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सीमा पर तैनात की गईं महिलाएं तो साथी जवानों पर लगाएंगी ताक-झांक के आरोप: सेना प्रमुख बिपिन रावत

News18.com
Updated: December 15, 2018, 1:40 PM IST

जनरल रावत ने कहा कि एक वक्त वह युद्ध की भूमिका में महिलाओं को भेजने की पेशकश पर तैयार थे, लेकिन फिर लगा कि ज्यादातर जवान ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं और वह महिला अधिकारियों के ऑडर स्वीकार करने में अहसज महसूस कर सकते हैं.

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  • Last Updated: December 15, 2018, 1:40 PM IST
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(श्रेया ढौंडियाल)

सेना प्रमुख बिपिन रावत का कहना है कि महिलाएं अभी सीमा पर जंग के लिए भेजे जाने के लिए तैयार नहीं हैं. इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि उन पर बच्चों की जिम्मेदारी होती है और वह फ्रंटलाइन में कपड़े जेंच करने में असहज महसूस करेंगी. वह हमेशा साथी जवानों पर ताक-झांक का आरोप लगाएंगी.

जनरल रावत ने न्यूज 18 के साथ विशेष बातचीत में कहा कि एक वक्त वह युद्ध की भूमिका में महिलाओं को भेजने की पेशकश पर तैयार थे, लेकिन फिर लगा कि ज्यादातर जवान ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं और वह महिला अधिकारियों के ऑडर स्वीकार करने में अहसज महसूस कर सकते हैं.

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सेना प्रमुख ने मातृत्व अवकाश के मुद्दे पर कहा कि सेना कमांडिंग आॅफिसर को इतनी लंबी छुट्टी नहीं दे सकती, क्योंकि वह छह महीने तक अपनी इकाई नहीं छोड़ सकती है. उसकी छुट्टी पर विवाद खड़ा हो सकता है.

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सेना प्रमुख बिपिन रावत से बातचीत के प्रमुख अंश
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सवाल: महिलाएं बहुत काबिल जवान बनती हैं, लेकिन सेना उन्हें स्वीकार क्यों नहीं कर रही है?
जवाब: यह मिथ्या है.

सवाल: महिलाओं की सेना के जवानों में गिनती नहीं होती है, क्या कोई महिला कॉम्बैट रोल में है?
जवाब: हमारे पास इंजीनियर के तौर पर महिला अधिकारी हैं. वे खनन और कागजी कार्रवाई का काम कर रही हैं. वायु रक्षा में वे सेना के हथियार प्रणालियों का प्रबंधन कर रही हैं. हमने महिलाओं को फ्रंटलाइन में नहीं रखा है, क्योंकि अभी हम कश्मीर में प्रॉक्सी वॉर में व्यस्त हैं.

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी बटालियन की अधिकारी महिला है. मान लीजिए आपको एक आॅपरेशन के लिए जाना है. कंपनी कमांडर का नेतृत्व करना है. आॅपरेशन में आपको आतंकियों से निपटना होगा. वहां मुठभेड़ होगी और इस दौरान कमांडिंग अधिकारी मर जाता है. महिला अधिकारी के साथ भी ऐसी दुर्घटना हो सकती है. उसकी मौत भी हो सकती है.

सवाल: हर कोई उस जोखिम को समझता है, लेकिन महिलाएं अब खुद से भी जाना चाहती हैं
जवाब: वे जा रही हैं. मैं आपको एक उदाहरण देता हूं. एक महिला 7-8 साल से सेना में नौकरी कर रही थी. एक घटना में उसकी मौत हो गई. उसका 2 साल का एक बच्चा है. उसके माता पिता दिल्ली या चंडीगढ़ में बच्चे की देखभाल कर रहे हैं. मैं आपको वही बताना चाहता हूं. क्या आपको लगता है कि हम इसके लिए तैयार हैं?

सवाल: महिलाएं लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं, लेकिन बख्तरबंद टैंक नहीं?
जवाब: देखिए, मैं यह नही कह रहा कि किसी महिला के बच्चे हैं तो वे मरेंगी नहीं. वह सड़क दुर्घटना में भी मर सकती हैं, लेकिन युद्ध के मैदान से जब जवानों का शव ताबूत में वापस आता है, तो हमारा देश इसे देखने के लिए तैयार नहीं रहता.

दूसरा, तब क्या होगा जब जवानों के बीच में एक महिला होगी. उसे सभी जवानों के सामने ही आराम और सबकुछ करना होगा. उसे आॅपरेशन के लिए भी जाना होगा, लेकिन आज भी हमारे पास इसकी स्वीकृति नहीं है. ज्यादातर जवान ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, उन्हें एक महिला कमांडिंग ऑफिसर को स्वीकार करने में थोड़ा समय लगेगा.

मैं आपको एक बात बताता हूं, हमनें पश्चिमी तरीकों को अपनाने की कोशिश की. मैंने अमेरिका में एक कोर्स किया. उस वक्त हमारे पास 4 महिलाएं और 10 पुरुष अधिकारी थे. उस दौरान हर 3-4 घंटों में आपको एक घंटे का ब्रेक मिलता, जिसमें आप दोपहर का खाना या जिम जा सकते. हम जब जिम या क्लासरूम में होते तो सभी के सामने कपड़े बदल लेते थे.

सवाल: यह सिर्फ लॉजिस्टिक है
जवाब: जब मैं नया था तो इसे दूसरी तरह से देखता था, क्योंकि महिलाएं भी वहां थीं, यह वहां की संस्कृति है. वे इसे इसी तरीके से देखते हैं. हमें इस प्रणाली को अपनाने की जरूरत है. तब क्या होगा जब यहां पर अकेली महिला अधिकारी होगी. हमारा आदेश है कि महिला अधिकारी के लिए अलग जगह चाहिए होगी. फिर उसे अलग से खाना पकाना होगा. फिर वे कहेंगी कि कोई ताक झांक कर रहा है. इसलिए उसे चारों तरफ से पर्दा चाहिए होगा.

सवाल: क्या आप कह रहे हैं कि सेना महिला अधिकारियों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है?
जवाब: देखिए मैं तैयार हूं. ऐसा नहीं है कि सेना तैयार नहीं है. आपको जो जवाब मिला है क्या आप उसके बाद भी आदेश देंगी?

सवाल: क्यों नहीं?
जवाब: ठीक है, तो अब मैं उन्हें कमांडिंग आॅफिसर बना देता हूं. वह एक बटालियन का नेतृत्व करेंगी. क्या वह महिला अधिकारी 6 महीने तक अपने कर्तव्यों से दूर हो सकती है?

सवाल: नहीं
जवाब: तो क्या होगा? क्या मैं उन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दूंगा कि उसे गर्भावस्था के दौरान छुट्टी नहीं दी जाएगी. अगर मैं ऐसा कहूंगा तो बवाल खड़ा हो जाएगा.

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First published: December 15, 2018, 10:02 AM IST
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