्यमंत्री बनाया गया. जबकि विरोधी गुट के नेता ओ पन्नीरसेल्वम को उपमुख्यमंत्री की ज़िम्मेदारी दी गई.



इस फॉर्मूले के चलते डीएमके और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया कि मोदी और बीजेपी दिल्ली से रिमोट कंट्रोल के ज़रिए सरकार चला रहे है. शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरन उन्हें बार-बार धमकी दे रहे थे. ऐसे में ई पलनिस्वामी और पन्नीरसेल्वम बार-बार दिल्ली से मदद मांगते नज़र आए.



दीनाकरन ने ये दिखाना चाहा कि उनके गुट के पास ताकत है. दिसंबर 2017 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ते हुए उन्होंने आरके पुरम विधानसभा सीट से एआईएडीएमके के उम्मीदवार को हरा दिया. उस चुनाव में डीएमके की ज़मानत जब्त हो गई. ये पलनिस्वामी और पन्नीरसेल्वम दोनों के लिए एक शर्मनाक पल थे क्योंकि शशिकला खेमे को रोकने के लिए उनकी रणनीति फ्लॉप हो गई थी.

उन दिनों भी मोदी बीमार करुणानिधि से मिलने चेन्नई गए थे. उस वक्त भी बीजेपी की मंशा पर सवाल उठे थे. इस बीच पन्नीरसेल्वम के खिलाफ उनके समर्थकों ने हल्लाबोल दिया. उनका आरोप था कि किसी भी अहम पद पर वो उन्हें मौका नहीं दे रहे हैं. पन्नीरसेल्वम ने पलनिस्वामी गुट के साथ हाथ मिला लिया. पन्नीरसेल्वम ने खुद कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी चाहते थे कि वो ऐसा करें. केंद्र में बीजेपी के नेता इससे नाराज़ हो गए. न तो मोदी और न ही बीजेपी प्रमुख अमित शाह चाहते थे कि एआईएडीएमके मामलों में सीधे दखल देने के तौर पर उन्हें देखा जाना चाहिए.

डीएमके इस बात से नाराज हो गया कि एआईएडीएमके को केंद्र सरकार मदद कर रही है. लिहाज़ा स्टालिन ने खुलेआम घोषणा कर दी कि वो बीजेपी के साथ कभी हाथ नहीं मिलाएंगे. इसके पीछे उन्होंने दो कारण बताए. पहला ये कि वो मोदी-शाह की भगवा राजनीति से समझौता नहीं कर सकते और दूसरा कांग्रेस के साथ उनका तालमेल सही तरीके से चल रहा था.

स्टालिन ने ये भी संकेत दिया कि 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले के दौरान कांग्रेस पार्टी के साथ खटास भरे संबंधों को भी उसने भुला दिया है. 2014 के चुनावों के बाद, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी डीएमके के साथ मनमुटाव को पीछे छोड़ दिया और लंबे अंतराल के बाद उन्होंने करुणानिधि से फोन पर बातचीत की. उन्होंने स्टालिन के पोते के साथ फोट भी खिंचवाई. ऐसे ही तस्वीर उन्होंने तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव के साथ खिंचवाई थी.

करुणानिधि ने कभी भी बीजेपी का समर्थन नहीं किया क्योंकि वो पेरियार का विरोध करते थे. इसके बावजूद करुणानिधि ने 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में वाली एनडीए सरकार के साथ हाथ मिलाया. करुणानिधि के मंत्री लंबे समय तक सत्ता में रहे और 2004 के चुनावों से पहले ही उन्होंने एनडीए का साथ छोड़ दिया क्योंकि करुणानिधि कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहते थे. इससे ये साबित हो गया कि राज्य में सत्ता से बाहर होने पर डीएमके केंद्र में सत्ता का आनंद लेने के लिए तैयार रहती है.

सूत्रों का कहना है कि 201 9 के बाद के चुनाव परिदृश्य में, अगर एआईएडीएमके के गुटों से केंद्र के संबध खराब हुए तो फिर डीएमके, मोदी और बीजेपी के साथ हाथ मिला सकती है.

(लेखक हिंदुस्तान टाइम्स के पूर्व सीनियर एसोसिएट एडिटर है, ये उनके निजी विचार हैं)

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