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विश्‍व पर्यावरण दिवस: प्रकृति को समझना है तो पहले रिश्‍ता बना के देखो...

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प्रकृति को महसूस करने और उसमें आ रहे बदलावों को देखने के लिए हम सभी को प्रकृति के करीब जाना होगा. यही वजह है कि संयुक्‍त राष्‍ट्र ने पर्यावरण दिवस 2017 के लिए ‘कनेक्टिंग पीपल टू नेचर’ थीम रखी है.

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प्रकृति को जानना है तो उसके नजदीक जाना होगा. यानी बिना प्र​कृति और पर्यावरण को समझे हम न तो उसे संरक्षित कर सकते हैं और न ही इसके लिए कोई कोशिश कर सकते हैं. प्रकृति से इतना नजदीकी रिश्ता कायम करने के लिए ही संयुक्त राष्ट्र ने इस साल पर्यावरण दिवस का थीम रखा है ‘कनेक्टिंग पीपल टू नेचर’.

5 जून यानी आज पूरी दुनिया में विश्‍व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है. प्रकृति को महसूस करने और उसमें आ रहे बदलावों को देखने के लिए हम सभी को प्रकृति के करीब जाना होगा. यही वजह है कि संयुक्‍त राष्‍ट्र ने पर्यावरण दिवस 2017 के लिए ‘कनेक्टिंग पीपल टू नेचर’ थीम रखी है.

यूएन इन्‍वायरनमेंट हर साल पर्यावरण दिवस के लिए एक थीम निर्धारित करता है. इस साल लोगों को प्रकृति से जोड़ने का लक्ष्‍य रखा गया है. वहीं 5 जून को एक वार्षि‍क आयोजन भी होता है. जो इस वर्ष कनाडा में होगा.



यूएन इन्‍वायरनमेंट का कहना है कि लोग प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं. लेकिन मौजूदा समय में प्रदूषण की वजह से खराब होती जा रही इस धरती को बचाने के लिए आगे आने की जरूरत है.
इस साल हम सब के लिए क्‍या है यूएन का संदेश

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संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कहता है कि यह पूरा साल प्रकृति से जुड़ने और महसूस करने का साल है. इस साल की थीम कहती है कि हम ये देखें कि हम प्रकृति से कैसे जुड़े हुए हैं. हम प्रकृति के ऊपर किस हद तक निर्भर हैं. घर से बाहर निकलिए, पार्कों में जाइए, प्रकृति के विभिन्‍न रूपों को देखिए, तितलियों को पहचानिए, पार्क के किसी ऐसे कोने में जाइए, जहां अब से पहले कभी नहीं गए और उसे गौर से परखिए.

कब हुई पर्यावरण दिवस की शुरूआत
पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर सन् 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टॉकहोम (स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया। अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण चेतना और पर्यावरण आंदोलन की शुरुआत इसी सम्मेलन से मानी जाती है। इसमें 119 देशों ने भाग लिया और सभी ने एक ही धरती के सिद्धांत को मान्‍य करते हुए हस्‍ताक्षर किए. इसके अगले साल यानि 5 जून 1973 से सभी देशों में विश्‍व पर्यावरण दिवस मनाया जाने लगा.

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया था भाषण

Smt. Indira Gandhi


इस सम्‍मेलन में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भाषण दिया था. जिसमें उन्‍होंने विकासशील देशों की परेशानी देखते हुए कहा था कि गरीबी ही सबसे बड़ा प्रदूषक है. गांधी ने पर्यावरण के बिगड़ते हालात और विश्‍व पर उसके प्रभाव को लेकर भाषण दिया था.

क्‍यों मनाया जाता है पर्यावरण दिवस
जब संसार में पर्यावरण प्रदूषण की समस्‍या बढ़ने लगी और संसाधनों के असमान वितरण के बावजूद सभी देशों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ने लगा तो इन पर्यावरणीय समस्याओं को सुलझाने के लिए वैश्विक मंच तैयार किया गया. इस दिवस को मनाने का उद्धेश्‍य पर्यावरण की समस्‍याओं को मानवीय चेहरा प्रदान करना के साथ ही लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना था. साथ ही विभिन्न देशों, उद्योगों, संस्थाओं और व्यक्तियों की साझेदारी को बढ़ावा देना ताकि सभी देश, समुदाय और सभी पीढ़ियां सुरक्षित और उत्पादनशील पर्यावरण का आनंद उठा सकें।

हर साल बदलते हैं इसके लक्ष्‍य
पर्यावरण की ज्‍वलंत समस्‍याओं को देखते हुए यूएन हर साल इसके लक्ष्‍यों को बदलता है. लक्ष्‍यों के आधार पर ही विश्‍व पर्यावरण दिवस के साथ ही पूरे साल के लिए थीम तैयार की जाती है. चूंकि लोग प्रकृति से दूर हो रहे हैं. तकनीक और मशीन के करीब हो रहे हैं, लिहाजा इसे ही ध्‍यान में रखकर इस साल का लक्ष्‍य रखा गया है.

इस समय क्‍या हैं हालात
वर्तमान में प्रदूषण विकराल रूप ले चुका है. पूरे विश्‍व का पर्यावरण इस समय खतरे में है. ग्‍लोबल वार्मिंग के बढ़ते स्‍तर के साथ ही भौगोलिक और पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हो गया है. इन हालातों पर काबू नहीं पाया गया तो गंभीर परिणाम होंगे.

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पेरिस पैक्‍ट का पर्यावरण से क्‍या है नाता
ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को स्थिर करने और पृथ्वी को जलवायु परिवर्तन के खतरे से बचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के नेतृत्‍व में 18 पन्‍नों के एक दस्‍तावेज पर सदस्‍य देशों ने हस्‍ताक्षर किए. अभी तक इसके 197 सदस्‍य देश हैं. लेकिन हाल ही में अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने इस समझौते से अलग करने का फैसला किया है.
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