सरकार से पूछे बिना ही संजय दत्त को कर दिया गया था यरवदा जेल से रिहा...

राजीव गांधी के 7 हत्यारों में से एक एजी पेरारिवालन ने संजय दत्त की रिहाई से जुड़ी जानकारियों के लिए आरटीआई दायर की थी, जिस पर यरवदा जेल प्रशासन की तरफ से यह जवाब आया है.

News18Hindi
Updated: May 16, 2019, 12:18 PM IST
सरकार से पूछे बिना ही संजय दत्त को कर दिया गया था यरवदा जेल से रिहा...
संजय दत्त (फ़ाइल फोटो)
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Updated: May 16, 2019, 12:18 PM IST
बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की वक़्त से पहले हुई रिहाई के लिए केंद्र सरकार से सलाह-मशविरा नहीं किया गया था. एक आरटीआई के जवाब में यरवदा जेल प्रशासन ने बताया है कि ऐसे मामलों के संबंध में केंद्र या राज्य सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है, इसलिए संजय दत्त की वक़्त से पहले रिहाई के लिए जेल मैनुअल के हिसाब से फैसला लिया गया था.

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क्या है मामला?
राजीव गांधी के 7 हत्यारों में से एक एजी पेरारिवालन ने संजय दत्त की रिहाई से जुड़ी जानकारियों के लिए आरटीआई दायर की थी. इसी के जवाब में यरवदा जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ने बताया कि संजय दत्त की रिहाई से पहले केंद्र सरकार से इस बारे में सलाह लेने या सरकार को जानकारी देने जैसी कोई प्रक्रिया नहीं हुई थी.

जवाब में कहा गया है कि संजय की रिहाई महाराष्ट्र जेल मैनुअल के नियमों के मुताबिक की गई है. इस मैनुअल में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है कि अच्छे व्यवहार को आधार बनाकर होने वाली रिहाई से पहले केंद्र को सूचना दी जाए या फिर सलाह ली जाए. ये कदम सीआरपीसी या फिर संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नहीं आता है.

'संजय को जेल पहुंचाना उद्देश्य नहीं'
उधर पेरारिवालन का तर्क है कि संजय दत्त को आर्म्स एक्ट के तहत सजा हुई थी और उनकी वक़्त से पहले रिहाई के लिए केंद्र से सलाह-मशविरा करना ज़रूरी था. हालांकि पेरारिवालन ने ये भी कहा है कि आरटीआई के पीछे उनका मकसद संजय को वापस जेल में पहुंचाना नहीं है. वो ये साबित करना चाहते हैं कि उनके केस और संजय के केस में 'एक्ट ऑफ़ टेरर' का उल्लेख किया गया था लेकिन वक़्त से पहले रिहाई के मामले में दोनों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा है.पेरारिवालन के वकील ने अंग्रेजी अखबार द हिंदू से बातचीत में कहा कि आर्म्स एक्ट के मामले में सिर्फ केंद्र सरकार ही सजा घटाने या वक़्त से पहले रिहाई के जैसे फैसले लेने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत है, ऐसे में जेल मैनुअल का हवाला देने से भी ये रिहाई गैर-कानूनी नज़र आती है. दोनों ही केस में जांच सीबीआई ने की थी और दोषी पाया था लेकिन सजा माफ़ करने के मामले में अलग व्यवहार किया जा रहा है.

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