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उचाना कलां से क्या अपनी राजनीतिक किस्मत बदल सकेंगे दुष्यंत चौटाला?

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Updated: October 18, 2019, 6:00 PM IST
उचाना कलां से क्या अपनी राजनीतिक किस्मत बदल सकेंगे दुष्यंत चौटाला?
दुष्यंत चौटाला ने जन नायक जनता पार्टी बनाई है

कम उम्र में हिसार से सांसद बनकर दुष्यंत ने रिकॉर्ड बनाया था लेकिन उनकी राजनीतिक उड़ान को उचाना कलां की हार ने वापस धरातल पर ला दिया था.

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  • Last Updated: October 18, 2019, 6:00 PM IST
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नई दिल्ली. हरियाणा के जींद जिले से जननायक जनता पार्टी का ऐलान करने के बाद अब पार्टी अध्यक्ष दुष्यंत टाला जोश से भरे हुए हैं. दुष्यंत चौटाला साल 2019 का विधानसभा चुनाव उचाना कलां से लड़ रहे हैं. कम उम्र में हिसार से सांसद बनकर दुष्यंत ने रिकॉर्ड बनाया था लेकिन उनकी राजनीतिक उड़ान को उचाना कलां की हार ने वापस धरातल पर ला दिया था. साल 2014 के विधानसभा चुनाव में दुष्यंत चौटाला उचाना कलां सीट से हरियाणा के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता से चुनाव हार गए थे. 

उचाना कलां विधानसभा सीट की खास बात ये है कि यहां से जीता हुआ विधायक कभी दोबारा चुनाव नहीं जीता है लेकिन सिर्फ बीरेंद्र सिंह ही अपवाद हैं जो कि इस सीट से पांच बार विधायक रहे हैं तो सबसे ज्यादा इस सीट से 7 बार चुनाव भी बीरेंद्र सिंह ने लड़ा है. जबकि केवल एक बार उनकी पत्नी प्रेमलता को केवल एक बार यहां से जीत हासिल हुई है. 

उचाना कलां की राजनीति केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह और चौटाला परिवार के ईर्द-गिर्द घूमती आई है. यहां बीरेंद्र सिंह का ऐसा मजबूत वोट बैंक रहा कि मुकाबला बीरेंद्र सिंह बनाम दूसरी पार्टियां रहा है. बीरेंद्र सिंह भले ही किसी भी पार्टी में रहें हो लेकिन जीत उनके ही खाते में आई है. 

साल 1977 में पहली दफे उचाना कलां विधानसभा सीट बनी. चौधरी बीरेंद्र सिंह यहां के पहले विधायक बने. देश भर में इमरजेंसी के विरोध की लहर थी जिसका कांग्रेस को खामियाजा भुगतना पड़ा था. उस वक्त पूरे हरियाणा में कांग्रेस के केवल 5 सीटें मिलीं थी जबकि उसी दौर में जनता-लहर के बावजूद बीरेंद्र सिंह यहां से चुनाव जीतने में कामयाब हुए. 

साल 2009 में उचाना कलां में सबसे रोचक मुकाबला हुआ था. चौधरी बीरेंद्र सिंह और इनेलो अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला के बीच बेहद कड़ा मुकाबला हुआ था. चौटाला ने वो चुनाव केवल 621 वोटों से जीता था. जिसके बाद हरियाणा में सबसे कम वोट से हार का रिकॉर्ड बीरेंद्र सिंह के नाम दर्ज हो गया. 

एक बार फिर प्रेमलता अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं तो दुष्यंत चौटाला अपनी किस्मत की लकीरों को बदलने के लिए पूरा ज़ोर लगा रहे हैं.

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First published: October 18, 2019, 5:58 PM IST
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