सबरीमाला में एंट्री के लिए लाखों महिलाएं बनाएंगी 620 ​किलोमीटर लंबी 'महिला दीवार'

सबरीमाला में एंट्री के लिए लाखों महिलाएं बनाएंगी 620 ​किलोमीटर लंबी 'महिला दीवार'
प्रतीकात्मक तस्वीर

शाम चार से लेकर सवा चार बजे तक इस दीवार का निर्माण किया जाएगा. उसमें हिस्सा लेने वाली महिलाएं लैंगिक समानता और नवजागरण के मूल्यों को बनाए रखने का संकल्प लेंगी.

  • News18.com
  • Last Updated: January 1, 2019, 10:14 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला के अयप्पा मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की इजाजत तो दे दी थी, लेकिन केरल सरकार के अथक प्रयासों के बावजूद अब तक कोई महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई. लोगों के विरोध प्रदर्शन के खिलाफ मंगलवार को केरल की लाखों महिलाएं लगभग 620 किलोमीटर 'महिला दीवार या श्रृंखला' बना सकती हैं.

महिलाएं उत्तरी केरल के कसोरगोड से लेकर दक्षिणी छोर तिरुवनंतपुरम जिले तक दीवार बनाएंगी. कसोरगोड में स्वास्थ्य मंत्री केके श्यालजा इस श्रृंखला की अगुवाई करेंगे जबकि तिरुवनंतपुरम में श्रृंखला के आखिर में माकपा नेता वृंदा कारत होंगी. इस प्रस्तावित दीवार की सफलता सुनिश्चित करने के लिए वार्ड स्तर से लेकर जिला और निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर बैठकें की गई हैं.

उसमें हिस्सा लेने वाले शाम तीन बजे निर्धारित स्थानों पर पहुंचेंगी जहां अभ्यास किया जाएगा. शाम चार से लेकर सवा चार बजे तक इस दीवार का निर्माण किया जाएगा. उसमें हिस्सा लेने वाली महिलाएं लैंगिक समानता और नवजागरण के मूल्यों को बनाए रखने का संकल्प लेंगी.



हिंसक प्रदर्शनों के बावजूद सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर रहीं महिलाएं!
इसपर मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने कहा था, 'सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के विरुद्ध सांप्रदायिक ताकतों के प्रदर्शन ने सरकार और अन्य प्रगतिशील संगठनों को राज्य में महिलाओं की दीवार बनाने के लिए प्रेरित किया.' विजयन ने कहा, सभी महिलाएं जातियों और धर्म से हटकर 'मानव श्रृंखला' में शामिल हो जाएंगी.'

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने इस पहल को 'विरोधाभास की दीवार' बताया है. यूडीएफ विधायक एमके मुनीर ने इसे हिंदू संगठनों को लुभाने के लिए एक 'सांप्रदायिक' दीवार करार दिया है.

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यह आयोजन सत्तारूढ़ सीपीआई (एम) द्वारा आयोजित किया जा रहा है. इसमें सीपीआई, श्री नारायण धर्म परिपलाना योगम (एसएनडीपी) और केरल पुलयार महासभा (केपीएमएस) के साथ ही लगभग 176 से अधिक अन्य सामाजिक-राजनीतिक संगठन हैं. एक प्रमुख जाति आधारित संगठन नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस), आरएसएस और दक्षिणपंथी समूहों इस कदम का विरोध किया है.
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