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तो क्‍या लश्‍कर सरगना हाफिज सईद को सजा देने के बाद FATF की ब्‍लैक लिस्‍ट में डाले जाने से बच जाएगा पाकिस्‍तान?

News18Hindi
Updated: February 13, 2020, 12:46 PM IST
तो क्‍या लश्‍कर सरगना हाफिज सईद को सजा देने के बाद FATF की ब्‍लैक लिस्‍ट में डाले जाने से बच जाएगा पाकिस्‍तान?
आतंकी संगठन जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद को टेरर फंडिग के मामलों में सजा देने के बाद पाकिस्‍तान को लेकर अमेरिका समेत कुछ यूरोपीय देशों का रुख नरम हो रहा है.

भारत लश्‍कर-ए-तैयबा (LeT) संस्‍थापक और जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद (Hafiz Saeed) को पाकिस्‍तान में सजा सुनाए जाने के समय पर फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (FATF) का ध्‍यान दिलाने की कोशिश कर रहा है. वहीं, अमेरिका (US) ने इसे पाकिस्‍तान (Pakistan) की ओर से उठाया गया अहम कदम करार दिया है. बता दें कि ये सब उस समय हो रहा है, जब अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) जल्‍द ही भारत दौरे पर आने वाले हैं.

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  • Last Updated: February 13, 2020, 12:46 PM IST
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महा सिद्दिकी

नई दिल्‍ली. पाकिस्तान (Pakistan) की अदालत ने आतंकी संगठन लश्‍कर ए तैयबा के संस्‍थापक और जमात-उद-दावा (Jamat-ud-Dawa) प्रमुख हाफिज़ सईद (Hafiz Saeed) को टेरर फंडिंग के मामलों में दोषी पाया है. अदालत ने आतंकी सरगना और मुंबई के 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को 11 साल की सजा सुनाई है. इसके बाद पाकिस्‍तान को फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (FATF) की ग्रे या ब्‍लैक लिस्‍ट में डालने को लेकर अमेरिका (US) का रुख भी नरम होता दिख रहा है. अब तक माना जा रहा था कि इस बार एफएटीएफ पाकिस्‍तान को ब्‍लैक लिस्‍ट में डाल देगा, लेकिन अब मिल रहे संकेत कुछ और ही कहानी कह रहे हैं.

पाकिस्‍तान कर रहा ग्रे लिस्‍ट से बाहर आने की कोशिश
अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने नरम रुख के संकेत दिए हैं. इसका मतलब है कि पाकिस्‍तान को ग्रे लिस्‍ट में ही रखा जा सकता है. ये सब अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) की 24 फरवरी को होने वाली भारत यात्रा से कुछ दिन पहले ही हो रहा है. आज से ठीक तीसरे दिन पेरिस में एफएटीएफ पाकिस्‍तान को लेकर फैसला करेगा. पाकिस्‍तान एफएटीएफ की ग्रे लिस्‍ट से भी बाहर होने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहा है. हालांकि, अभी ऐसा होना मुश्किल लग रहा है क्‍योंकि कुछ यूरोपीय देश (European countries) पाकिस्‍तान को आतंकवाद (Terrorism) के खिलाफ कुछ और ठोस कदम उठाते हुए देखना चाहते हैं.

ATC हाफिज सईद (Hafiz Saeed) के मामले की सुनवाई कर रही है.
हाफिज सईद को 2018 में भी 11 महीने के लिए घर में नजरबंद रखा गया था, लेकिन उसके संगठन जमात-उद-दावा की गतिविधियां जारी रही थीं.


फ्रांस ने पाक के कदमों को लेकर दिखाई दरियादिली
फ्रांस (France) ने जनवरी 2018 में बीजिंग (Beijing) में हुई एफएटीएफ की बैठक में कहा था कि पाकिस्‍तान ने 27 में से ज्‍यादातर एजेंडा को मान लिया है. साथ ही 2018 में आतंकी फंडिंग के खिलाफ कार्रवाई करने का वादा भी कर चुका है. बता दें कि पाकिस्‍तान की अदालत ने टेरर फंडिंग के दो मामलों में दोषी ठहराते हुए हाफिज सईद को 11 साल की सजा भी सुना दी है. इस सब के बीच भारत हाफिज सईद को पाकिस्‍तान में सजा सुनाए जाने के समय पर FATF का ध्‍यान दिलाने की कोशिश कर रहा है. वहीं, अमेरिका के विदेश मंत्रालय के दक्षिण व मध्‍य एशिया विभाग ने इसे पाकिस्‍तान का अहम कदम करार दिया है.पहले भी नजरबंद रहा हाफिज, काम करता रहा JUD
भारत सरकार में उच्‍चपदस्‍थ सूत्रों का कहना है कि पाकिस्‍तान की अदालत के फैसले को लागू किए जाने पर नजर रखी जानी चाहिए. सईद को 2018 में भी 11 महीने के लिए घर में नजरबंद (House Arrest) रखा गया था, लेकिन उसके संगठन जमात-उद-दावा की गतिविधियां जारी रही थीं. यही नहीं, पाकिस्तान में पंजाब प्रांत की सरकार ने उस पर लगे आतंकी आरोपों को इस हद तक कमतर किया कि अदालत ने उसकी नजरबंदी को गलत ठहरा दिया. हालांकि, यह पहली बार है, जब मुंबई हमलों (Mumbai Attack) के मास्‍टरमाइंड को आतंकवाद से संबंधित किसी भी मामले में कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए सजा दी है.

अमेरिका के विदेश मंत्रालय के दक्षिण व मध्‍य एशिया विभाग ने हाफिज सईद को सजा सुनाए जाने को पाकिस्‍तान का अहम कदम करार दिया है.


'ब्‍लैक लिस्‍ट में डालने से पड़ेगा सुधार कार्यक्रमों पर असर'
अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने ट्वीट किया, 'हाफिज सईद को दोषी ठहराया जाना पाकिस्‍तान की ओर से उठाया गया अहम कदम है. पाकिस्‍तान आतंकी फंडिंग (Terror Funding) के खिलाफ अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिबंद्धता की दिशा में काम कर रहा है.' अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रिंसिपल असिस्‍टेंट सेक्रेटरी एलिस वेल्‍स ने 24 जनवरी को कहा था कि पाकिस्‍तान को एफएटीएफ की ओर से ब्‍लैक लिस्‍ट में डालना उसे आर्थिक सुधार कार्यक्रम को प्रभावित करेगा. इससे निवेश आकर्षित करने की उसकी क्षमता पर भी असर पड़ेगा. ये पहला संकेत था, जिसमें अमेरिका ने पाकिस्‍तान को ब्‍लैक लिस्‍ट में डालने को लेकर नरम रवैया दिखाया था.

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First published: February 13, 2020, 12:35 PM IST
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