क्या येदियुरप्पा का कुमारस्वामी से CM पद छीनना वोक्कालिगा VS लिंगायत की लड़ाई है?

1 नवंबर,1956 को कर्नाटक के पुनर्गठन के बाद लिंगायत समुदाय के लोगों ने राज्य की राजनीति में भाग लिया और 1956 और 1972 के बीच केवल इसी समुदाय के लोग मुख्यमंत्री रहे.

D P Satish | News18Hindi
Updated: May 17, 2018, 7:57 PM IST
क्या येदियुरप्पा का कुमारस्वामी से CM पद छीनना वोक्कालिगा VS लिंगायत की लड़ाई है?
येदियुरप्पा-कुमारस्वामी फाइल फोटो
D P Satish | News18Hindi
Updated: May 17, 2018, 7:57 PM IST
कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई वाली बीजेपी की सरकार बनाने के लिए पार्टी हाई कमान ने पूरी ताकत झोंक दी है. सरकार बनाने की इस नोक-झोंक से राज्य एक बार फिर लिंगायत-वोक्कालिगा की पुरानी लड़ाई में उलझता दिख रहा है.

पिछले पांच सालों में बीजेपी के साथ अपने रिश्ते सुधारने में लगे देवगौड़ा के लिए वोक्कालिगा सबसे बड़ा वोट बैंक और उनकी रीढ़ की हड्डी की तरह हैं. हालांकि, एचडी कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री पद ना देने के कारण पार्टी अब बीजेपी के खिलाफ हो गई है.

1 नवंबर,1956 को कर्नाटक के पुनर्गठन के बाद लिंगायत समुदाय के लोगों ने राज्य की राजनीति में भाग लिया और 1956 और 1972 के बीच केवल इसी समुदाय के लोग मुख्यमंत्री रहे. 1994 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले देवगौड़ा पहले वोक्कालिगा सीएम बने. इसके बाद देवगौड़ा ने दिल्ली जाने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया और 1999 में एसएम कृष्णा दूसरे वोक्कालिगा मुख्यमंत्री बने. 2006 में एचडी कुमारस्वामी 20 महीने के लिए मुख्यमंत्री बने. अगर पूरे आंकड़ों की बात करें, तो 1956 से वोक्कालिगा समुदाय लोग मात्र 92 महीने के मुख्यमंत्री रहे. वहीं लिंगायत समुदाय के मुख्यमंत्रियों ने 27 सालों तक कर्नाटक में राज किया.

वोक्कालिगा समुदाय के लोग पूर्ण रूप से किसान हैं और ओल्ड मैसूर के जिलों में स्थापित है और कर्नाटक की पूरी जनसंख्या के ये 11-12 प्रतिशत हैं. लिंगायत समुदाय की जनसंख्या कर्नाटक के कुल जनसंख्या का 15 प्रतिशत है और वे राज्य के उत्तर और दक्षिण के कुछ भाग में स्थापित हैं.

लिंगायत और वोक्कालिगा के बीच की दुश्मनी स्वतंत्रता से पहले के दिनों की है. स्वतंत्रता के बाद राजनीति में लिंगायत के वर्चस्व के डर से वोक्कालिगा समुदाय के ज्यादातर नेताओं ने कन्नड़ भाषी सभी क्षेत्रों को ओल्ड मैसूर राज्यों में शामिल करने का विरोध किया. लेकिन, ओल्ड मैसूर के मुख्यमंत्री और एक बड़े वोक्कालिगा नेता केंगल हनुमंतैया ने सभी नेताओं के बातों को दरकिनार करते हुए सबको एक करने के फैसले का समर्थन किया. मुश्किल यह रही कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया और एक बड़े लिंगायत नेता एस निजलिंगप्पा 1956 में संयुक्त कर्नाटक के पहले मुख्यमंत्री बने. इसके बाद वोक्कालिगा समुदाय के मुख्यमंत्री को देखने के लिए वहां की जनता को 38 साल लगे.


ओल्ड मैसूर के आठ जिलों में गौड़ वंश का वर्चस्व होने के नाते बीजेपी आज इन जिलों में अपने पार्टी को स्थापित नहीं कर पाई है. यहां लड़ाई सिर्फ कांग्रेस और जेडीएस के बीच है. हालांकि, बेंगलुरु में बीजेपी की अच्छी उपस्थिति रही है.

गौड़ा को पछाड़ने के लिए बीजेपी ने कुछ वोक्कालिगा नेतओं को भी खड़ा किया लेकिन इनमें से कोई भी गौड़ा के तख्ते को हिला नहीं पाया. बीजेपी ने वोक्कालिगा को रिझाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी सहारा लिया जो खुद नाथ संप्रदाय के मठ के मठाधीश हैं. वोक्कालिगा मठ भी नाथ संप्रदाय का मठ है, हालांकि, ज्यादातर वोक्कालिगा वैष्णववाद का न पालन कर शैववाद का पालन करते हैं.


कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के वोक्कालिगा के खिलाफ कथित विरोध ने बीजेपी को वोक्कालिगा क्षेत्र के 9 विधानसभा सीटों पर जीत दिला दी. यह सभी विधायक अब अपने भविष्य को लेकर चिंता में हैं कि गौड़ा के भावनाओं को ठेस पहुंचाना उनके लिए बहुत बुरा साबित हो सकता है. वोक्कालिगा क्षेत्रों में बीजेपी की जीत को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, ''कांग्रेस जेडीएस को बीजेपी का बी टीम नहीं कहना चाहिए था.''

2008 में येदियुरप्पा के साथ कुमारस्वामी ने ऐसा बर्ताव किया था और उन्हें सीएम का पद देने से इनकार कर दिया था, जिसे येदियुरप्पा ने गलत बताया था. आज 10 साल बाद येदियुरप्पा ने इसका बदला लेते हुए सीएम की कुर्सी हालिस कर लिया है और अब कुमारस्वामी इसे गलत बता रहे हैं. अब 2019 लोकसभा चुनावों में क्या होगा ये देखना बाकी है.

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