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जिनपिंग-ट्रंप की बढ़ी दूरियों के बीच क्या ट्रेड वॉर से भारत उठा पाएगा फायदा?

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Updated: October 12, 2019, 9:32 PM IST
जिनपिंग-ट्रंप की बढ़ी दूरियों के बीच क्या ट्रेड वॉर से भारत उठा पाएगा फायदा?
चीन और अमेरिका के बीच लंबे वक्त से ट्रेड वॉर चल रहा है (न्यूज18 क्रिएटिव)

ट्रेड वॉर (Trade War) ने कई सारे अवसर पैदा किए थे. इस मामले में विशेषज्ञों का मानना है कि भारत (India) ने वह अवसर छोड़ दिए, जिनका इस इलाके की कई सारी छोटी अर्थव्यवस्थाओं (Small Economies) ने फायदा उठाया.

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  • Last Updated: October 12, 2019, 9:32 PM IST
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(उदय राणा सिंह)

नई दिल्ली. जब चीनी राष्ट्रपति (Chinese President) शी जिनपिंग (Xi Jinping) महाबलीपुरम में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के साथ मुस्कुरा रहे थे तो उनके उप-प्रमुख और मुख्य समझौताकार लिउ ही अमेरिका (America) के वॉशिंगटन डीसी में थे. अमेरिका के साथ चली कई दौर की बातचीत के बाद बीजिंग को अंतत: कुछ ऐसा हासिल हुआ, जिसे वह अपनी सफलता के तौर पर गिना सकता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा है कि जल्द ही वे चीन के साथ एक आंशिक व्यापार समझौते (Partial Trade Deal) पर हस्ताक्षर करेंगे, जिस पर दोनों ही देशों के राष्ट्रपति नवंबर के महीने में होने वाली एशिया-पैसेफिक इकॉनमिक कॉपरेशन (APEC) की बैठक के दौरान हस्ताक्षर कर सकते हैं.

अमेरिका समझ चुका है चीन की चालाकी

इससे दोनों पक्षों के बीच बढ़ चुकी तनाव में कुछ कमी आने की आशा है लेकिन इस समझौते में तीसरे पक्ष के तौर पर शामिल भारत समेत अन्य अर्थव्यवस्थाओं की नज़रें इस घटनाक्रम को काफी करीब से देख रही हैं. 2017 से चल रहा अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध से बनी परिस्थितियों का अन्य अर्थव्यवस्थाओं ने फायदा उठाया था. लेकिन क्या इस डील के फेज-1 पर हस्ताक्षर के साथ ही ट्रेड वॉर का अंत हो जाएगा और क्या भारत अभी भी उसका फायदा ले पाएगा?

इंस्टीट्यूट ऑफ चाइनीज स्टीड के जाबिन जैकब का कहना है कि अभी व्यापार युद्ध खत्म होने से बहुत दूर है. उन्होंने कहा, 'यह खत्म नहीं होने जा रहा है. हमारे हाथ में जो मसला है, बहुत उलझा हुआ है. यह (जिस आंशिक समझौते की घोषणा हुई है) चीनियों को सिर्फ थोड़े समय का आराम देगी. ट्रंप प्रशासन मानता है कि चीन सिस्टम का धोखे के जरिए फायदा उठा रहा है और ट्रंप के अंतर्गत चीनी चालाकी खत्म हो चुकी है. चीन भी इस बात को जानता है. इसलिए वह भी अमेरिका के साथ दूरी बनाकर दूसरे बाजारों को खंगालने में जुटा है. इन बाजारों में अफ्रीकी देश भी शामिल हैं.

उल्टे हो चुके हैं चीन और अमेरिका के व्यापार संबंध
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जैकब ने यह भी कहा, 'चीन और अमेरिकी संबंधों में भी यह पुर्नसंगठन या पुर्नस्थापना का दौर है. आज चीन अमेरिका को तकनीक भेजता है और अमेरिका चीन को खेतों में उत्पादित चीजें भेजता है. इन दोनों के बीच पूर्व के स्थापित व्यापार संबंध अब उल्टे हो चुके हैं.'

भूराजनैतिक मामलों के विशेषज्ञ पथिकृत पायने कहते हैं, अमेरिका और चीन के बीच व्यापार घाटा करीब 300 बिलियन डॉलर का है. इसके साथ ही ट्रंप के सामने अगले साल होने वाले चुनाव हैं. वह कठिन फैसले लेंगे. इसलिए चीन को एक बड़े मार्केट की जरूत थी और भारत इसके लिए अवसर पैदा कर सकता था."

वियतनाम और बांग्लादेश ने उठाया इसका फायदा
जैकब ने कहा कि चीन के ट्रेड वॉर ने अवसर उपलब्ध कराए थे. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत ने इस अवसर को खो दिया है और इसका फायदा इसी इलाके में मौजूद छोटी अर्थव्यवस्थाओं ने उठाया है. उन्होंने कहा, 'ट्रेड वॉर का सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाले एशियाई देश वियतनाम और बांग्लादेश रहे. लगता है कि भारत ने अपना अवसर खो दिया क्योंकि उसके घर के अंदर ही सबकुछ सही नहीं चल रहा था.'

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में इससे आई तेजी
यह विकास के आंकड़ों में भी देखा जा सकता है. जब भारत अपने यहां आर्थिक सुस्ती से निपटने में जुटा है, बांग्लादेश दक्षिण एशिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश बनकर उभरा है. बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था 2018 में 7.9% की दर से बढ़ रही थी लेकिन 2019 में यह 8.1% रही. जैकब मानते हैं कि इसका जवाब भारत की संघीय व्यवस्था में छिपा हुआ है. वे मानते हैं कि भारत की केंद्र सरकार को राज्यों को और कंट्रोल देना चाहिए और उन पर विश्वास करना चाहिए. चीन में भी ऐसी ही व्यवस्था है.

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First published: October 12, 2019, 8:10 PM IST
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