दुनिया की 17 फीसदी आबादी और पानी बस 4%, भारत पर जलवायु परिवर्तन का गंभीर खतरा

सामान्य तौर पर, जून और सितंबर के बीच होने वाली मॉनसूनी वर्षा का 17% हिस्सा जून महीने में बरस जाता है, लेकिन इस साल जून में 50% कम बारिश हुई.

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Updated: July 7, 2019, 1:14 PM IST
दुनिया की 17 फीसदी आबादी और पानी बस 4%, भारत पर जलवायु परिवर्तन का गंभीर खतरा
भारत पर मंडरा रहा है जलवायु परिवर्तन का गंभीर खतरा (सांकेतिक तस्वीर)
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Updated: July 7, 2019, 1:14 PM IST
(हृदयेश जोशी)

मुंबई में पिछले रविवार और सोमवार को भारी बारिश के बाद लोगों को गर्मी से राहत मिल गई, जबकि दिल्ली और आस-पास के इलाकों में शुक्रवार को हल्की बारिश हुई. हालांकि देश के कई हिस्सों में खास तौर पर उत्तर और मध्य भारत में अब भी बारिश का इंतजार किया जा रहा है.

भारत में यह कमजोर मॉनसून वाला साल है. दिल्ली पिछले पांच सप्ताह में 90% कम बारिश की गवाह रही है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश पंजाब, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों समेत भारत के बड़े हिस्से में अब भी मॉनसून का इंतजार है.

सामान्य तौर पर, जून और सितंबर के बीच होने वाली मॉनसूनी बारिश का 17% हिस्सा जून के महीने में बरस जाता है, लेकिन इस साल जून में 50% कम बारिश हुई. जाहिर है कि किसान चिंतित हैं और घाटा झेलने के लिए बाध्य हैं, भले कमजोर मॉनसून की आने वाले महीनों में भरपाई हो जाएगी.

भारत ने इस साल असामान्य रूप से गर्म और लंबे समय तक शुष्क मौसम देखा है, जिससे पूरा देश गर्मी की चपेट में है. पर्यावरण पत्रिका डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल 1 मार्च से शुरू होने वाले पहले 100 दिनों के अंदर देश ने 22 राज्यों में 70 हीटवेव देखे. अकेले बिहार में 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई और दक्षिणी राज्य जैसे तमिलनाडु से भी मौतों की खबर आई.



जारी है हीटवेव
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भारतीय मौसम विभाग के अनुसार पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हीटवेव की स्थिति जारी है, जहां सोमवार और मंगलवार को तापमान सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया. आईएमडी द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार देश के कई अन्य हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक है, जिसका मतलब है कि सामान्य से 3 से 5 डिग्री अधिक.

वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी हीटवेव से भारत जैसे देशों को चिंतित होना चाहिए जो आने वाले सालों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सबसे अधिक खामियाजा भुगतेंगे. साइंस एडवांस की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया में घनी आबादी वाले कृषि क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कहीं और की तुलना में अधिक गर्मी का सामना करना पड़ेगा.

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First published: July 7, 2019, 12:51 PM IST
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