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अमित शाह ने की पूर्वोत्‍तर के मुख्‍यमंत्रियों के साथ बैठक, क्या NRC और CAB पर बन पाएगी सहमति?

गृह मंत्री अमित शाह आज पूर्वोत्‍तर के मुख्‍यमंत्रियों और सामाजिक व छात्र संगठनों से मुलाकात कर नागरिकता संशोधन विधेयक पर एकराय बनाने की कोशश करेंगे.

गृह मंत्री अमित शाह आज पूर्वोत्‍तर के मुख्‍यमंत्रियों और सामाजिक व छात्र संगठनों से मुलाकात कर नागरिकता संशोधन विधेयक पर एकराय बनाने की कोशश करेंगे.

पूर्वोत्‍तर (Northeast) के आठों राज्‍यों के सीएम (CM) और छात्र व सामाजिक संगठनों ने नई दिल्‍ली में गृह मंत्री अमित शाह ...अधिक पढ़ें

    आदित्‍य शर्मा

    नई दिल्‍ली. संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) को संसद में पेश किए जाने से पहले गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने शनिवार को पूर्वोत्‍तर के आठों राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों और सामाजिक व छात्र संगठनों से मुलाकात की. इस दौरान सभी पक्षों को विधेयक पर चर्चा कर एकमत करने की कोशिश की जाएगी. सभी पक्ष कई चरणों में इस विधेयक पर बातचीत करेंगे. असम (Assam) में बीजेपी के कद्दावर नेता हिमंत बिस्‍व सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने News18 से कहा, 'यह कहना मुश्किल है कि बैठक में सिफरिशों की समीक्षा होगी या विधेयक में शामिल करने के लिए सभी पक्षों की मांगों पर विचार किया जाएगा.'

    मेघालय के सीएम संगमा ने शाह से की थी सभी पक्षों के साथ बैठक की बात
    नागरिकता कानून, 1956 के लिए प्रस्‍तावित संशोधन विधेयक जनवरी में ही लोकसभा से पारित हो चुका था. इसके बाद सरकार ने इसे राज्‍यसभा में पेश ही नहीं किया. किसी भी विधेयक को कानून बनाने के संसद के दोनों सदनों से पारित कराना जरूरी होता है. संशोधित विधेयक में बांग्‍लादेश, पाकिस्‍तान और अफगानिस्‍तान में धार्मिक उत्‍पीड़न के कारण भारत में शरण लेने वाले हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा ऐसे लोगों के लिए भारत में 11 साल रहे होने की अनिवार्यता को घटाकर 6 साल करने का प्रस्‍ताव भी रखा गया है. बता दें कि मेघालय के मुख्‍यमंत्री कोनराड संगमा ने 22 नवंबर को दिल्‍ली में अमित शाह से मुलाकात कर कहा था कि एनआरसी पर सभी पक्षों से सलाह-मशविरा किए जाने की जरूरत है. इस पर शाह ने सहमति जताई थी.

    शाह ने दिलाया भरोसा, सभी से चर्चा के बाद ही संसद में पेश होगा बिल
    अमित शाह के साथ एनआरसी पर चर्चा के लिए नॉर्थ ईस्‍ट स्‍टूडेट्स ऑर्गेनाइजेशन (NESO), ऑल बोडो स्‍टूडेंट्स यूनियन और मेघायल, नगालैंड व अरुणाचल प्रदेश के छात्र संगठनों को भी बुलाया गया है. अमित शाह ने भरोसा दिलाया है कि संशोधित विधेयक सभी पक्षों की रायशुमारी के बाद ही संसद में पेश किया जाएगा. इसके बावजूद पूर्वोत्‍तर भारत में विवादित कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. मणिपुर से बीजेपी सांसद राजकुमार रंजन सिंह ने राज्‍य को कैब से छूट देने की मांग की. उन्‍होंने संसद में कहा कि मणिपुर के लोग नए नागरिकता कानून को लेकर डरे हुए हैं. असम के ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF), कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, माकपा समेत कई दलों ने संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन इन मुद्दे पर स्‍थगन प्रस्‍ताव लाने की मांग की थी.

    विपक्ष ने वेंकैया नायडू के सामने भी उठाया संशोधित विधेयक का मुद्दा
    विपक्ष ने अगले सप्ताह के एजेंडे पर चर्चा के लिए आयोजित सलाहकार समिति की बैठक के दौरान राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू के सामने भी विधेयक का मुद्दा उठाया था. इस बीच नागरिकता संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए NESO नेताओं ने संगमा को दिल्ली बुलाया. प्रतिनिधिमंडल कैब के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भी सौंपेगा. विवाद तब शुरू हुआ, जब बीजेपी के नेतृत्‍व वाली असम सरकार ने 31 अगस्‍त को जारी एनआरसी की अंतिम सूची को खारिज कर दिया. हिमंत बिस्‍व सरमा ने केंद्र और बीजेपी के पूरे देश में एनआरसी लागू करने के प्रस्‍ताव का समर्थन किया. उन्‍होंने कहा कि संशोधित कानून असम के लिए अच्‍छा साबित होगा. अगर अंतिम सूची से बाहर रह गए लोग बाहर ही रहे तो कई विधानसभा क्षेत्र दूसरे दलों के हाथों में चले जाएंगे. असम के मूलनिवासियों के लिए कैब बहुत जरूरी है.

    एनआरसी से बाहर हुए हिंदुओं के आंकड़े जारी करेगी असम सरकार
    शाह की सभी पक्षों के साथ बैठक इसलिए भी अहम है क्‍योंकि सरमा ने बृहस्‍पतिवार को बताया था कि असम सरकार एनआरसी की अंतिम सूची से बाहर हुए हिंदू बंगाली लोगों के जिलावार आंकड़े जारी करेगी. नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) ने कहा था कि एनआरसी में बहुत ज्‍यादा अनियमितता बरती गई है. सरमा ने कैग की जांच रिपोर्ट का जिक्र करने के साथ ही ऐतिहासिक असम समझौते को भी खारिज किया. उन्‍होंने कहा कि समझौते पर हस्‍ताक्षर करने से पहले किसी से सलाह-मशविरा नहीं किया गया था. प्रफुल मेहता ने समझौते पर हस्‍ताक्षर किए थे. इसलिए वही इसके प्रति समर्पित रहें. हिमंत बिस्‍व सरमा ने समझौते पर हस्‍ताक्षर नहीं किए थे. इसलिए मैं उसे मानने को प्रतिबद्ध नहीं हूं. असम विधानसभा ने इसे आगे नहीं बढ़ाया था. समझौते को स्‍वीकार करने को लेकर विधानसभा में कोई प्रस्‍ताव पेश नहीं किया गया था.

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    Tags: Amit shah, Arunachal pradesh, Assam, Citizenship bill, Manipur, Meghalaya, Mizoram, Nagaland, NRC, Sikkim, West bengal

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