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विश्व ओजोन दिवस: जानिए मानव जीवन के लिए क्या है इसकी अहमियत

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Updated: September 16, 2019, 10:01 AM IST
विश्व ओजोन दिवस: जानिए मानव जीवन के लिए क्या है इसकी अहमियत
ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की एक परत है जिसमें ओजोन गैस की सघनता ज्यादा होती है.

सर्वप्रथम विश्व ओजोन दिवस (World Ozone Day) साल 1995 में मनाया गया था. साल 1913 में ओजोन परत (Ozone Layer) की खोज हुई थी. इसकी खोज फ्रांस के वैज्ञानिक फैबरी चार्ल्स और हेनरी बुसोन ने की थी.

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हर साल 16 सितंबर को दुनियाभर में विश्व ओजोन दिवस (World Ozone Day) मनाया जाता है. धरती (Earth) पर जीवन के प्रमुख कारकों में हवा, पानी की तरह सूर्य की किरणें भी शामिल हैं. सूर्य से निकलने वाली किरणों में मौजूद पराबैंगनी किरणें काफी घातक होती हैं. ओजोन की परत इन सभी घातक किरणों को सोख कर इंसानों के लिए उपयोगी किरणें धरती पर भेजती है. ओजोन की परत पर पृथ्वी के वायुमंडल का 91% से ज्यादा ओजोन गैस मौजूद हैं.

ओजोन परत की वजह से ही धरती पर जीवन संभव

ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की एक परत है जिसमें ओजोन गैस की सघनता ज्यादा होती है. ओजोन परत की वजह से ही धरती पर जीवन संभव है. ये परत सूर्य के पराबैंगनी किरणों की 93-99 % मात्रा को सोंख लेती है. पराबैंगनी किरण पृथ्वी पर जीवन के लिए हानिकारक है. इन किरणों से मनुष्यों में कैंसर होता है. जानवरों की प्रजनन क्षमता पर भी इनका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. ओजोन (O3) आक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनने वाली एक गैस है जो वायुमण्डल में बहुत कम मत्रा 0.02% में पाई जाती हैं. समुद्र-तट से 30-32 किमी की ऊंचाई पर इसका 91% हिस्सा एकसाथ मिलकर ओजोन की परत का निर्माण करती है.

सर्वप्रथम विश्व ओजोन दिवस साल 1995 में मनाया गया

इस साल के विश्व ओजोन दिवस का टॉपिक है, '32 वर्ष और हीलिंग'. सर्वप्रथम विश्व ओजोन दिवस साल 1995 में मनाया गया था. साल 1913 में ओजोन परत की खोज हुई थी. इसकी खोज फ्रांस के वैज्ञानिक फैबरी चार्ल्स और हेनरी बुसोन ने की थी. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 1994 में 16 सितंबर की तारीख को ओजोन परत के संरक्षण के लिए 'अंतरराष्ट्रीय ओजोन दिवस' मनाने का ऐलान किया था. इसी दिन साल 1987 में ओजोन परत के संरक्षण के लिए मॉ्ट्रिरयल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किया गया था.

जब ओजोन परत में छेद का पता चला

साल 1985 में सबसे पहले ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिक के ऊपर ओजोन परत में एक बड़े छेद की खोज की थी. वैज्ञानिकों को पता चला कि इसके लिए वक्लोरोफ़्लोरोकार्बन (CFC) गैस जिम्मेदार है. इस गैस की खोज 1920 में हुई थी. इस गैस का प्रयोग रेफ्रिज़रेटर, हेयरस्प्रे और डिऑडरेंट बनाने वाले प्रोपेलेंट में अधिकता से होता है. साल 1987 में सीएफसी गैस के उपयोग को रोकने के लिए दुनिया के देशों में आम सहमति बनी और इसके उत्पादन पर रोक लगाने के लिए मांट्रियल संधि की गई. साल 2010 में सीएफसी के उत्पादन पर वैश्विक स्तर पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया.

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First published: September 16, 2019, 10:01 AM IST
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