जस्टिस सीकरी को मैं जानता हूं, वह किसी से प्रभावित नहीं होते- मार्कंडेय काटजू

काटजू ने लिखा कि मै जस्टिस काटजू को बहुत अच्छी तरह से जानता हूं. जब मैं दिल्ली हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस था तब वो मेरे साथ जज थे. अगर उनके पास कोई ठोस आधार नहीं होता तो उन्होंने आलोक वर्मा को हटाने का फैसला नहीं लिया होता.

News18Hindi
Updated: January 11, 2019, 12:13 PM IST
जस्टिस सीकरी को मैं जानता हूं, वह किसी से प्रभावित नहीं होते- मार्कंडेय काटजू
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू
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Updated: January 11, 2019, 12:13 PM IST
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा है जिसमें उन्होंने विस्तार से बताया है कि जस्टिस सीकरी ने आलोक वर्मा को सीबाआई के डायरेक्टर के पद से क्यों हटाया. वह लिखते हैं कि जब कमेटी ने आलोक वर्मा को हटा दिया तो मेरे रिश्तेदारों और दोस्तों के फोन मेरे पास आने लगे उनका पूछना था कि क्या सीकरी द्वारा आलोक वर्मा को सीबीआई के निदेशक पद से हटाए जाने का फैसला सही था? इस पर काटजू ने लिखा कि मै जस्टिस काटजू को बहुत अच्छी तरह से जानता हूं. जब मैं दिल्ली हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस था तब वो मेरे साथ जज थे. अगर उनके पास कोई ठोस आधार नहीं होता तो उन्होंने आलोक वर्मा को हटाने का फैसला नहीं लिया होता. वो लिखते हैं कि मैं उन्हें व्यक्तिगत तौर पर जानता हू. उन्हें कोई भी प्रभावित नहीं कर सकता.

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अगले दिन काटजू ने फिर से एक पोस्ट लिखा जिसमें वो कहते हैं कि लोगों ने कमेंट करके पूछा कि अगर जस्टिस सीकरी सही हैं तो उन्होंने आलोक वर्मा को अपना पक्ष रखने का मौका क्यों नहीं दिया. काटजू लिखते हैं कि इस पर मैंने सीकरी को फोन किया और सारी जानकारी ली. सीकरी ने जो जानकारी काटजू को दी उसे उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है-

>>सीवीसी के सामने जो तथ्य आए थे उसके आधार पर उसने आलोक वर्मा के ऊपर पहले ही गंभीर आरोप लगाए थे.

>>सीवीसी ने उन्हे अपना पक्ष रखने का मौका दिया था.

>>सीवीसी द्वारा उन्हें दोषी पाए जाने के बाद सीकरी का विचार था कि आलोक वर्मा को सीबीआई के निदेशक जैसे महत्तवपूर्ण पद पर नहीं होना चाहिए था. उनका मानना था कि जब तक उनका दोष सिद्ध नहीं हो जाता या वो निर्दोष करार नहीं दे दिए जाते तब तक उन्हें इस पद पर नहीं होना चाहिए.
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>>न ही आलोक वर्मा को उनके पद से हटाया गया है और न ही उन्हे निलंबित किया गया है बल्कि उन्हें उसी रैंक के किसी दूसरे पद पर स्थानांतरित कर दिया गया है.

>>जहां तक सुनवाई न करने की बात है तो बिना किसी सुनवाई के पद से नहीं हटाया जा सकता लेकिन निलंबित किया जा सकता है.

>>आलोक वर्मा को तो निलंबित भी नहीं किया गया है उनका सिर्फ ट्रांसफर किया गया है.

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