COVID FAQ: बुजुर्गों का पहले वैक्सीनेशन कितना सही? कब मिलेगी हर्ड इम्युनिटी? एम्स डायरेक्टर ने दिए सारे जवाब

कोरोना संक्रमण के मामलों ने और तेज रफ्तार पकड़ ली है.(File Photo)

कोरोना संक्रमण के मामलों ने और तेज रफ्तार पकड़ ली है.(File Photo)

Coronavirus cases in India: News18 के साथ एक डिटेल बातचीत में डॉ. गुलेरिया का कहना है कि सरकार द्वारा गठित प्राथमिकता समूहों के आधार पर ही अलग-अलग फेज में टीकाकरण जारी रहना चाहिए. सरकार का फोकस कोविड के नियमों का पालन कराने, टेस्टिंग, ट्रेसिंग और आइसोलेशन पर होना चाहिए. तभी देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के प्रसार को रोका जा सकता है.

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  • Last Updated: March 23, 2021, 1:22 PM IST
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(श्रेया ढौंडियाल)

नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस (Coronavirus cases in India) के मामलों में बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन के नियमों में ढील दी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग वैक्सीनेट हो सके. हालांकि, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया (Dr Randeep Guleria) केंद्र सरकार के इस कदम को सही नहीं मानते. डॉ. गुलेरिया के मुताबिक, बुजुर्गों और बीमार लोगों से पहले युवाओं को टीका लगाना गलत होगा, क्योंकि युवाओं के मुकाबले बुजुर्ग और कम इम्युनिटी वाले लोगों में संक्रमण से मरने का अधिक खतरा होता है. इसलिए पहले उन्हें कवर किया जाना चाहिए.

News18 के साथ एक डिटेल बातचीत में डॉ. गुलेरिया का कहना है कि सरकार द्वारा गठित प्राथमिकता समूहों के आधार पर ही अलग-अलग फेज में टीकाकरण जारी रहना चाहिए. सरकार का फोकस कोविड के नियमों का पालन कराने, टेस्टिंग, ट्रेसिंग और आइसोलेशन पर होना चाहिए. तभी देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के प्रसार को रोका जा सकता है.

यहां पढ़ें डॉ. गुलेरिया से बातचीत के खास अंश:-

  • वैक्सीन की बर्बादी को देखते हुए क्या ऐसी संभावना है कि सरकार सभी का टीकाकरण करेगी?

    एक आदर्श स्थिति में सभी वयस्कों को टीका लगाना चाहिए, लेकिन इसके लिए हमारे पास वैक्सीन की पर्याप्त डोज भी होनी चाहिए. अगर आप 18 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी लोगों का टीकाकरण करना चाहते हैं, तो यह लगभग 90 करोड़ लोग होंगे. इसका मतलब है कि हमें 2 बिलियन खुराक की जरूरत होगी, जो संभव नहीं है. इसलिए हमें दो बुनियादी सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से टीकाकरण करना है. पहला-हमें उन लोगों का पहले टीकाकरण करना होगा, जिन्हें कोविड संक्रमण से मरने का खतरा ज्यादा है. दूसरा-जो लोग फ्रंट लाइन वर्कर्स, हेल्थकेयर वर्कर्स या अन्य हैं, उन्हें भी वैक्सीनेट करना बहुत जरूरी है, क्योंकि कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में हम इन्हें नहीं खो सकते. एक बार ऐसा हो जाने के बाद हम युवाओं पर फोकस कर सकते हैं. धीरे-धीरे सभी को वैक्सीनेशन के दायरे में लाया जा सकेगा.


  • 50-प्लस जनसंख्या के बारे में क्या? उनकी बारी कब आएगी है?

    एक बार जब हम शुरुआती लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे, तब हम कह सकते हैं कि अधिकांश बुजुर्ग, जो 60 वर्ष से अधिक उम्र के हैं; उन्हें टीका लगाया जा सकता है. ऐसे लोग जिनकी उम्र 45-59 उम्र हैं और किसी बीमारी की वजह से कम इम्युनिटी वाले हैं; उन्हें भी वैक्सीनेशन के दायरे में लाया जा सकता है. मुझे यकीन है कि अगर पर्याप्त खुराक है तो सरकार यह कदम उठाएगी. यह देर के बजाय जल्दी होना चाहिए. यह प्रारंभिक दिशा-निर्देश के अनुसार भी है.


