Opinion: क्या बंगाल चुनाव के बाद कैप्टन अमरिंदर का साथ छोड़ देंगे प्रशांत किशोर?

प्रशांत किशोर को पंजाब सरकार में कैबिनटे मंत्री का दर्जा दिया गया है

प्रशांत किशोर को पंजाब सरकार में कैबिनटे मंत्री का दर्जा दिया गया है

पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें अपना प्रिंसिपल एडवाइजर नियुक्त करते हुए कैबिनेट मिनिस्‍टर की रैंक दी है. साथ ही चुनाव प्रबंधन की भी जिम्‍मेदारी सौंप दी है.

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(प्रसन्न प्रांजल)

बंगाल और तमिलनाडु चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. इन दोनों राज्यों में चुनावी कैंपेन का काम राजनीति के कुशल रणनीतिकार माने जाने वाले प्रशांत किशोर यानी पीके ने संभाल रखी है. पीके की पूरी टीम फिलहाल इन दोनों राज्यों में व्यस्त है. इन दोनों राज्यों के चुनाव खत्म होने में अभी भी दो महीने का समय है लेकिन पीके को अगले साल पंजाब में होने वाले चुनाव का काम मिल गया है. पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें अपना प्रिंसिपल एडवाइजर नियुक्त करते हुए कैबिनेट मिनिस्‍टर की रैंक दी है. साथ ही चुनाव प्रबंधन की भी जिम्‍मेदारी सौंप दी है.

प्रशांत किशोर को भले ही पंजाब के चुनावी मैनेजमेंट का काम अभी मिल गया है, लेकिन उनका यह काम काफी हद तक बंगाल के चुनाव परिणाम पर निर्भर कर सकता है. अगर बंगाल का चुनाव परिणाम बीजेपी के लिए पॉजिटिव रहा तो प्रशांत के लिए पंजाब में कांग्रेस यानी कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा. अगर पीके अपनी बात पर अडिग रहे तो 2 मई के बाद उन्हें कैप्टन को बीच मझधार में भी छोड़ना पड़ सकता है.

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आखिर पीके की क्या हो सकती है मजबूरी?

दरअसल 21 दिसंबर को प्रशातं किशोर ने सोशल मीडिया पर खुलेआम कहा था कि अगर बंगाल चुनाव में बीजेपी दो डिजिट से ज्यादा सीट जीतने में कामयाब हो जाती है तो वह इस स्पेस (यानी की पॉलिटिकल स्पेस) को छोड़ देंगे. मतलब साफ था कि अगर बीजेपी 100 के आंकड़े तक पहुंच जाती है तो वह पॉलिटिकल कैंपेन और स्‍ट्रैटजी बनाने का काम छोड़ देंगे. पिछले हफ्ते चुनाव आयोग की तरफ से चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के बाद 27 फरवरी को पीके ने अपनी पुरानी बात को फिर से दोहराया और उन्होंने ट्विट करते हुए कहा कि मेरा पुराना ट्वीट याद रखें. अब बुधवार को एक चैनल को इंटरव्यू देते हुए पीके ने इस बात को तीसरी बार कहा- अगर बीजेपी 100 सीट जीत पाती है तो मैं रणनीति बनाना छोड़ दूंगा." उन्होंने बार-बार जोर देकर कहा कि मैं रणनीति बनाना छोड़ दूंगा, चाहे मुझे कोई और दूसरा काम क्‍यों न करना पड़े. अब ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि बंगाल का चुनाव परिणाम प्रशांत के आगे की रणनीति पर भी असर डालेगा.

क्या बीजेपी करेगी दो डिजिट को क्रॉस?



प्रशातं किशोर भले ही पूरे आत्‍मविश्‍वास से इस बात को बार बार दोहरा रहे हैं कि बीजेपी बंगाल में दो डिजिट से ज्यादा नंबर लाने में कामयाब नहीं हो पाएगी. लेकिन कुछ समीकरणों पर गौर करें तो इस बात की पूरी संभावना दिख रही है कि बीजेपी 100 या उससे ज्यादा सीट जीत सकती है.

2019 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 18 सीटों पर जीत दर्ज की. औसतन 6 विधानसभा को मिलाकर एक लोकसभा क्षेत्र बनाया गया है. अगर इस लिहाज से देखा जाए तो बीजेपी 108 सीटों पर जीत दर्ज करने का माद्दा रखती है. वहीं अगर लोकसभा चुनाव परिणाम का विधानसभावार विश्‍लेषण देखें तो ये साफ दिखता है क‍ि 128 विधानसभा सीटों पर बीजेपी को बढ़त थी. वहीं लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिले वोट शेयर के हिसाब से भी देखें तो बीजेपी को 41 फीसदी वोट मिले थे. इस हिसाब से बीजेपी राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा में 120 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है.

हालांकि लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के मुद्दे और हालात अलग होते हैं. लेकिन अभी तक बंगाल के जो राजनीतिक हालात हैं, उसे देखते हुए तमाम राजनीतक विश्‍लेषक भी इस बात को मानते हैं कि बीजेपी ममता बनर्जी की टीएमसी को कड़ी टक्कर दे रही है और 100 का आंकड़ा आसानी से पार कर सकती है. सिर्फ इतना ही नहीं प्रशांत किशोर की खुद की टीम (आईपैक) जो बंगाल चुनाव में काम कर रही है. उस टीम के भी अधिकांश सदस्य इस बात को दबी जुबान से स्वीकार कर रहे हैं कि बीजेपी से कड़ी टक्कर मिल रही है और इस चुनाव में बीजेपी 100 से ज्यादा सीटों पर कब्जा जमा ही लेगी.

2 मई के बाद PK का क्या होगा?

बंगाल का चुनाव परिणाम 2 मई को आने वाला है. यह चुनाव परिणाम काफी हद तक प्रशांत किशोर के आगे की राजनीतिक करियर और कामकाज पर असर डाल सकता है. अगर बीजेपी 100 का आंकड़ा पार करने में सफल हो जाती है तो क्या वाकई में प्रशांत किशोर पॉलिटिकल स्‍पेस छोड़ देंगे? क्या प्रशांत किशोर कैप्टन के चुनावी प्रबंधन और उनकी ओर से दिए गए पद और कैबिनेट मिनिस्‍टर की रैंक को अलविदा कह देंगे. क्या इस चुनाव के बाद प्रशांत किशोर या उनकी टीम किसी चुनावी कैंपेन का काम नहीं लेगी? इन सभी सवालों का जवाब तो दो महीने बाद बंगाल चुनाव परिणाम आने पर ही पता चलेगा. लेकिन इतना तो तय है कि अगला दो महीना जितना महत्‍वपूर्ण बीजेपी और टीएमसी के लिए है उतना ही महत्‍वपूर्ण प्रशांत किशोर के लिए भी है.

(यह लेखक के निजी विचार हैं)
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