पड़ोसी से एक घटना के आधार पर दुश्मन की तरह व्यवहार करना गलत होगा: चीनी राजदूत

पड़ोसी से एक घटना के आधार पर दुश्मन की तरह व्यवहार करना गलत होगा: चीनी राजदूत
भारत में चीन के राजदूत सुन वेडांग की फाइल फोटो (Twitter)

भारत में चीन के राजदूत सुन वेडांग (China's ambassador to India Sun Weidon) की ये टिप्पणियां जून में सीमा पर हुई झड़प (border clash) के बाद भारत और चीन के बीच तनाव की पृष्ठभूमि के संदर्भ में आईं हैं. इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक (Indian Soilders) शहीद हो गए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 28, 2020, 7:09 PM IST
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नई दिल्ली. भारत में चीन के राजदूत सुन वेडांग (China's ambassador to India Sun Weidon) ने शुक्रवार को कहा कि दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंधों (bilateral relationship) को सही रास्ते पर लाने के लिए आधे-आधे रास्ते को तय करना होगा. उन्होंने कहा कि एक नजदीकी पड़ोसी (close neighbour) को दुश्मन या एक घटना के कारण खतरा मानना एक गलतफहमी होगी. न्यूज18 को दिए एक विशेष साक्षात्कार में, वेडांग ने कहा, "चीन और भारत (India and China) को द्विपक्षीय संबंधों को सही रास्ते पर लाने के लिए आधे-आधे रास्ते को तय करना चाहिए. एक नजदीकी पड़ोसी को दुश्मन (enemy) मानना या एक घटना के चलते उससे शत्रु जैसा व्यवहार करना गलत होगा." उन्होंने कहा, "मौजूदा कठिनाइयों में नेताओं की सहमति (leaders' consensus) को लागू करना और अधिक महत्वपूर्ण होगा."

जून में सीमा पर हुई झड़प (border clash) के बाद भारत और चीन के बीच तनाव की पृष्ठभूमि के संदर्भ में सुन की ये टिप्पणियां आईं हैं. इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक (Indian Soilders) शहीद हो गए थे. सुन ने यह भी कहा कि जमीन पर मौजूदा स्थिति नियंत्रण में (under control) है. उन्होंने कहा, "दोनों ताकतों के बीच कोई ताजा गतिरोध नहीं है. चीन (China) के कदमों को विस्तारवादी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए." उन्होंने कहा कि सीमा (border) पर हुए प्रारंभिक प्रस्ताव का स्वागत है, लेकिन धैर्य और समाधान की जरूरत है.

"भारत-चीन प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार"
हालांकि, सुन ने कहा कि चीनी कंपनियों की भागीदारी को प्रतिबंधित करने वाला कोई भी देश अपनी ही विश्वसनीयता को बाधित करेगा. उन्होंने कहा कि जारी तनाव के बावजूद, "भारत-चीन संबंधों पर चीन का निर्णय अपरिवर्तित है."
उन्होंने कहा, "चीन और भारत को एक-दूसरे को चुंबकों की तरह आकर्षित करना चाहिए, बजाए इसके कि एक-दूसरे को बलपूर्वक अलग करने के. ये देश प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार हैं. हमें एक-दूसरे का सम्मान और समर्थन करना चाहिए और आपसी राजनीतिक विश्वास को बढ़ाना चाहिए."



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सुन ने दोनों देशों को आपसी समझौते तक पहुंचने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा, "हमें सीमा से जुड़े सवालों को को द्विपक्षीय संबंधों में एक उचित स्थान पर रखना चाहिए. हमें नहीं लगता है कि भारत-चीन संबंध एकदम नए सिरे से शुरू हो रहे हैं. गलवान संघर्ष के बाद संचार के द्विपक्षीय चैनल खुले और सुचारू रूप से काम कर रहे हैं. पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी रिश्तों को निर्देशित करने में जिनपिंग की अहम भूमिका निभा रहे हैं.”
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