  • वैक्सीन की भारी मात्रा में बर्बादी के बारे में क्या कहेंगे? क्या 6.5 प्रतिशत खुराक अपशिष्टों की एक बड़ी संख्या नहीं है?

    मुझे लगता है कि राज्यों को एक रणनीति विकसित करनी होगी, ताकि टीके बेकार न जाएं. हमें यह समझना चाहिए कि टीके शीशियों में आते हैं, जिनमें 20 खुराक होती हैं. इसलिए आपको एक रणनीति विकसित करनी होगी. इससे आप जान सकेंगे कि कितनी शीशियों को खोलना है. मान लीजिए आपके पास दिन के अंत में एक मामला आया. आप एक शीशी खोलते हैं और आपके पास केवल एक या दो लोग टीका लगाने वाले हैं. ऐसे में बाकी के छह खुराक बर्बाद हो सकती है. इसलिए प्रत्येक स्तर पर एक रणनीति विकसित करने की जरूरत है.


  • जिस दर पर हम टीकाकरण कर रहे हैं, उसे देखते हुए, हर्ड इम्युनिटी 12 साल दूर हो सकती है. क्या वायरस को हराने के लिए हर्ड इम्युनिटी ही मदद कर पाएगी?

    मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि हर्ड इम्युनिटी हासिल करने में वास्तव में लंबा समय लगेगा. हम इसे बिल्कुल भी प्राप्त करने में अभी सक्षम नहीं हो सकते हैं, वायरस लगातार म्युटेट हो रहा है. इसलिए ऐसी संभावना है कि एक समय में कोरोना वायरस इस हद तक म्युटेट हो जाएगा; जिससे 6 से 8 महीने पहले संक्रमित हो चुके लोगों की इम्युनिटी भी वायरस के नए स्ट्रेन से लड़ने में कमजोर हो जाएगी. इसलिए मुझे लगता है कि हमें कोरोना को फैलने से रोकने के लिए गाइडलाइंस का पूरी लगन से पालन करना होगा. मास्क का इस्तेमाल करना होगा और सामाजिक दूरी का ख्याल हमेशा रखना है.



  • भारत में क्या कोरोना की दूसरी लहर चल रही है? क्या यह नया म्युटेट स्ट्रेन है या फिर पुराने का ही शक्तिशाली वर्जन है?

    इसे कई कारकों द्वारा संचालित किया जा रहा है. एक कारक में कोरोना निश्चित रूप से विकसित और अधिक प्रभावी हो सकता है, लेकिन भले ही वायरस विकसित हो गया है और अधिक संक्रामक हो गया है, ये केवल तभी फैल पाएगा जब हम इस फैलने देंगे. इसलिए हमें कोरोना को फैलने से रोकने के लिए सरकार द्वारा बताए गए गाइडलाइन का सख्ती के साथ पालन करना ही है. हमने देखा है कि लोगों ने मास्क पहनना बंद कर दिया है. सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल नहीं रखा जा रहा. लोग बिना मास्क और उचित दूरी के ही एक-दूसरे से मिल रहे हैं, जो कि बिल्कुल भी सही नहीं है. ऐसे में कोरोना का कोई भी नया स्ट्रेन वास्तव में बहुत तेजी से फैल जाएगा. यही विभिन्न राज्यों में हो रहा है. वैक्सीन आने के बाद से लोगों ने कोरोना के गाइडलाइन का पालन करना छोड़ दिया है. हमें समझना होगा कि वैक्सीन आई है, लेकिन कोरोना वायरस अभी खत्म नहीं हुआ है.


  • होली आने वाली है, क्या ये संभावित सुपर स्प्रेडर घटना हो सकती है?

    असल में यही डर है. लोगों को समझना होगा कि इस बार होली उत्सव बहुत सीमित और प्रतिबंधित तरीके से मनाया जाए. महामारी के बढ़ने के कारण इस बार भी ​​होली मिलन और इवेंट्स नहीं हो सकते. अगर सावधानी नहीं बरती गई, तो ये सुपर-स्प्रेडिंग इवेंट बन जाएगा. इसलिए, मुझे लगता है कि जीवन की रक्षा करने, जीवन बचाने और लोगों को बीमार होने से बचाने के संदर्भ में अधिक से अधिक सीमित तरीके से होली मनाई जानी चाहिए.


