OPINION: जरा हट के हैं नए लोक सभा स्पीकर ओम बिरला

19 जून को जब इस महत्वपूर्ण पद के लिए इनका नाम सामने आया तो सबने एक सुर से कहा कि आलाकमान ने इन्हें कहां से ढूंढ निकाला. सिर्फ दूसरी बार सांसद बने बिरला के लिए ये बहुत बड़ी चनौती थी.

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: July 29, 2019, 11:16 AM IST
OPINION: जरा हट के हैं नए लोक सभा स्पीकर ओम बिरला
ओम बिरला
अमिताभ सिन्हा
अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: July 29, 2019, 11:16 AM IST
पिछले हफ्ते ही लोक सभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने जब लोक सभा में कहा कि मौजूदा लोक सभा स्पीकर ओम बिरला को कामनवेल्थ देशों के सर्वश्रेष्ठ स्पीकर का अवार्ड मिल सकता है तो ये सत्ता पक्ष के लिए तारीफ बहुत बड़ा मेडल था. दरअसल हमेशा लोकसभा स्पीकर पर सत्ता पक्ष  के लिए पक्षपात करने का आरोप लगता आया है.  मुझे भी कम से कम पिछले 2 दशकों से ज्यादा  हो गए लोक सभा की कारवाई देखते हुए लेकिन इतने दिनों में मैंने भी नहीं देखा कि कभी पूरा सत्र बिना हंगामे के गुजर गया हो. और काम काज इतना हो रहा है कि सभी पुराने रिकॉर्ड टूटते जा रहे हैं. देर रात तक सदन चलता है और दोपहर का भोजन अवकाश भूल कर सांसद शून्य काल के काम कर रहे हैं. जब सदन चल रहा होता है तो ओम बिरला सांसदों को बात करने के लिए भी मना करते हैं. बिरला कहते हैं ये बातचीत  स्वीकार नहीं है. कम से कम स्पीकर ओम बिरला को इसका श्रेय जाता तो है ही.

सबसे अलग हैं स्पीकर
लोकसभा स्पीकर चुने जाने के बाद ओम बिराला ने निष्पक्षता के साथ अपने कर्तव्य के निर्वहन के लिए प्रतिबद्धता जताई थी. 19 जून को जब इस महत्वपूर्ण पद के लिए इनका नाम सामने आया तो सबने एक सुर से कहा कि आलाकमान ने इन्हें कहां से ढूंढ निकाला. सिर्फ दूसरी बार सांसद बने बिरला के लिए ये बहुत बड़ी चनौती थी. एक था खुद को साबित करना और दूसरा कई वर्षों से हंगामा और अव्यवस्था झेल रहे सदन को सुचारू रूप से चलाना भी था.  ओम बिरला पहले ही दिन से इस नई जिम्मेवारी पर खरे उतरे. उन्होंने पहले ही दिन से जता दिया था कि अब सदन की कार्रवाई स्थगित नहीं होगी. लिहाज अगर विपक्ष नारेबाजी पर भी उतारू होता है तो  सदन स्थगित नहीं होता है.

पीएम मोदी के साथ ओम बिरला


महिला सांसदों को मिला बोलने का मौका

सूत्रों के मुताबिक लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों से अपील की थी कि वे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा से लेकर लोकसभा में होने वाली तमाम बहस में जो नई महिला सांसद चुनकर आई हैं उनको बोलने का मौका दे. बिरला ने कहा है कि अगर कोई पार्टी पहली बार चुनकर आईं महिला सांसदों को लोकसभा में बोलने का मौका देती है तो स्पीकर की तरफ से उस पार्टी को आवंटित समय से ज्यादा वक्त अपनी बात रखने के लिए दिया जाएगा. 17वीं लोकसभा में महिला सांसदों की कुल संख्या 78 है. इनमें 46 महिला सांसद पहली बार चुनकर संसद पहुंचीं हैं. लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला इन महिला सांसदों को संसदीय परंपराओं से रूबरू कराने और उन्हें संसद की कार्यवाही में बढ़ चढ़कर शिरकत करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
तृणमूल के टिकट पर जीतकर लोकसभा पहुंची सांसद नुसरत जहां और मिमी चक्रवर्ती ने शपथ लेने के एक ही दिन बाद संसद में अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को उठाया था. मिमी चक्रवर्ती ने अपने निर्वाचन क्षेत्र जाधवपुर में जाम से निपटने के लिए एक फ्लाईओवर के निर्माण की मांग की, जबकि नुसरत जहां ने बशीरहाट में एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी की मांग की थी. पहली बार चुनकर आने वाली महिला सांसद में चंद्राणी मुर्मू मात्र 25 साल की उम्र में सांसद बनी हैं. केरल के अलातूर सीट से जीतने वाली राम्या हरिदास भी पहली बार सांसद बनीं हैं. उनको संसद के पहले ही सत्र में सदन में बोलने का मौका दिया जा रहा है. खास बात ये है कि स्पीकर ओम बिरला ने सभी पार्टियों के बीच आम राय बनाकर इस पहल की शुरुआत की है.
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ओम बिरला


