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क्‍या दिल्‍ली की सियासत में फिर कांग्रेस का सिक्‍का चला पाएंगे वरिष्‍ठ नेता जेपी अग्रवाल?

News18Hindi
Updated: January 8, 2020, 4:50 PM IST
क्‍या दिल्‍ली की सियासत में फिर कांग्रेस का सिक्‍का चला पाएंगे वरिष्‍ठ नेता जेपी अग्रवाल?
दिल्‍ली प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्ष बनने की दौड़ में वरिष्‍ठ नेता जेपी अग्रवाल का नाम सबसे आगे चल रहा है.

दिल्‍ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) के निधन के बाद वरिष्‍ठ नेता जेपी अग्रवाल (JP Aggarwal) प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं. वह कांग्रेस (Congress) के लिए कई बार लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) जीतने के साथ ही राज्‍यसभा (Rajya Sabha) सदस्‍य भी रह चुके हैं. उन्‍हें संगठन का लंबा अनुभव है.

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  • Last Updated: January 8, 2020, 4:50 PM IST
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नई दिल्‍ली. दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2020 (Delhi Assembly Election 2020) जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी दलों (Political Party) में हलचल भी तेज हो गई है. इसी क्रम में कांग्रेस (Congress) के वरिष्‍ठ नेता जेपी अग्रवाल (JP Aggarwal) पार्टी के प्रदेश अध्‍यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं. दरअसल, दिल्‍ली की पूर्व मुख्‍यमंत्री शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) के निधन के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष का पद खाली है. अग्रवाल उम्र के 74 पड़ाव पार कर चुके हैं. ऐसे में उनकी उम्र अध्‍यक्ष बनने की राह में रुकावट पैदा कर सकती है. हालांकि, सियासत में उनका लंबा अनुभव और उपलब्धियां उनके फिर प्रदेश कांग्रेस में सर्वेसर्वा बनने को आसान बना सकती हैं. पहले भी 2007 में वह इस पद की जिम्‍मेदारी बखूबी संभाल चुके हैं. इसके अलावा वह कांग्रेस के टिकट पर चार बार लोकसभा चुनाव भी जीत चुके हैं.

लंबा राजनीतिक जीवन
जेपी अग्रवाल ने तीन बार चांदनी चौक (Chandni Chowk) और एक बार पूर्वी दिल्ली (East Delhi) से चुनाव जीता था. दिल्ली से 1984, 1989, 1996 और 2009 में लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) जीत चुके जेपी अग्रवाल को 2006 में राज्यसभा (Rajya Sabha) सदस्य भी चुना जा चुका है. इतना ही नहीं 1983-84 में वह डिप्टी मेयर भी रह चुके हैं. वह 1992 में प्रदेश कांग्रेस के उपाध्‍यक्ष भी रहे थे. उनके अनुभव और उपलब्धियों से साफ है कि वह दिल्‍ली की सियासत को अच्‍छे से समझते हैं. यही वजह है कि उन्हें कई खेमों में बंटी कांग्रेस को फिर से संभालने की जिम्मेदारी दी जा सकती है.

गांधी परिवार के भरोसेमंद

वरिष्‍ठ नेता जेपी अग्रवाल को 1992 में ही ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) का सदस्य भी बनाया गया था. उन्‍हें संगठन में कार्य करने की बेहतर शैली के लिए पहचाना जाता था. गांधी परिवार (Gandhi Family) के विश्वासपात्र माने जाने वाले जेपी की कैमिस्ट्री शीला दीक्षित से भी अच्छी रही है. इसलिए शीला दीक्षित जब दिल्ली की राजनीति में चरम पर थीं तो उन्‍होंने जेपी अग्रवाल को 2007 में प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनवाने में अहम भूमिका निभाई थी. 8वीं, 9वीं, 11वीं और 15वीं लोकसभा के सदस्य रह चुके अग्रवाल के पास संगठन का अच्छा खासा अनुभव है. अग्रवाल 35 साल प्रदेश की राजनीति में अहम किरदार निभा चुके हैं.

कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता जेपी अग्रवाल को राजनीति के उबड़-खाबड़ रास्‍तों पर गिरने के बाद संभलने की कला में महारत हासिल है.


व्‍यापारी वर्ग में मजबूत पैठलोकसभा चुनाव 2019 में चंदनी चौक से मैदान में उतरे जेपी अग्रवाल के लिए हारना निराशजनक जरूर रहा है, लेकिन राजनीति के उबड़-खाबड़ रास्‍तों पर गिरने के बाद संभलने की कला में उन्हें महारत हासिल है. उनके पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी (Freedom Fighter) थे. जेपी अग्रवाल पर अपने पिता का खास प्रभाव रहा है. यही वजह है कि उन्‍होंने कभी भी कांग्रेस को छोड़कर किसी दूसरी पार्टी का रुख नहीं किया. संगीत (Music) और खेल (Sports) में दिलचस्पी रखने वाले जेपी 74 साल की उम्र में भी बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस को संभालने का जोश रखते हैं. प्रदेश कांग्रेस में आज भी उनका दबदबा बरकरार है. उनकी दिल्ली के व्यापारी वर्ग में भी गहरी पैठ है, जो उनके लंबे राजनीतिक जीवन में अहम भूमिका निभाते रहे हैं.

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First published: January 3, 2020, 6:16 PM IST
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