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कश्मीर दौरे पर यूरोपीय सांसदों का डेलीगेशन, सेना-सरंपचों से की मुलाकात, शिकारे में की सैर

News18Hindi
Updated: October 30, 2019, 11:31 AM IST
कश्मीर दौरे पर यूरोपीय सांसदों का डेलीगेशन, सेना-सरंपचों से की मुलाकात, शिकारे में की सैर
श्रीनगर पहुंचे ईयू के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को कड़ी सुरक्षा के बीच डल झील में शिकारे की सवारी की.

यूरोपीय संघ (EU) के 27 सांसद भारत आए हैं. इनमें से सिर्फ 23 ही कश्मीर दौरे पर निकले. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद ये सभी पदाधिकारी निजी ​स्तर पर राज्य के हालात देखने के लिए पहुंचे हैं.

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  • Last Updated: October 30, 2019, 11:31 AM IST
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(आकाश हसन)

श्रीनगर. 30 कारों का काफिला, श्रीनगर (Srinagar) का एक पांच सितारा होटल, एक के बाद एक कर कारों से निकलते लोग, कुछ ने अपना चेहरा ढका तो कुछ तेजी से होटल के अंदर चले गए. ये वो लोग थे जो यूरोपियन यूनियन (European Union) के 23 सांसदों से मिलने मंगलवार को पहुंचे थे. इनमें से ज्यादातर लोग सरपंच, पंच और स्‍थानीय प्रधान थे.

कश्मीर (Kashmir) का हाल जानने पहुंचे ईयू के सांसदों से मिलने के लिए स्‍थानीय जनप्रतिनिधि मीडिया से बचते नजर आए. इस बैठक के कुछ ही देर बाद होटल के बाहर एक कार निकली और उसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्‍थानीय प्रवक्ता (Spokesman) अल्ताफ ठाकुर और उनके सहयोगी मनजूर भट्ट सवार थे. लोगों ने उन्हें घेर लिया और जब अंदर हुई बातचीत के बारे में उनसे पूछा गया, तो वे काफी सहज दिखे. उन्होंने कहा सभी कुछ ठीक रहा. हमने लिखित में ईयू के प्रतिनिधियों को बताया कि कश्मीर में शांति है और लोग शांत और विकास चाहते हैं.

अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि प्रतिनिधियों ने भी माना कि कश्मीर में शांति हैं और लोग यहां पर विकास चाहते हैं. हालांकि सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों ने बताया कि इस दौरान ईयू के प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे. और जैसे ही टीवी चैनल्स पर अल्ताफ ठाकुर का बयान चला कहानी बिल्कुल बदल गई.

मेरा तो नाम ही नहीं था लिस्ट में
इसके कुछ ही देर बाद पत्रकारों से ऑफ रिकॉर्ड बातचीत के दौरान अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि प्रतिनिधियों से मिलने वाले लोगों की सूची में उनका नाम ही नहीं था. ऐसे में उनसे वे मिल ही नहीं सकते थे. ठाकुर ने बयान बदलते हुए कहा कि ईयू प्रतिनिधियों से उनकी कोई मुलाकात नहीं हुई.

विपक्ष ने सरकार को घेरा
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इस मसले के तुरंत बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल खड़े कर दिए. विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि प्रतिनिधियों को हकीकत नहीं बताई जा रही है कि किस तरीके से कश्मीर में 80 दिनों तक तलाबंदी की स्थिति रही.

चार सांसद अपने देश लौटे
श्रीनगर के दौरे पर आए ईयू के इस दल में मुख्य रूप से 27 सांसद थे. इनमें से ज्यादातर धुर दक्षिणपंथी या दक्षिणपंथी दलों से हैं. लेकिन उनमें से चार कश्मीर के दौरे पर नहीं गए हैं और बताया जाता है कि वे अपने-अपने देश लौट गए.

यूरोपीय यूनियन के सांसदों ने पीएम से की मुलाकात
यूरोपीय संसद के सदस्यों ने सोमवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी, जिस दौरान उन्होंने आशा जताई कि जम्मू कश्मीर सहित देश के विभिन्न हिस्सों की उनकी यात्रा सार्थक होगी. जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के ज्यादातर प्रावधानों को भारत सरकार द्वारा समाप्त किये जाने के दो महीने बाद डेविस को भारतीय अधिकारियों ने जम्मू कश्मीर का दौरा करने का कथित न्यौता दिया था. हालांकि, डेविस का दावा है कि बहुत संक्षिप्त स्पष्टीकरण के साथ न्यौता वापस ले लिया गया, क्योंकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि उन्हें स्थानीय लोगों से बात करने की छूट मिले. उनके साथ पुलिस या सुरक्षा बल नहीं हो और बगैर पूछताछ किये पत्रकारों को बुलाया जाए.

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First published: October 30, 2019, 9:44 AM IST
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