बिरला के नए नियम

बात करने के लिए स्पीकर चेयर तक सांसद न आएं ये बात ओम बिड़ला ने साफ कर दी है. नए नियम के मुताबिक, कोई मंत्री या सांसद स्पीकर की कुर्सी के पास या पीछे मार्शल से बात करने नहीं आ सकता. यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि स्पीकर को किसी तरह की परेशानी न हो. किसी मंत्री या सांसद को अपनी बात स्पीकर तक पहुंचानी है तो वह लिखित में सदन में मौजूद हाउस स्टाफ के जरिए पहुंचा सकता है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह निर्देश जारी करने से पहले सभी पार्टियों की सहमति ली गई है.

कामकाज के सारे रिकॉर्ड टूटे
कुल मिलाकर 17वीं लोक सभा के पहले सत्र में हुए कामकाज ने पिछले 20 साल के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. ओवरटाइम काम कर के लोक सभा में 130% ज्यादा काम किया. अब तक 2 दर्जन नए बिल संसद में पेश हुए हैं जिसमें 19 लोक सभा और 3 राज्य सभा में है. खास बात ये की लगभग 10 बिल दोनों सदनों से पारित हो चुके हैं. प्रश्न काल के दौरान काम काज 99% तक हुआ है. और कई मौकों पर तो सभी starred प्रश्न भी पूरे हो गए. लोक सभा अध्यक्ष माननीय ओम बिरला की एक और नयी पहल थी गुरुवार यानी 18 जुलाई शून्य काल शाम को चलाना. शाम को चले शून्य काल में 4 घंटे 48 मिनट में 162 सदस्यों को मूल्य का मिला मौका. उसी दिन सुबह लोक सभा के प्रश्नकाल के दौरान तारांकित अंतिम प्रश्न तक लिया गया. सामान्य तौर पर प्रश्नकाल में आखिरी सवाल तक कभी भी चर्चा नहीं हो पाती थी. तीसरे या चौथे सवाल तक समय पूरा हो जाता था. उस दिन सूचीबद्ध 20 प्रश्नों के बाद एक और प्रश्न का मंत्री ने जवाब दिया. इसलिए स्पीकर ओम बिरला ने  अंतिम प्रश्न लेते हुए मंत्रियों को भी चेताया कि वो इसके लिए आगे से तैयार रहें. ऐसे में पहली बार चुनकर आये सांसदों को भी प्रश्न पूछने का मौका मिल रहा है और अलग-अलग चर्चाओं में भाग लेने और बोलने का मौका भी.
2 मौकों पर तो लोक सभा आधी रात तक बैठी जिसमे खुद स्पीकर पूरे समय बैठे रहे. जिसमें एक जून 17 को कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय की अनुदान मांगों पर रात 11.59 तक और दूसरी बार जुलाई 11 को रात 11.58 तक रेल मंत्रालय के अनुदान मांगों पर चर्चा हुई थी.

कानून बदलने होंगे!
बिरला ने 25 जुलाई को सदन में कहा कि सभी माननीय सदस्यगणों और सारे लोक सभा के सदस्यों से अनुरोध है की हमें ऐसे पुराने एक्टों पर पुनर्विचार करना चाहिए. सदन को कोशिश / प्रयास करना चाहिए की ब्रिटिश ज़माने के कानूनों की जगह हमारी संसद को नया कानून बनाना चाहिए. यही नहीं ओम बिरला ने ब्रिटिश जमाने से अब तक चली आ रही परंपरा से अलग हट के हिंदी बोल चाल का इस्तेमाल शुरू किया वो भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो ही जायेगा. पहली बार स्पीकर की जुबान से सुनना की  आसन अपने पैरों पर खड़ा है, बिल के पक्ष में हैं या ना कहने को. बोलना पूरे सदन के लिए अनूठा ही तो है. मोदी सरकार ने आते ही हिंदी में प्रचार और प्रसार को बढ़ावा दिया लेकिन ओम बिरला की हिंदी ने तो संसद की कई परंपराओं को तोड़ कर एक नई शुरुआत की है.

तय है कि स्पीकर ओम बिरला अपनी पहचान बनाने में लगे हैं और विपक्ष के साथ साथ सत्ता पक्ष के सांसदों को समझ में आ गया है कि फिलहाल अनुशाशन में चले तो ही बेहतर.

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First published: July 29, 2019, 11:16 AM IST
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