World Environment Day: हाथी इसलिए है हमारे पर्यावरण का बड़ा साथी?

World Environment Day: हाथी इसलिए है हमारे पर्यावरण का बड़ा साथी?
देश में सबसे ज्यादा हाथी कर्नाटक में हैं

निजी व्यक्तियों और धार्मिक संस्थाओं के पास बंदी हैं 1774 हाथी, असम में हो रही है गजराज की सबसे ज्यादा मौत

  • Share this:
नई दिल्ली. केरल में गर्भवती हथिनी (Kerala Elephant) को बर्बरता से मारे जाने की घटना से देश में गुस्सा है. लेकिन क्या आपको पता है कि सबसे ज्यादा हाथी (Elephant) केरल में नहीं बल्कि असम (Assam) में मारे जा रहे हैं. पिछले पांच साल में अकेले असम में 128 हाथियों की मौत हो चुकी है. इसमें बड़ी संख्या ट्रेन से टकराकर मरने की है. पर्यावरणविदों के मुताबिक हाथी दांत के तस्कर इनकी जान के दुश्मन हैं. जबकि हाथी न हो तो तो पर्यावरण को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है. क्योंकि यह वन क्षेत्र बढ़ाने में मदद करता है.

पर्यावरणविद् और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर एन. शिवकुमार ने कहा, हाथी 24 घंटे में औसतन 50 से 10 किलोमीटर तक जंगल में चल लेता है. यह पेड़ पौधों की पत्तियां और फल खाता है. जब वो एक जगह से दूसरी जगह पर जाता है तो उसके गोबर के रास्ते एक जगह के पेड़-पौधों के बीज दूसरी जगह पहुंचकर उग जाते हैं. इस तरह वो जंगल को बढ़ाने और उसे अलग-अलग तरह के पौधों से समृद्ध करने का काम करता है. यह काफी इंटेलीजेंट होता है. विश्व पर्यावरण दिवस पर आज हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम इन पर अत्याचार नहीं होने देंगे.

देश में कितने हाथी



केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (Ministry of forests and environment) के मुताबिक देश में इस वक्त 29,964 हाथी हैं. दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर में इनकी संख्या सबसे अधिक है. दक्षिण में 14,612 और पूर्वोत्तर में इनकी संख्या 10,139 है. प्रदेश के हिसाब से देखें तो सर्वाधिक 6049 हाथी कर्नाटक में हैं. इसके बाद 5719 हाथियों के साथ असम और 5706 के साथ केरल का नंबर आता है. उत्तराखंड, ओडिशा और मेघालय में भी इनकी अच्छी संख्या है.



elephant death, elephant murder in kerala, World Environment Day, Friend of our forest, Ministry of forests and environment, हाथियों की मौत, केरल में हाथी का मर्डर, विश्व पर्यावरण दिवस, जंगल, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय
केंद्र सरकार के मुताबिक देश में लगभग 30 हजार हाथी हैं


निजी व्यक्तियों की कैद में हैं 1774 हाथी

पूर्वोत्तर से आने वाली सांसद अगाथा के संगमा ने 2019 में निजी व्यक्तियों या धार्मिक संस्थाओं के स्वामित्व वाले बंदी हाथियों को लेकर संसद में एक सवाल पूछ था. जवाब में बताया गया है कि निजी व्यक्तियों या धार्मिक संस्थाओं के पास 1774 हाथी बंदी हैं.

ये भी पढ़ें: कैसे लुप्त हो गई सरस्वती नदी और सिंधु घाटी सभ्यता, तीन वैज्ञानिकों की नई खोज

क्या दिल्ली पर किसी बड़े खतरे का संकेत हैं भूकंप के ये छोटे झटके?

 
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading