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हाईकोर्ट से मिली महिला को राहत, अब लड़ सकेंगी बंबई पारसी पंचायत चुनाव

पंचायत न्यासियों ने इस आधार पर होमावजीर का नामांकन पत्र खारिज कर दिया था

पंचायत न्यासियों ने इस आधार पर होमावजीर का नामांकन पत्र खारिज कर दिया था

Bombay high Court: न्यायमूर्ति एस जे काठवाला और न्यायमूर्ति विनय जोशी ने उच्च न्यायालय की एकल पीठ के आदेश को निरस्त कर दिया और जुलैका होमावजीर को इस साल 14 मार्च को होने वाले चुनाव में खड़ा होने की अनुमति दे दी.

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मुंबई. बंबई उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने शहर की एक पारसी महिला को आगामी बंबई पारसी पंचायत चुनाव में खड़ा होने की शुक्रवार को इजाजत दे दी. समुदाय के पंचायत चुनाव में महिला को चुनाव में हिस्सा लेने से इस आधार पर रोका गया था कि जिस व्यक्ति ने उनके नाम का प्रस्ताव दिया वह पारसी नहीं थे.

न्यायमूर्ति एस जे काठवाला और न्यायमूर्ति विनय जोशी ने उच्च न्यायालय की एकल पीठ के आदेश को निरस्त कर दिया और जुलैका होमावजीर को इस साल 14 मार्च को होने वाले चुनाव में खड़ा होने की अनुमति दे दी. पंचायत न्यासियों ने इस आधार पर होमावजीर का नामांकन पत्र खारिज कर दिया था कि उनके प्रस्तावक रूस्तम जीजीभाय ने पारसी धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया.

बंबई पारसी पंचायत के संस्थापक सदस्यों में थे
उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने न्यासियों के फैसले को बरकरार रखा था जिसके बाद होमावजीर ने न्यायमूर्ति काठवाला की पीठ के सामने अपील दायर की. अपनी याचिका में महिला ने कहा कि जीजीभाय नामी समाज सेवी और बंबई पारसी पंचायत के संस्थापक सदस्यों में थे. महिला ने कहा कि जीजीभाय पारसी थे और पंचायत की पंजी और मतदाता सूची में अब भी उनका नाम है.



होमावजीर ने अपनी याचिका में कहा कि जीजीभाय के ईसाई धर्म अपना लेने के बारे में सोशल मीडिया पर अफवाह फैलायी गयी थी. खंड पीठ ने दलीलों का संज्ञान लिया और कहा कि एकल पीठ ने होमावजीर को राहत नहीं देकर चूक की.
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