  • कोरोना की दूसरी लहर का प्रजनन कारक पहली लहर से 1.32 अधिक है. इसका मतलब है कि एक संक्रमित व्यक्ति पिछली बार की तुलना में अधिक लोगों को संक्रमित कर रहा है. क्या यह कहना उचित है कि दूसरी लहर अधिक खतरनाक साबित होगी?

    हालात को देखते हुए कहा जा सकता है कि बेशक दूसरी लहर अधिक शक्तिशाली बन सकती है. लेकिन इस दूसरी लहर को नियंत्रित करने में सक्षम होना हमारी समझ में है. हमें वास्तव में आक्रामक रूप से दो या तीन चीजों का पालन करना चाहिए. पहला- हर कोई जो टीकाकरण के लिए प्राथमिकता सूची में है, उन्हें डोज देनी होगी. वैक्सीनेशन प्राथमिकता सूची के आधार पर ही होना चाहिए. अगर हम युवा लोगों को पहले टीका लगाना शुरू करते हैं और बुजुर्गों को बाद में, तो ये गलत होगा. उन लोगों को वैक्सीन की जरूरत पहले हैं, जो कमजोर इम्युनिटी वाले हैं और जिन्हें वायरस से जान का खतरा ज्यादा है. दूसरा-हमें आक्रामक तरीके से कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना होगा. हमें मास्क पहनना है और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना है, ताकि ट्रांसमिशन की चेन को तोड़ा जा सके. तीसरा- हम छह महीने पहले जो कर रहे थे, उस पर वापस जाना चाहिए: आक्रामक निगरानी, ​​आक्रामक सूक्ष्म नियंत्रण क्षेत्र, परीक्षण, ट्रैकिंग, व्यक्तियों को अलग करना, यह सुनिश्चित करना कि वे संक्रमण नहीं फैला रहे हैं. वैक्सीन आने के बाद से सब कुछ सुस्त पड़ गया है.


  • ऐसा कैसे है कि जिन लोगों को टीका लगाया गया है, वो फिर से कोविड पॉजिटिव हो रहे हैं? पाकिस्तान के पीएम इमरान खान हाल ही में कोरोना संक्रमित हो गए. भारत में डॉक्टरों सहित कई लोगों को भी यह अनुभव हुआ है.

    अगर आपको टीका लगाया जाता है, खासकर आपको पहली खुराक मिली है और दूसरी खुराक नहीं, तो भी आपके पास पर्याप्त इम्युनिटी नहीं है. ऐसे में आपको कोरोना संक्रमण का खतरा है. अगर आपको दूसरी खुराक मिल गई है और उसके दो सप्ताह बाद की अवधि है, तो हम कह सकते हैं कि आपके पास अब अच्छी संख्या में एंटी-बॉडीज हैं. ये निश्चित रूप से आपको एक गंभीर संक्रमण होने से बचाएगा.वैक्सीन ने वैसे तो अधिकांश व्यक्तियों को दोबारा संक्रमित होने से बचाया है. लेकिन आपको अभी भी हल्का संक्रमण हो सकता है. इसलिए टीका लेने के बाद भी आपको कोरोना के खिलाफ नियमों का पालन करना होगा.



  • टीका कब तक प्रभावी रहता है? क्या हर साल एक डोज लेनी होगी?

    यह एक कठिन सवाल है. हम किसी भी टीके के लिए यह कहने के लिए अभी निश्चित नहीं हैं कि ये कितने समय तक सुरक्षा देगा. एक वैक्सीन दूसरे वैक्सीन से कारगरता के मामले में भिन्न होगी. मॉडल डेटा से पता चलता है कि प्रतिरक्षा आठ महीने से एक वर्ष तक रहेगी, लेकिन हमें यह स्पष्ट करने की आवश्यकता है कि जो होगा वह दो चीजों पर निर्भर करता है: 1) टीका कितनी प्रतिरक्षा देता है. 2) टीके द्वारा उत्पादित एंटीबॉडी के संदर्भ में वायरस कितना बदल जाता है, जो आपको मिला है. इसलिए, भविष्यवाणी करना मुश्किल है. अभी, डेटा का सुझाव है कि प्रतिरक्षा आठ महीने से एक वर्ष तक चलेगी, लेकिन मैं कहूंगा कि हमें वास्तव में यह देखने के लिए अधिक फॉलो-अप की आवश्यकता है कि वायरस यह कहने के लिए कैसे विकसित होता है कि लंबे समय में टीका कितना संरक्षण देता है.

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