लाइव टीवी

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड- नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिद में जा सकती हैं महिलाएं, फतवों पर न दें ध्यान

News18Hindi
Updated: January 29, 2020, 10:28 PM IST
सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड- नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिद में जा सकती हैं महिलाएं, फतवों पर न दें ध्यान
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी कि महिलाएं अब मस्जिद में नमाज पढ़ सकती हैं.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board) ने दो मुस्लिम महिलाओं द्वारा मस्जिद में नमाज़ पढ़ने की अनुमति देने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दाखिल की गई एक याचिका के जवाब में ये जानकारी दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2020, 10:28 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ ( All India Muslim Personal Law Board) बोर्ड ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में कहा कि महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति दे दी गई है और इसके संबंध में यदि कोई फतवा जारी करता है तो उसपर ध्यान न दें.

बोर्ड ने शीर्ष अदालत में दाखिल किए गए एक हलफनामे में कहा कि मुस्लिम महिलाएं मस्जिद में जाने के लिए स्वतंत्र हैं, हालांकि वह ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं नहीं हैं. महिलाओं के पास ये भी विकल्प है कि वह घर पर नमाज़ पढ़ सकती हैं बजाय इसके कि वह किसी समूह या मस्जिद में नमाज पढ़ें.

दो महिलाओं इस संबंध में दायर की थी याचिका
एआईएमपीएलबी ने दो मुस्लिम महिलाओं द्वारा मस्जिद में नमाज़ पढ़ने की अनुमति देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई एक याचिका के जवाब में ये जानकारी दी.

मामले में अदालत के हस्तक्षेप का विरोध करते हुए, एआईएमपीएलबी ने कहा कि मस्जिदों का प्रबंधन निजी तौर पर किया जाता है और अदालतें किसी धार्मिक स्थान की विस्तृत व्यवस्था के क्षेत्र में नहीं जा सकतीं.

इसमें आगे कहा गया कि अदालत सिर्फ सलाह दे सकती है किसी तरह के दिशानिर्देश नहीं जारी कर सकती.

कोर्ट ने जारी किया था नोटिसपिछले साल अक्टूबर में, अदालत ने यासमीन जुबेर अहमद पीरजादे और जुबेर अहमद नजीर पीरजादे की याचिका पर नोटिस जारी किया था, जिन्होंने कहा था कि देश भर की मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध असंवैधानिक है और जीवन, समानता और लैंगिक न्याय के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है.

 

इस याचिका में सरकार से मुस्लिम महिलाओं को नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों में प्रवेश की अनुमति देने के लिए सरकारी अधिकारियों और मुस्लिम निकायों को निर्देश देने की मांग की गई थी. इसमें यह भी कहा गया था कि मस्जिदों में जहां महिलाओं को जाने की अनुमति है, वहां अलग प्रवेश, निकास या एक अलग प्रार्थना क्षेत्र जैसा कोई अलगाव नहीं होना चाहिए.

हलफनामे में कही गई ये बातें
बोर्ड ने कहा कि वह इसे लेकर किसी विपरीत धार्मिक राय पर टिप्पणी नहीं करना चाहता. हलफनामे में कहा गया है कि इस्लाम में महिलाओं के लिए समूह में प्रार्थना में शामिल होने को अनिवार्य नहीं बनाया गया है और न ही महिलाओं के लिए यह अनिवार्य है कि वह शुक्रवार को समूह में नमाज पढ़ें, हालांकि मुस्लिम पुरुषों के लिए ऐसा है. मुस्लिम महिला को अलग तरीके से रखा जाता है क्योंकि इस्लाम के सिद्धांतों के अनुसार, वह मस्जिद या घर पर अपने विकल्प के अनुसार प्रार्थना करने के लिए समान धार्मिक इनाम की हकदार है.

ये भी पढ़ें-
राहुल करेंगे संविधान बचाओ मार्च का नेतृत्व,कांग्रेस नेता बनाएंगे देश का नक्शा

अपने फायदे और गांधीजी का नाम भुनाने के लिए कई लोग गोडसे का नाम लेते हैं: वैद्य

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 29, 2020, 9:44 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर