OPINION: क्‍या तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सामने टिक पाएंगे एमके स्‍टालिन?

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Updated: September 2, 2019, 12:02 PM IST
OPINION: क्‍या तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सामने टिक पाएंगे एमके स्‍टालिन?
डीएमके ने तमिलनाडु विधानसभा उपचुनाव में 22 में से 13 सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन यह सीएम ई. पलानीस्‍वामी को सत्‍ता से दूर रखने के लिए नाकाफी रहा.

एमके स्‍टालिन (MK Stalin) ने पिछले कुछ समय में अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता को मजबूती के साथ रखा है. हालांकि, यह देखने वाली बात होगी कि केंद्र में बीजेपी (BJP) को मिले जबरदस्‍त बहुमत के बाद उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता डीएमके (DMK) के सियासी अस्तितव को बचाए रखने में कितनी अहम साबित होगी.

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  • Last Updated: September 2, 2019, 12:02 PM IST
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(वीरराघव टीएम)
एमके स्‍टालिन (MK Stalin) ने 28 अगस्‍त को द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) के अध्‍यक्ष के तौर पर एक साल पूरा कर लिया. इस एक साल में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि लोकसभा चुनाव 2019 में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन (DMK-Congress Alliance) को राज्‍य में जबरदस्‍त जीत दिलाना रही. गठबंधन ने राज्‍य की 39 में 38 सीटों पर जीत दर्ज की. इसके बावजूद डीएमके को तमिलनाडु (Tamil Nadu) और दिल्‍ली (Delhi) में खास सियासी फायदा नहीं मिला. इस जीत के बाद भी पार्टी सूबे की सत्‍ता से दूर ही रही.

डीएमके उपचुनाव में एआईएडीएमके को रोकने में नाकाम रही
जे. जयललिता (J. Jayalalithaa) के निधन के बाद एआईएडीएमके (AIADMK) में अंदरूनी खींचतान के बाद भी मुख्‍यमंत्री ई. पलानीस्‍वामी (E. Palaniswamy) लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा की 22 सीटों के लिए हुए उपचुनाव (Bypolls) में पर्याप्‍त सीट जीतकर सत्‍ता में बने रहे. स्‍टालिन और डीएमके एआईएडीएमके (AIADMK) को उपचुनाव में रोकने में नाकाम रही. हालांकि, डीएमके ने 22 में से 13 सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन यह पलानीस्‍वामी को सत्‍ता से दूर रखने के लिए नाकाफी थी.

सूबे के बजाय लोकसभा चुनाव में जीत पर था स्‍टालिन का ध्‍यान
अगर डीएमके कुछ और सीटें जीत लेती तो चेन्‍नई की सत्‍ता पर काबिज होसकती थी, लेकिन स्‍टालिन का पूरा ध्‍यान लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) पर था. इससे एआईएडीएमके को विधानसभा उपचुनाव में बढ़त हासिल करने का पूरा मौका मिल गया. विचारधारा के मामले में स्‍टालिन ने बीजेपी के साथ तालमेल बनाने की थोड़ी गुंजाइश छोड़ रखी है. उन्‍होंने पिछले कुछ समय में अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता को पूरी मजबूती के साथ दिखाया है. हालांकि, यह देखने वाली बात होगी कि केंद्र में बीजेपी को मिले जबरदस्‍त बहुमत के बाद उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता डीएमके के सियासी अस्तितव को बचाए रखने में कितनी अहम साबित होगी.

डीएमके के सामने कई चुनौतियां, परिवार का पार्टी में बढ़ा कद
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स्‍टालिन के पिता एम. करुणानिधि (M Karunanidhi) ने अपनी विचारधारा से बिना कोई समझौता किए बीजेपी और कांग्रेस दोनों के साथ समय-समय पर गठबंधन किया. आपातकाल के दौरान डीएमके का केंद्र की तत्‍कालीन सरकार से टकराव भी रहा, जिसके कारण कुछ समय उसे सत्‍ता से बाहर भी रहना पड़ा. अब मौजूदा हालात स्‍टालिन के लिए बड़ी परीक्षा के तौर पर खड़े हैं. फिलहाल पार्टी और उसके अध्‍यक्ष चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. वहीं, स्‍टालिन के परिवार का कद पार्टी में बढ़ रहा है.

एमके स्‍टालिन के बेटे और अभिनेता उदनिधि स्‍टालिन ( Udhayanidhi Stalin) डीएमके यूथ विंग के अध्‍यक्ष बनाए गए हैं.


उदयनिधि के यूथ विंग का अध्‍यक्ष बनने के हैं सांकेतिक मायने
स्‍टालिन के बेटे और अभिनेता उदनिधि स्‍टालिन ( Udhayanidhi Stalin) डीएमके यूथ विंग के अध्‍यक्ष बनाए गए हैं. एमके स्‍टालिन खुद इस पद पर काफी समय तक रहे हैं. ऐसे में उदयनिधि का इस पद पर नियुक्‍त होने के बड़े सांकेतिक मायने हैं. डीएमके नेताओं ने उदयनिधि की नियुक्ति का सार्वजनिक तौर पर स्‍वागत किया था. डीएमके इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है. ऐसे में उदयनिधि का यूथ विंग का अध्‍यक्ष बनाया जाना पार्टी की छवि पर खराब असर डाल सकता है.

डीएमके के पक्ष में 2021 तक जन समर्थन बना रहना मुश्किल
लोकसभा चुनाव 2019 में डीएमके को मिला जन समर्थन तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2021 तक बना रहना थोड़ा मुश्किल लग रहा है. दरअसल, ऐसा लग रहा है कि केंद्र सरकार के समर्थन के सहारे मुख्‍यमंत्री ई. पलानीस्‍वामी तमिलनाडु की सत्‍ता में वापसी कर सकते हैं. वहीं, स्‍टालिन के फिर सत्‍ता से दूर रहने के आसार नजर आ रहे हैं. मौजूदा माहौल में परिवार को पार्टी में आगे बढ़ाना अच्‍छा फैसला नहीं माना जा सकता.

पार्टी का लक्ष्‍य हासिल करने पर ध्‍यान देने की है ज्‍यादा जरूरत
स्‍टालिन के बेटे ही नहीं, बल्कि उनके दामाद सबरीसन कारोबारी और राजनीतिक हलकों में खुद को अलग सत्‍ता के केंद्र के तौर पर पेश कर रहे हैं. वह गठबंधन में सहयोगी दलों के साथ होने वाली राजनीतिक बैठकों में स्‍टालिन के साथ शिरकत कर रहे हैं. मौजूदा हालात में परिवार को अपनी महत्‍वाकांक्षाओं को किनारे रखकर पार्टी के लक्ष्‍य को हासिल करने पर ध्‍यान देने की जरूरत है. दुर्भाग्‍य से डीएमके को एक परिवार चला रहा है और पार्टी में अगली पीढ़ी के नेताओं के सामने इसे सही व उचित साबित करने की मजबूरी है.

(लेखकर वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. लेख उनके निजी विचार हैं.)

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First published: September 2, 2019, 11:50 AM IST
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