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येदियुरप्पा ने लिंगायत कार्ड खेलकर BJP को फंसाया या खुद के पैरों में मारी कुल्हाड़ी?

येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) ने अपनी जाति वीरशैव-लिंगायत(Lingayat) को ओबीसी सूची के तहत लाने का प्रस्ताव लाकर एक बड़ा दांव खेला है.
येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) ने अपनी जाति वीरशैव-लिंगायत(Lingayat) को ओबीसी सूची के तहत लाने का प्रस्ताव लाकर एक बड़ा दांव खेला है.

येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) के इस कदम ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को भी नाराज़ कर दिया है. आरएसएस हिंदू एकता में विश्वास करता है और चाहता है कि लोग जातिगत संबद्धता से ऊपर उठें. संघ को लगता है कि येदियुरप्पा ने जानबूझकर या अनजाने में कुछ ऐसा कर दिया है, जो आरएसएस ने पिछले कुछ वर्षों में नहीं किया. इससे आरएसएस की इमेज खराब हुई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 4:18 PM IST
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(डीपी सतीश)

बेंगलुरु. कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) ने अपनी जाति वीरशैव-लिंगायत (Lingayat) को ओबीसी सूची के तहत लाने का प्रस्ताव लाकर एक बड़ा दांव खेला है. उन्होंने इस समुदाय के विकास के लिए लिंगायत विकास निगम बनाने का प्रस्ताव भी रखा है. कुछ राजनीतिक पंडित इसे मास्टरस्ट्रोक बताते हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक हारा-गिरि कहते हैं. दोनों फैसलों को राज्य में जातिगत आधार पर विभाजन के खतरे के रूप में देखा जा रहा है. राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा भी है. जाहिर तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को इससे नाराजगी है.

शुक्रवार को अपने मंत्रिमंडल में सर्वसम्मति की कमी और बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद ओबीसी सूची के तहत वीरशैव-लिंगायत समुदाय को शामिल करने के प्रस्ताव को अंतिम समय पर फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया गया है.



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राजनीतिक पंडित इस बात पर भी अलग-अलग मत रखते हैं कि वास्तव में 78 वर्षीय येदियुरप्पा को किसने जातिगत दांव खेलने के लिए प्रेरित किया. कुछ लोगों का तर्क है कि उन्होंने अपने पक्ष में लिंगायतों के समर्थन को मजबूत करके अपनी अस्थिर कुर्सी को बचाने के लिए ऐसा किया है. दूसरों को लगता है कि यह सिर्फ एक तुरंत लिया गया फैसला है. इससे सरकार और बीजेपी के साथ उनके संबंध और खराब हो गए हैं.

अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के बाद लिंगायत कर्नाटक में सबसे बड़ी जाति हैं. महान समाज सुधारक बसवन्ना ने 12 वीं शताब्दी में खुद को अलग धर्म कहने वाले सवर्ण शैव को लिंगायत के रूप में स्थापित किया था. तब से ये जाति राजनीतिक और आर्थिक रूप से सबसे प्रभावशाली हैं. येदियुरप्पा को उनका निर्विवाद नेता माना जाता है. उनके साथ इस समुदाय का विशाल समर्थन है. येदियुरप्पा ने लिंगायत विकास निगम का गठन करने के बाद कम से कम 50 अन्य जातियों के लिए समान बोर्ड और निगमों की मांग की.


कुछ अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, येदियुरप्पा के इस कदम ने आरएसएस को परेशान कर दिया है. आरएसएस हिंदू एकता में विश्वास करता है और चाहता है कि लोग जातिगत संबद्धता से ऊपर उठें. संघ को लगता है कि येदियुरप्पा ने जानबूझकर या अनजाने में कुछ ऐसा कर दिया है, जो आरएसएस ने पिछले कुछ वर्षों में नहीं किया. इससे आरएसएस की इमेज खराब हुई है.

तीन साल पहले कांग्रेस में लिंगायत नेता एमबी पाटिल ने एक अलग लिंगायत धर्म के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया था. तब येदियुरप्पा ने उन पर हिंदू धर्म को विभाजित करने का आरोप लगाया था. अब खुद येदियुरप्पा ने वही किया, जिसके लिए उनकी कड़ी आलोचना हो रही है.

येदियुरप्पा के बाद दूसरे सबसे प्रभावशाली लिंगायत नेता एमबी पाटिल वर्तमान घटनाओं पर चुप्पी साधे हुए हैं. उन्होंने घटनाक्रम पर टिप्पणी करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वह सिर्फ अभी चीजों पर नजर रख रहे हैं. समय आने पर बोलेंगे. लेकिन, पाटिल के अनुयायी बीजेपी और आरएसएस को ताना मार रहे हैं कि उनके अपने आदमी येदियुरप्पा ने हिंदू धर्म को विभाजित करने का काम किया है.


लिंगायत धर्म के नेताओं ने कहा, 'यह तथ्य है कि बासवन्ना ने हिंदू जाति व्यवस्था से लड़ने के लिए लिंगायत धर्म की स्थापना की. वह एक समतावादी, जातिविहीन समाज बनाना चाहते थे. हम निश्चित रूप से एक अलग धर्म हैं, लेकिन, येदियुरप्पा अब हर जाति के लिए बोर्ड और निगमों का गठन कर पूरे हिंदू धर्म को जाति की तर्ज पर विभाजित कर रहे हैं. इसे किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता.' कांग्रेस इस पूरे मामले की संवेदनशील प्रकृति से अवगत है, लेकिन अभी तक पार्टी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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जब येदियुरप्पा केंद्र को लिंगायतों के लिए आरक्षण का प्रस्ताव भेजते हैं, तो नई दिल्ली में बीजेपी नीत एनडीए सरकार को इसे अत्यंत सावधानी के साथ देखना होगा, क्योंकि भविष्य में किसी भी व्यक्ति का ऐसा दुस्साहस भगवा पार्टी को महंगा पड़ सकता है. बहरहाल, समय ही बताएगा कि क्या येदियुरप्पा ने जातिगत कार्ड खेलकर आलाकमान को फंसाया है या खुद ही अपनी जाल में फंस गए हैं.
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