World Environment Day 2019: पर्यावरण को बचाने के लिए थोड़ी 'हवा आने दे'

काट रहे हो तुम वृक्षों को, कुछ भी नहीं विचार किया। वृक्षों ने जो कुछ भी पाया, उसे हमीं पे वार दिया।। इतना बड़ा हमारा जग है, क्षरण यहाँ स्वीकार नहीं। वे भी जीव इसी जग के हैं, जीना क्या अधिकार नहीं? फल अरु फूल दिया है इसने, राही को भी छांव दिया। वृक्षों ने जो कुछ भी पाया, उसे हमीं पे वार दिया।। - कुलदीप पांडे

News18Hindi
Updated: June 5, 2019, 7:52 AM IST
World Environment Day 2019: पर्यावरण को बचाने के लिए थोड़ी 'हवा आने दे'
काट रहे हो तुम वृक्षों को, कुछ भी नहीं विचार किया। वृक्षों ने जो कुछ भी पाया, उसे हमीं पे वार दिया।। इतना बड़ा हमारा जग है, क्षरण यहाँ स्वीकार नहीं। वे भी जीव इसी जग के हैं, जीना क्या अधिकार नहीं? फल अरु फूल दिया है इसने, राही को भी छांव दिया। वृक्षों ने जो कुछ भी पाया, उसे हमीं पे वार दिया।। - कुलदीप पांडे
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Updated: June 5, 2019, 7:52 AM IST
पूरी दुनिया में हर साल 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. हर बार प्रकृति के संरक्षण, संवर्द्धन के लिए अलग थीम तय की जाती है. विश्व पर्यावरण दिवस 2019 की थीम 'वायु प्रदूषण' रखी गई है. मतलब साफ है कि इस बार पूरी दुनिया को वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए जागरूक किया जाएगा. पूरी दुनिया मिलकर वायु प्रदूषण को रोकने के उपाय करेगी.

भारत सरकार ने इस साल की थीम को ध्यान में रखकर एक थीम वीडियो सॉन्ग 'हवा आने दे' तैयार किया है. इस वीडियो को पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मुंबई के भामला फाउंडेशन के साथ मिलकर बनाया है. इस वाडियो के जरिये लोगों को पर्यावरण को बचाने के लिए जागरूक किया जाएगा. प्रकृति साल में 363 या 364 दिन हमारा खयाल रखती है. सिर्फ एक दिन ही सही लोग पर्यावरण को बेहतर बनाने के कदम उठाएंंगे.

'सेल्फी विद सैपलिंग' अभियान
केंद्र सरकार ने 'सेल्फी विद सैपलिंग' अभियान भी शुरू किया है ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाएं. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि अगले दो-तीन दिन तक पूरे देश में इससे जुड़े कार्यक्रम किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि पर्यावरण भवन में बुधवार सुबह 10.30 बजे होने वाले कार्यक्रम में पूर्व क्रिकेटर कपिल देव और अभिनेता जैकी श्राॅफ शामिल होंगे. उन्होंने भरोसा जताया कि पूरे देश में विश्व पर्यावरण दिवस पूरे जोश के साथ मनाया जाएगा. उन्होंने अपील की कि लोग अपने लगाए पौधे के साथ सेल्फी लेकर #SelfiWithSapling के साथ पोस्ट करें.

ग्‍लोबल वार्मिंग के बढ़ते स्‍तर के साथ ही भौगोलिक और पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हो गया है.


