अगले साल राहुल गांधी के हाथों में होगी कांग्रेस की कमान!

राहुल गांधी (PTI Photo)
राहुल गांधी (PTI Photo)

कांग्रेस (Congress) के चुनाव पदाधिकारियों की दूसरी बैठक से यह बात सामने निकलकर आ रही है कि अगले तीन महीने में पार्टी को एक नया रूप दिया जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 16, 2020, 1:04 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. बीते दिनों चिट्ठी प्रकरण ने कांग्रेस (Congress) पार्टी के अंदर के झगड़े को पूरे देश के सामने ला खड़ा किया था. कई कद्दावर नेताओं ने संगठन चुनाव की मांग उठाए थे. इसके बाद कांग्रेस की चुनाव समिति की बैठकों का दौर चला. अभी तक दो अहम बैठकें हो चुकी हैं. पार्टी प्रमुख के चुनाव को लेकर भी प्रक्रिया तेज हो गई है. इस बात की संभावना जताई जा रही है कि अगले तीन महीने यानी जनवरी तक इन बैठकों का असर देखने को मिल सकता है. अपने वादों के प्रति प्रतिबद्धता की वजह से, कांग्रेस आलाकमान भी इन बैठकों पर नज़र बनाए हुए है, जिस पर मीडिया में चर्चा हो रही है.

कांग्रेस के चुनाव पदाधिकारियों की दूसरी बैठक से यह बात सामने निकलकर आ रही है कि अगले तीन महीने में कांग्रेस को एक नया रूप दिया जा सकता है, जिसमें जनवरी तक नए अध्यक्ष के चुनाव की संभावना भी जताई जा रही है.

चुनाव समिति कांग्रेस अध्यक्ष को यह सूचित करने के लिए एक से डेढ़ महीने और ले सकता है कि वे सही दिशा में जा रहे हैं. कांग्रेस के हालिया तेवर से इस बात का अंदाजा लगाना आसान हो जाता है कि राहुल गांधी फिर से कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर वापसी कर सकते हैं. आपको बता दें कि कई नेताओं ने खुलकर यह मांग भी पार्टी फोरम पर रखी है.



कांग्रेस का रूल बुक
हालांकि प्राधिकरण नियम पुस्तिका के तहत ही आगे की दिशा में बढ़ेगा और यह भी सुनिश्चित करेगा कि संगठन को लेकर जो भी निर्णय लिए गए हैं वे पार्टी के संविधान के तहत ही हैं.

इस मामले पर कांग्रेस सूत्र का कहना है, 'हमें हर राज्य इकाई को संदेश भेजना होगा और AICC सदस्यों की सूची तैयार करनी होगी. यह सिर्फ एक प्रारंभिक बैठक थी और भविष्य में हम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी बैठक करेंगे. उचित प्रक्रिया और औपचारिकताओं का पालन करते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होंगे.’

कांग्रेस 2021 में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जनवरी में एआईसीसी का सत्र बुला सकती है. इससे पहले चुनाव की पूरी प्रकिया समाप्त कर ली जाएगी. इस सत्र में इस बात के साफ संदेश दे दिए जाएंगे कि कांग्रेस का नेतृत्व अब किसके हाथ में होगा.

बता दें कि अभी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का कार्यकाल समाप्त नहीं हो रहा है. चूंकि वह अंतरिम अध्यक्ष हैं, इसलिए कार्यकाल के दौरान भी चुनाव कराए जा सकते हैं, जिसमें AICC के करीब 1400 सदस्य वोटिंग करने के लिए शामिल हो सकते हैं.

राहुल गांधी के लिए तैयार किया जा रहा मंच
जिस तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिए गए या पार्टी छोड़ चुके राहुल गांघी के वफादारों को नई समितियों में नियुक्त किया गया है, यह स्पष्ट संकेत है कि राहुल गांधी की वापसी के लिए मंच तैयार किया जा रहा है.
उन्हीं नेताओं में से एक हैं मधुसूदन मिस्त्री, जिनको राहुल गांधी की पसंद पर चुनाव समिति का प्रमुख बनाया गया. फिर मोहन प्रकाश, जिन्हें पहले महासचिव के पद से हटा दिया गया था. अब उन्होंने बिहार चुनाव के लिए एक समिति के माध्यम से वापसी की है. इतना ही नहीं राहुल गांधी के फेवरेट रहे अजय कुमार, जिन्होंने आम आदमा पार्टी का दामन थाम लिया था, उनकी भी पार्टी में वापसी हो चुकी है.

राहुल गांधी द्वारा नियुक्त किए गए ये नेता पार्टी की मुख्य धारा में वापसी की तलाश कर रहे हैं. हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर भी राहुल गांधी के खेमे में नजर आ रहे हैं, हालांकि उनकी वापसी कड़वा अतीत और हुड्डा के साथ उनके परेशानी भरे रिश्तों को देखते हुए इतनी आसान नहीं होगी.

कांग्रेस की नई CWC
दिलचस्प बात यह है कि सीडब्ल्यूसी के 12 सदस्यों को भी चुनाव के जरिए ही नियुक्त किया जाता है. हाल ही में पुनर्गठित सीडब्ल्यूसी के नए सदस्यों को कुछ महीनों के बाद इस्तीफा देना होगा. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों को लगता है, ‘कांग्रेस नेतृत्व ने भी हाल ही में 22 असंतुष्टों की सूची से चुनकर विद्रोह को शांत करने की एक कोशिश की है.’

बता दें कि इनमें मुकुल वासनिक को मध्य प्रदेश का प्रभारी, जितिन प्रसाद को पश्चिम बंगाल, अरविंदर सिंह लवली व अन्य को चुनाव प्राधिकरण का सदस्य चुना गया. लवली के अलावा चुनाव अधिकारी में पूर्व सांसद राजेश मिश्रा, कर्नाटक के पूर्व मंत्री कृष्णा बायर गौड़ा, लोकसभा सांसद जोथिमणि के साथ मधुसूदन मिस्त्री प्रमुख हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज