मेडिकल कार्ड नहीं बनने से खफा हो जान देने टंकी पर चढ़ गई पूर्व सैनिक की विधवा

राष्ट्रपति कोविंद के गांव की महिला का नहीं बना स्वास्थ्य कार्ड, जान देने टंकी पर चढ़ी.

राष्ट्रपति कोविंद के गांव की महिला का नहीं बना स्वास्थ्य कार्ड, जान देने टंकी पर चढ़ी.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के गांव परौख में की रहने वाली सैनिक की विधवा ने उत्तर प्रदेश इटावा में पानी की टंकी पर चढ़ कर जान देने की कोशिश की. महिला को टंकी पर तैनात आपरेटर की सूझबूझ बचा लिया गया.

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इटावा. देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) के गांव परौख में की रहने वाली सैनिक की विधवा ने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) इटावा में पानी की टंकी (water tank) पर चढ़ कर जान देने की कोशिश की. महिला को टंकी पर तैनात आपरेटर की सूझबूझ बचा लिया गया. महिला स्कूटी से वहां पहुंची और सीधे टंकी पर चढ़ गई थी. वह कई बीमारियों से ग्रसित है और मेडिकल कार्ड नहीं बनने को लेकर नाराज थी. उसने राष्ट्रपति को भी अपनी बहन की मदद करने का संदेश दिया है.

इटावा के पुलिस उपाधीक्षक राजीव प्रताप सिंह ने बताया कि महिला के पानी के टंकी पर चढ़े होने की सूचना मिलने पर वह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे. पीडि़त महिला को फिलहाल उसके घर भेज दिया गया है, लेकिन उसकी समस्या खत्म करने के लिए हर संभव मदद की जायेगी. महिला की जान बनाने के लिए पानी की टंकी पर तैनात ऑपरेटर रजनीश कुमार की सजगता की तारीफ की जा रही है.  रजनीश ने जैसे ही देखा कि एक महिला स्कूटी से आई और पानी की टंकी के पिछले हिस्से में चली गई. पहले उसने समझा शायद महिला पानी पीने आई है, लेकिन बाद में महिला टंकी पर चढ़ी दिखाई दी. उसने उससें बातचीत कर नीचे उतरने के लिए तैयार कर लिया. पानी की टंकी के ऑपरेटर ने पुलिस प्रशासन को इसकी सूचना दी, जिस पर पुलिस दल ने मौके पर पहुंचकर के महिला से बातचीत की और उसे उसके घर भिजवाया.

मेडिकल कार्ड नहीं बनने से परेशान है महिला

सैनिक की विधवा के पानी के टंकी पर चढऩे की यह घटना दोपहर 4 बजे की है. महिला माया देवी के पति रामस्वरूप दोहरे के पति सेना में थे. 1971 के युद्ध में मेडिकली अनफिट होने के बाद सेना से बाहर कर दिया गया. 1996 में महिला के पति की मौत हो गई.  महिला मायादेवी कई तरह की बीमारियों से ग्रसित है, लेकिन उसका स्वास्थ्य कार्ड नहीं बन पा रहा है, जिस कारण परेशान महिला ने जान देने की कोशिश की.
राष्ट्रपति से भी लगाई है गुहार

पीडि़त महिला बताती है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और वो एक ही गांव के हैं. उसकी समस्या का अगर निपटारा नहीं होने पर उसने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है. महिला को उम्मीद है कि राष्ट्रपति अपनी बहन की मदद जरूर करेंगे.  पीडित महिला अपने साथ एक बैग मे ढेर सारे दस्तावेज भी लिये हुए थी. जिसको दिखा कर उसने अपनी वेदना पुलिस अधिकारियों के समक्ष बयान की. महिला के पानी की टंकी पर चढने की खबर मिलने के बाद बडी तादात मे आसपास के लोग भी मौके पर पहुच गये थे.
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