खतरे में है विश्व पर्यावरण
इस समय पूरी दुनिया में वायु प्रदूषण की स्थिति बहुत खराब और विकराल रूप ले चुकी है. पूरी दुनिया का पर्यावरण खतरे में है. ग्‍लोबल वार्मिंग के बढ़ते स्‍तर के साथ ही भौगोलिक और पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हो गया है. इन हालात पर काबू नहीं पाया गया तो नतीजे बहुत गंभीर होंगे.
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इसलिए मनाया जाता है पर्यावरण दिवस
दुनिया में पर्यावरण प्रदूषण की समस्‍या जब विकराल रूप अख्तियार करने लगी और संसाधनों के असंतुलित वितरण के कारण सभी देशों पर बुरा असर पड़ने लगा तो इन समस्याओं से निपटने के लिए वैश्विक मंच तैयार किया गया. इस दिवस को मनाने का उद्धेश्‍य पर्यावरण की समस्‍याओं को मानवीय चेहरा देने के साथ ही लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना था. साथ ही विभिन्न देशों, उद्योगों, संस्थाओं और व्यक्तियों की साझेदारी को बढ़ावा देना था ताकि सभी देश, समुदाय व पीढ़ियां सुरक्षित तथा उत्पादनशील पर्यावरण का आनंद ले सकें.

1972 में पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित हुआ
संयुक्त राष्ट्र संघ ने पर्यावरण प्रदूषण पर 1972 में स्टॉकहोम (स्वीडन) में दुनियाभर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया था. माना जाता है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण को लेकर जागरूकता और आंदोलन की शुरुआत इसी सम्मेलन से हुई थी. इस सम्मेलन में दुनिया के 119 देशों ने भाग लिया था. सभी ने एक धरती के सिद्धांत को मान्‍यता देते हुए हस्‍ताक्षर किए. इसके बाद 5 जून को सभी देशों में विश्‍व पर्यावरण दिवस मनाया जाने लगा. भारत में 19 नवंबर 1986 से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम लागू हुआ.

विश्व पर्यावरण दिवस सम्मेलन में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने विकासशील देशों के लिए गरीबी को सबसे बड़ा प्रदूषक बताया था.


इंदिरा गांधी ने कहा था, गरीबी ही सबसे बड़ी प्रदूषक है
1974 के सम्‍मेलन में दिए भाषण में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने विकासशील देशों की परेशानियों को देखते हुए कहा था कि गरीबी ही सबसे बड़ी प्रदूषक है. उन्होंने पर्यावरण के बिगड़ते हालात और पूरी दुनिया पर इसके असर को लेकर अपनी बात रखी थी.

हर साल बदलते हैं इसके लक्ष्‍य
पर्यावरण की ज्‍वलंत समस्‍याओं को देखते हुए यूएन हर साल इसके लक्ष्‍यों को बदलता है. लक्ष्‍यों के आधार पर ही विश्‍व पर्यावरण दिवस के साथ ही पूरे साल के लिए थीम तैयार की जाती है. इस समय पूरी दुनिया वायु प्रदूषण से हलकान हो रही है. लिहाजा इस साल का लक्ष्य वायु प्रदूषण को घटाने को लेकर रखा गया है.

बीते 10 साल में ऐसे बदलीं थीम्स

वर्ष 2018 - बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन
वर्ष 2017 - कनेक्टिंग पीपुल टू नेचर - इन द सिटी एंड ऑन द लैंड, फ्रॉम द पोल्स टू द इक्वेटर
वर्ष 2016 - नो टॉलरेंस फॉर द ट्रेड व्हिच इज इलीगल
वर्ष 2015 - वन एनवॉयरमेंट फॉर वन वर्ल्ड
वर्ष 2014 - स्मॉल आईलैंड्स फॉर द इंप्रूविंग स्टेट्स एंड ऑलसो रेज योर वाइस एंड नॉट लेवल ऑफ द सी
वर्ष 2013 - थिंक, सेव, ईट विद द स्लोगन ऑफ डिक्रीज योर फुटप्रिंट
वर्ष 2012 - ग्रीन फाइनेंस : कैन इट इनक्लूड यू?
वर्ष 2011 - फॉरेंस्ट : नेचर फॉर ऑल योर फैसिलिटी
वर्ष 2010 - वन फ्यूचर, वन प्लेनेट, मैनी स्पिसीज
वर्ष 2009 - कम टुगेदर टू कॉम्बेट चेंज इन द क्लाइमेट - आवर प्लेनेट नीड अस

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First published: June 5, 2019, 5:20 AM IST
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