दोतरफा जंग के हालात का सामना कर रहा भारत, 8 महीने में पाकिस्तान ने 3186 बार तोड़ा सीजफायर

दोतरफा जंग के हालात का सामना कर रहा भारत, 8 महीने में पाकिस्तान ने 3186 बार तोड़ा सीजफायर
एक जनवरी से सात सितंबर के बीच जम्मू क्षेत्र में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के नजदीक सीजफायर उल्लंघन की कुल 3186 घटनाएं हुई.

India-China Standoff: चीन के साथ जारी तनाव के बीच सरकार ने कहा कि पिछले आठ महीनों में जम्मू क्षेत्र (Jammu-Kashmir) में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के नजदीक पाकिस्तान (Pakistan) की ओर से सीजफायर उल्लंघन (Ceasefire Violations) की कुल 3186 घटनाएं हुईं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 15, 2020, 10:29 AM IST
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नई दिल्ली. चीन पूर्वी लद्दाख (Ladakh Border Dispute) में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चालबाजियां करने से बाज नहीं आ रहा. ताजा जानकारी के मुताबिक, पैंगोंग त्सो झील के पास वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन अब ऑप्टिकल फाइबर केबल (Fiber-optic cable) बिछा रहा है, जबकि दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव कम करने के लिए उच्च स्तरीय बातचीत हो रही है. इसी के साथ ही भारत को दोतरफा युद्ध जैसे हालात का सामना करना पड़ रहा है. एक तरफ चीन है और दूसरी और उसका दोस्त पाकिस्तान.

चीन के साथ जारी तनाव के बीच सरकार ने कहा कि पिछले आठ महीनों में जम्मू क्षेत्र में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के नजदीक पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन (Ceasefire Violations) की कुल 3186 घटनाएं हुईं. रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में ये जानकारी दी. नाइक ने बताया कि एक जनवरी से 31 अगस्त के बीच जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास सीमापार से गोलीबारी की 242 घटनाएं हुई हैं.

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मंत्री ने कहा कि एक जनवरी से सात सितंबर के बीच जम्मू क्षेत्र में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के नजदीक सीजफायर उल्लंघन की कुल 3186 घटनाएं हुईं. उन्होंने कहा कि इस साल सात सितंबर तक जम्मू-कश्मीर में सेना के आठ जवान मारे गए और दो अन्य घायल हो गए.
पैंगोंग त्सो लेक के पास जटिल है स्थिति
उधर, समाचार एजेंसी 'रॉयटर्स' के मुताबिक, सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चीन की ओर से लगाए जा रहे इस तरह के केबल लद्दाख के पैंगोंग त्सो लेक के दक्षिणी हिस्से में नजर आए हैं. ये केबल अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैन्य टुकड़ियों को पीछे स्थित अपने बेस से सुरक्षित संचार सुनिश्चित करते हैं. समाचार एजेंसी का कहना है कि इस मामले में चीन के विदेश मंत्रालय से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उसकी तरफ से तत्काल कोई जवाब नहीं मिल सका.

बता दें कि झील के दक्षिणी हिस्से के 70 किलोमीटर लंबे फैलाव में हजारों की संख्या में भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं. अग्रिम मोर्चे पर तैनात इन सैनिकों की मदद के लिए पीछे सैन्य ठिकानों पर बड़ी संख्या में टैंक और लड़ाकू विमान तैनात हैं.

भारतीय एजेंसियां अलर्ट पर
अधिकारी ने कहा, 'हमारी सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि उन्होंने हाई स्पीड संचार कायम करने के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई है. वे झील के दक्षिणी हिस्से में केबल बिछाने का काम तेजी से कर रहे हैं.' एक दूसरे अधिकारी के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों ने पाया है कि एक महीने पहले पीएलए ने झील के उत्तरी इलाके में भी इसी तरह की केबल बिछाई. सैटेलाइट तस्वीरों में पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी हिस्से की रेत वाली जगहों पर असामान्य लाइनें नजर आई हैं, इसके बाद इस गतिविधि के बारे में संबंधित अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज संसद में देंगे बयान
भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर गतिरोध पर मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लोकसभा में बयान देंगे. राजनाथ सिंह दोपहर तीन बजे संसद को बताएंगे कि आखिरकार एलएसी पर वर्तमान हालात क्या हैं. विपक्षी दल चीन को लेकर लगातार केंद्र सरकार को निशाना बनाते रहे हैं. सरकार से बार-बार एलएसी की वास्तविक स्थिति बताने की मांग की जा रही है.

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बहरहाल, चीनी सेना द्वारा हालिया घुसपैठ की कोशिशों के साथ पाकिस्तान सेना द्वारा किए गए रिकॉर्ड सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं ने भारत के लिए दो-मोर्चे के युद्ध का खतरे को और बड़ा कर दिया है. चीन और उसके दोस्त पाकिस्तान के बीच भारत की सीमा में घुसपैठ को लेकर साठगांठ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि बीजिंग ने इस्लामाबाद का कई मुद्दों पर बचाव किया है. हाल ही में चीन ने आतंकवाद से लड़ने में पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय मंच पर बचाव किया था.
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