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बेचैनी, धुंधला नजर आना, आंखें लाल, सिरदर्द, और भी बहुत कुछ… स्कूल खुलते ही बच्चों में दिखने लगीं ऑनलाइन पढ़ाई की तकलीफें

पूरे 2 साल बाद स्कूल खुले हैं और इसके साथ ही बच्चों में आंखों की समस्याएं भी दोगुनी सामने आने लगी हैं.

पूरे 2 साल बाद स्कूल खुले हैं और इसके साथ ही बच्चों में आंखों की समस्याएं भी दोगुनी सामने आने लगी हैं.

Impact of online study among-kids : एसआरसीसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल मुंबई की डॉक्टर नीपा दवे ठक्कर बताती हैं, ‘जिन बच्चों को पहले नजर की कोई दिक्कत नहीं, उनमें भी अब परेशानियां सामने आ रही हैं. हमारे पास आ रहे 20 में से 14 बच्चे आंखों की तकलीफ के साथ आ रहे हैं. अभी 6 महीने पहले तक यह संख्या 7 के करीब होती थी. लेकिन अब स्कूल खुलने के बाद बच्चों की यह शिकायत हमारे पास बेहद आम है कि उन्हें बोर्ड पर लिखा हुआ ठीक से दिखाई नहीं देता. इसलिए उन्हें चश्मा लगवाना पड़ रहा है. कई को तो बहुत तेज पावर वाला चश्मा लग रहा है.’

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(हिमानी चांदना )
नई दिल्ली. देश के अधिकांश राज्यों में नए शिक्षा सत्र के लिए स्कूल खुल चुके हैं. इसके साथ ही करीब पूरे 2 साल घरों में रहकर ऑनलाइन पढ़ाई (Online Education) करने वाले बच्चों में तरह-तरह की दिक्कतें भी दिखाई देने लगीं हैं. जैसे, उन्हें बेचैनी होना, धुंधला नजर आना, आंखें लाल हो जाना, सिरदर्द, ध्यान भटकना, याददाश्त कम होना आदि. माता-पिता, शिक्षक बच्चों में लगातार इस तरह की दिक्कतों की शिकायतें कर रहे हैं. यहां तक बच्चों को इलाज के चिकित्सकों के पास तक ले जाना पड़ रहा है.

इस बारे में न्यूज18 ने कुछ जगहों से अपनी पड़ताल की. चिकित्सकों से बातचीत की. इसमें सामने आया कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR), मुंबई, उदयपुर आदि में बीते 6 महीने के मुकाबले अब आंखों पर चश्मा चढ़ने के मामले दोगुने हो गए हैं. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवीण वशिष्ठ बताते हैं, ‘बच्चों में मायोपिया (Myopia) यानी निकटदृष्टि दोष (दूर की चीजें साफ नहीं दिखतीं) की समस्या बढ़ गई है. हमारे विभाग के अध्ययन के शुरुआती नतीजे बताते हैं कि कुछ समय पहले अगर 7% मामले आ रहे थे तो अब 13% आने लगे हैं. यानी लगभग दोगुने. खास तौर पर 5 से 15 साल के बच्चों में यह परेशानी दिख रही है.’

उनके मुताबिक, बीते 2 साल में बच्चों ने नजदीक से कंप्यूटर, फोन आदि पर आंखें गड़ाकर पढ़ाई की है. इसके साथ उन्हें बाहर खेलने या घूमने आदि के मौके भी बहुत कम मिले. इसी से यह समस्याएं दिख रही हैं. ऐसे में मामलों में अभी और बढ़त दिख सकती है. इसी तरह एसआरसीसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल मुंबई की डॉक्टर नीपा दवे ठक्कर बताती हैं, ‘जिन बच्चों को पहले नजर की कोई दिक्कत नहीं, उनमें भी अब परेशानियां सामने आ रही हैं. हमारे पास आ रहे 20 में से 14 बच्चे आंखों की तकलीफ के साथ आ रहे हैं. अभी 6 महीने पहले तक यह संख्या 7 के करीब होती थी. लेकिन अब स्कूल खुलने के बाद बच्चों की यह शिकायत हमारे पास बेहद आम है कि उन्हें बोर्ड पर लिखा हुआ ठीक से दिखाई नहीं देता. इसलिए उन्हें चश्मा लगवाना पड़ रहा है. कई को तो बहुत तेज पावर वाला चश्मा लग रहा है.’  

तकलीफों के ये 2 प्रमुख कारण बताए जाते हैं

Tags: Online education

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